नीम से बनी खाद से मिलेंगे बेहतर कृषि उत्पाद

जानें, नीम की खाद खेतों के लिए है कितनी फायदेमंद?

नीम इन दिनों जैविक खेती (Organic Farming) के लिए संजीवनी बन चुका है। इससे बने खाद और कीटनाशकों की किसानों के बीच काफी मांग है। आइए, इसकी उपयोगिता को समझें।

08 February 2021

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  • वैसे तो “नीम” कड़वा होता है, मगर इन दिनों नीम की खाद किसानों के जीवन में मिठास घोल रही है। खेती हो या बागवानी, नीम की खाद धीरे-धीरे रासायनिक खाद की जगह लेती नज़र आ रही है। ये बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रासायनिक खाद के इस्तेमाल ने हमारे खेतों पर कई नकारात्मक प्रभाव डाले हैं।

     

    अब, जब हम जैविक खेती का झंडा उठाए भारतीय कृषि को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं, तो ये ज़रूरी हो जाता है कि हम इसके महत्व को भी समझें। तो चलिए Knitter के इस ब्लॉग के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नीम की उपयोगिता को समझने का प्रयास करते हैं। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, आपको बता दें कि यहां क्या-क्या जानकारियां मिलेंगी।

     

    आप जानेंगे-

    • नीम की उपयोगिता क्या है?
    • नीम की खाद क्या है?
    • इसके फायदे क्या हैं?
    • इसे कैसे बनाया जाता है?
    • नीम का कीटनाशक क्या है?
    • इसके फायदे क्या हैं?
    • इसका उपयोग कैसे किया जाना चाहिए?
    • नीम के प्रचलित उत्पाद कौन से हैं?
    • तो चलिए, शुरू करते हैं सफरनामा नीम का...

     

    बहुपयोगी नीम:  

     

    नीम का उपयोग हमारे देश में हज़ारों सालों से किया जा रहा है। जानकारों की मानें, तो नीम किसी संजीवनी की तरह है। नीम के पेड़ का एक-एक अंग हमारे काम आता है। फिर आप नीम की पत्तियां ले लीजिए, निम्बोली ले लीजिए या फिर इसकी छाल। इसके औषधीय गुण न सिर्फ इंसानी बीमारियां दूर करते हैं बल्कि खेतों के भी काम आते हैं।

     

    आलम ये है कि इन दिनों हमारे किसान केमिकल फर्टिलाइज़रों और कीटनाशकों से परहेज़ कर नीम से बनी खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उल्लेखनीय बात ये है कि नीम के प्रयोग से उन्हें अप्रत्याशित नतीजे भी मिल रहे हैं। लिहाज़ा, नीम को आज खेतों के सच्चे हकीम के रूप में देखा जा रहा है। वैसे भी हमारे वेदों में नीम को “सर्व रोग निवारिणी” कहा गया है। फिर रोग चाहे इंसानों का हो या फिर खेतों का...नीम सारी तकलीफ दूर करने की क्षमता रखता है।

     

    नीम है फसलों का सच्चा हकीम, जानें खेतों में इसका उपयोग

     

    नीम की खाद:

     

    नीम के पेड़ के अलग-अलग अंगों से बनाए जाने वाली जैविक खाद को नीम की खाद कहा जाता है। इसमें नीम की छाल, पत्तियां और फल आदि का उपयोग किया जाता है। जैविक खेती में इसका सर्वाधिक उपयोग होता है।

     

    फायदे:

    • फसल संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं
    • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है
    • मित्र कीटों को नुकसान नहीं पहुंचता
    • कार्बनिक तत्वों में वृद्धि होती है
    • मिट्टी की संरचना में सुधार होता है
    • जैव विविधता को नुकसान नहीं पहुंचता
    • फसलों को संतुलित पोषण मिलता है
    • साथ ही उनका उचित विकास होता है

     

    नीम की खाद बनाने की विधि:

     

    सबसे पहले एक बड़ी बाल्टी या टब लीजिए। उसमें नीम की सूखी फली (निम्बोलियां) डालें और फिर वेस्ट डीकम्पोज़र सॉल्यूशन (कचरा अपघटक) मिला दें। ध्यान रहे कि डीकम्पोज़र सॉल्यूशन खली के ऊपर तक भरा हो, ताकि वह उसे अच्छी तरह से सोख ले। 

     

    इसके बाद उसे ढक कर करीब 2 दिन तक ऐसे ही छोड़ दें। अब एक साफ कपड़े की मदद से उसे छान लें, ताकि फली से पानी अलग हो जाए। अब फली को किसी साफ कपड़े या पॉलिथीन में रखकर अच्छी तरह से सूख जाने दें। सूखने के बाद आप उन्हें अपने खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इनका पाउडर बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

     

    वहीं, फली से अलग किए गए पानी को आप किसी बॉटल आदि में भर लें। ये पानी आपके खेतों के लिए खाद और कीटनाशक दोनों का काम करेगा। अच्छी बात ये है कि ये पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता। लिहाज़ा, आप अपनी आवश्यकता के अनुसार, इसका कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

