जैविक कृषि के तरीकों (Types of organic farming) पर एक नज़र

जानें, जैविक कृषि (organic farming)के विभिन्न तरीकों के बारे में

जैविक कृषि के कई तरीके हैं, जिनका उपयोग किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कर सकते हैं। आज इस ब्लॉग के ज़रिए हम इसी पर बात करेंगे।

19 October 2020

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  • ‘जैविक कृषि’ (organic farming) भारत के लिए कोई नई चीज़ नहीं है। प्राचीन समय से ही कृषि क्षेत्र में इसका विशेष योगदान रहा है। इतना विशेष, कि आज ढेरों उन्नत विकल्पों के बीच पूरे देश में एक बार फिर से जैविक कृषि की बात की जा रही है। किसान तो किसान, सरकारें भी इसे अब गंभीरता से ले रहीं हैं। तो चलिए आज इस ब्लॉग के ज़रिए हम जैविक कृषि के कुछ खास तरीकों पर बात करते हैं। साथ ही यह जानने का भी प्रयास करते हैं कि कौन से ऐसे राज्य हैं, जो इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।

     

    जैविक कृषि के तरीके (Types of organic farming)-

     

    शुद्ध जैविक कृषि (Pure organic farming):

    जैविक कृषि की यह तकनीक पूरी तरह ‘शुद्धता’ पर आधारित है। यहां शुद्धता से हमारा मतलब केमिकल के ‘ज़ीरो उपयोग’ से है। इसमें केमिकल फर्टिलाइज़र व कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया जाता है। इनकी बजाय, सिर्फ़ जैविक खाद व कीटनाशक ही प्रयोग में लाए जाते हैं। ख़ास बात यह है कि प्राकृतिक स्रोत ही जैविक कृषि की इस तकनीक का आधार है। 

     

    एकीकृत जैविक कृषि (Integrated organic farming):

    जैविक कृषि का यह स्वरूप मिट्टी को मिलने वाले पोषण और कीट प्रबंधन (pest management) की मिली-जुली तकनीक पर आधारित है। इसके तहत किसान प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए कृषि कार्यों को अंजाम देते हैं। इस दौरान मिट्टी के पोषक तत्वों को बरकरार रखने पर ज़ोर दिया जाता है। खेतों पर ऐसी किसी भी चीज़ का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे मिट्टी को नुकसान पहुंचे। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि खेतों को कीटों आदि से खतरा न हो। 

     

    एकीकृत हरित क्रांति जैविक कृषि (Integrated green revolution farming):

    जैविक कृषि की यह तकनीक उत्पादन क्षमता के लिहाज़ से बेहद अहम है। इसमें हाइब्रिड बीजों का उपयोग किया जाता है। साथ ही सिंचाई पर ज़ोर देते हुए खेतों में मशीनों का प्रयोग भी किया जाता है। लेकिन इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान दिया जाता है कि इससे मानव स्वास्थ्य और मिट्टी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान दिया जाता है कि पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। संक्षेप में कहें, तो यह जैविक और आधुनिक कृषि की एक संतुलित तकनीक है, जो उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है।

     

    अब तक हमने ये जाना कि किन-किन तरीकों से जैविक कृषि की जाती है। लेकिन इस बीच हमारा यह जानना भी ज़रूरी है कि देश के कौन से राज्यों में इस पर बल दिया जा रहा है। जैविक कृषि में महारत रखने वाले वाले सिक्किम के बारे में तो हमने अपने पिछले ब्लॉग में जान लिया था। आइए, अब एक नज़र उन राज्यों पर भी डाल लेते हैं, जो जैविक कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।

     

    हिन्दुस्तान का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र भी जैविक कृषि के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं। भले ही कुल बुआई क्षेत्र के लिहाज़ से ये राज्य अब भी उतने प्रभावी नज़र नहीं आते हैं, लेकिन धीरे-धीरे बेहतर नीतियां अपनाई जा रहीं हैं। इन राज्यों में कुल बुआई क्षेत्र (net sown area) की स्थिति क्रमशः 4.9, 2.0 तथा 1.6 प्रतिशत ही है, जो कि काफी कम है। लेकिन उत्पादन में वे काफी आगे हैं। वहीं, उत्तराखंड, मेघालय, मिज़ोरम और गोआ आदि की बात करें, तो इन राज्यों में जैविक कृषि का कुल बुआई क्षेत्र (net sown area) करीब 10 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त दिल्ली, दमन और दीव जैसे केंद्र शासित राज्यों में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन चूंकि ये राज्य क्षेत्रफल के लिहाज़ से काफी छोटे हैं, जैविक कृषि बहुत बड़े पैमाने पर नहीं हो पाती है, जिसका प्रभाव उत्पादन पर देखा जा सकता है।

     

    हम आशा करते हैं कि जैविक कृषि पर हमारा यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। यदि आप जैविक कृषि के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं, तो आपको हमारा ब्लॉगजानें, जैविक कृषि (organic farming) के फायदों के बारे में ज़रूर पढ़ना चाहिए। 



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