किसान ऐसे सुधार सकते हैं मिट्टी का स्वास्थ्य (soil health)

मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के आसान तरीके

मिट्टी कृषि का आधार है। इसलिए मिट्टी के स्वास्थ्य को बरकरार रखना ज़रूरी है। इस ब्लॉग में हम उन सभी उपायों पर गौर करेंगे जो मिट्टी को बेहतर बनाते हैं।

03 October 2020

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    मिट्टी (soil) को हम भारत में ‘माँ’ का दर्जा देते हैं। अमूमन हम सबको हमारी ज़मीन और मिट्टी प्यारी होती है और किसानों के लिए मिट्टी क्या मायने रखती है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। इसलिए आज के ब्लॉग में हम अपने किसान भाइयों को मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे, जो आगे चलकर उनके लहलहाते फसलों का कारण बनेंगी। तो चलिए ये जानने की कोशिश करते हैं कि किन तरीकों से मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

     

    किसानों को जुताई (tillage) नहीं करनी चाहिए:

    ये बात सुनने में थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन जुताई करना आपके खेतों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। आपको बता दें कि जुताई से खेतों की मिट्टी सूखने लगती है, ज़मीन सख्त होती है और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व फसलों (crop) तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाते हैं। वहीं, इससे उपजाऊ क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए किसानों को खेतों की जुताई (tillage) से परहेज़ करना चाहिए। 

     

    आवरण फसलों (cover crops) पर ज़ोर देना चाहिए:

    आवरण फसलें (cover crops) खास तरह की फसलें होती हैं, जिनका उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त ये फसलें खरपतवारों को दबाने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा कीटों के नियंत्रण में भी मदद करती हैं। सबसे ज़रूरी बात, इससे जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है। इसलिए किसानों को आवरण फसलों (cover crops) पर ज़ोर देना चाहिए।

     

    फसल चक्र (crop rotation) को अपनाना चाहिए:

    फसल चक्र खेतों के लिए किसी संजीवनी की तरह है। अक्सर एक ही तरह की फसल के उत्पादन से मिट्टी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए अलग-अलग फसलों की उपज लेना किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प है। यहां आपको बताना ज़रूरी है कि फसल चक्र के ढेरों फायदे हैं। इससे मिट्टी के पोषक तत्वों में वृद्धि होती है, खरपतवारों में कमी आती है, कीट नियंत्रित होते हैं, पीएच लेवल संतुलित रहता है और सबसे बड़ी बात, किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होती है। है ना बिल्कुल आम के आम, गुठलियों के भी दाम!!

     

    मिट्टी को दबने (Soil compaction) से बचाना चाहिए:

    जब खेतों पर ट्रैक्टर आदि का अत्यधिक इस्तेमाल होता है या फिर गीली मिट्टी में जुताई कर दी जाती है, तो मिट्टी दबने लगती है। वहीं कुछ किसान अपने खेतों में वज़नी मशीनों का उपयोग भी करते हैं। इससे मिट्टी पर दबाव बढ़ता है और उसके छिद्र (pores) दबने लगते हैं। जब छिद्र दबते हैं, तो उससे उत्पादकता में भी असर पड़ता है। यहां तक कि फसलों को पानी भी ठीक से नहीं मिल पाता और उनकी जड़ें कमज़ोर रह जाती हैं। इसलिए किसानों को मिट्टी पर अधिक दबाव नहीं पड़ने देना चाहिए। 

     

    जैविक खेती (Organic farming) को अपनाना चाहिए।

    जैविक खेती मिट्टी के स्वास्थ्य (soil health) को कई गुना बेहतर बना देती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार तो होता ही है, साथ ही साथ मिट्टी की नमी भी बनी रहती है, जो अच्छी फसल के लिए ज़रूरी है। वहीं, इससे उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। सबसे अहम बात, जैविक खेती से मिले उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर भी खरे उतरते हैं, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलता है।

    हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा और आपको मिट्टी के स्वास्थ्य (soil health) पर कई नई जानकारियां मिली होंगी। हमारे अगले ब्लॉग में हम मिट्टी के स्वास्थ्य को बरकरार रखने के फायदों के बारे में बात करेंगे। 

     

     

     

    ब्लॉग की 5 प्रमुख बातें:

    ·    खेतों की जुताई मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। 

    ·    फसल चक्र से मिट्टी के पोषक तत्वों में वृद्धि होती है।

    ·    आवरण फसलें (cover crops) जैव विविधता को बढ़ावा देतीं हैं।

    ·   मिट्टी पर दबाव (Soil compaction) कृषि उत्पादकता में बाधक है।

    ·   जैविक खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा है।   

     

     



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