     

    आपको बता दें कि नीम के खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिसका फायदा आपके पौधों और फसलों को मिलता है। 

     

    नीम का कीटनाशक:

     

    इसे बनाने में मुख्यतः नीम की पत्तियां और निम्बोली का इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग नीम के तेल से भी कीटनाशक बनाते हैं। जानकारों के अनुसार नीम से बना कीटनाशक लगभग सभी कीटों की रोकथाम में मदद करता है।

     

    इन कीटों पर असरदार:

    • लीफ माइनर
    • बग
    • सफेद लट
    • दीमक
    • मकड़ी समेत कीटों की 400 से ज़्यादा प्रजातियों पर असरदार

     

    नीम कीटनाशक के फायदे:

    • वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचता
    • फसल संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं
    • कीटों की कई प्रजातियों पर असरदार 
    • किफायती भी है
    • इसके उपयोग से केमिकल मुक्त उत्पाद प्राप्त होते हैं

     

    कीटनाशक बनाने की विधि:

     

    करीब 2 किलो निम्बोली को चटनीनुमा तरीके से पीस लें। अब एक बाल्टी, टब या किसी प्लास्टिक ड्रम में करीब 5 लीटर वेस्ट डीकम्पोज़र सॉल्यूशन डालें। इसमें पीसी हुई निम्बोली मिक्स कर दें। अब उस पर ढक्कन लगा दें और तकरीबन 20 से 22 दिन तक उसे ऐसे ही छोड़ दें। इस तरह उस सॉल्यूशन में सारे न्यूट्रीन्ट्स घुल जाएंगे। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के अलावा एजाडेक्ट्रीन और सेल्युलोज़ जैसी चीज़ें भी शामिल होंगी।

     

    ऐसे करें इसका उपयोग:

     

    ध्यान रहे कि आपको सारा सॉल्यूशन सीधे प्रयोग में नहीं लेना है। करीब 5 प्रतिशत सॉल्यूशन लेना ही काफी होगा। इसके लिए बेहतर रहेगा कि आप 5 लीटर नीम के सॉल्यूशन में तकरीबन 45 लीटर वेस्ट डीकम्पोज़र सॉल्यूशन और करीब 50 लीटर पानी मिला लें। अब आप इसे किसी बड़े ड्रम में सुरक्षित रखें और अपनी आवश्यकता के अनुसार, समय-समय पर उपयोग में लाएं। आप 5 से लेकर 30 प्रतिशत तक इस सॉल्यूशन का उपयोग कर सकते हैं। 

     

    आपको बता दें कि ये कीटनाशक सालों तक खराब नहीं होता है। इसलिए आप लंबे समय तक इसे प्रीज़र्व करके रख सकते हैं। बशर्ते इस मिश्रण को छांव में ही तैयार करें और छांव में ही रखें।

     

    नीम से बने खाद और कीटनाशक के कुछ प्रचलित उत्पाद:

     

    नीम कोटेड यूरिया: नीम के तेल को यूरिया के दानों के साथ मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। यूरिया पर नीम के तेल की एक पतली परत सी चढ़ा दी जाती है। इसका फायदा मिट्टी को भी मिलता है, क्योंकि नीम कोटेड यूरिया से नाइट्रोजन की दक्षता बढ़ती है। देखा जाए तो खाद और कीटनाशक के तौर पर यह एक बेहतरीन विकल्प है। ये इतना ज़्यादा प्रभावी है कि सरकार भी नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।

     

    नीम है फसलों का सच्चा हकीम, जानें खेतों में इसका उपयोग

     

    नीम केक: नीम की निम्बोली से तेल निकालने के बाद जो अवशेष रह जाता है, उससे ही नीम केक तैयार किया जाता है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे माइक्रो न्यूट्रीन्ट्स पाये जाते हैं, जो फसलों के लिए बेहद ज़रूरी होते हैं। खेती, बागवानी और फूलों की खेती में इस प्राकृतिक खाद व कीटनाशक का उपयोग किया जाता है।

     

    नीम ऑयल: नीम का तेल किसी कीटनाशक की तरह काम करता है। कीटों की रोकथाम के लिए पानी में 2 प्रतिशत नीम का तेल ही काफी होता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं। यदि आप 100 लीटर पानी लेते हैं, तो उसमें 2 लीटर नीम का तेल मिला लीजिए। इस तरह आप एक तरह का जैविक कीटनाशक तैयार कर लेते हैं। यदि आप हर 15 दिन में भी अपने खेतों में इसका छिड़काव करेंगे, तो कीट आपकी फसलों के आस-पास भी नहीं भटकेंगे।

     

    नीम है फसलों का सच्चा हकीम, जानें खेतों में इसका उपयोग

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण के अलावा बिज़नेस, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।\

     

    ✍️    

    लेखक- कुंदन भूत      

     



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