सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना: जच्चा-बच्चा का सुरक्षा कवच

SUMAN योजना मातृ मृत्यु दर को ऐसे कर रही है कम

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN Scheme) गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में मददगार है। इससे मातृ मृत्यु दर में भी कमी आ रही है। आइए, इसे जानें।


करीब 3 दशक पहले मैटरनल हेल्थ (Maternal Health) के मामले में भारत की स्थिति ज़्यादा अच्छी नहीं थी। जागरूकता और उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का खामियाज़ा अक्सर जच्चा और बच्चा दोनों को भुगतना पड़ता था। कई बार मां और बच्चे दोनों की मृत्यु हो जाती थी। लेकिन, बीते कुछ सालों में हालात बदले हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलाई जा रही योजनाओं (government schemes) ने देश में मैटरनल हेल्थ की स्थिति को मज़बूत बनाने में मदद की है।

 

NHM के तहत संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN Scheme) भी सरकार के उन्हीं प्रयासों में से एक है, जिसके बूते देश में महिला स्वास्थ्य का नया अध्याय लिखा जा रहा है। 

 

आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको इसी सरकारी योजना पर जानकारी प्रदान करेंगे और जानेंगे कि Maternal Mortality Rate यानी कि मातृ मृत्यु दर को कम करने में ये योजना कितनी कारगर साबित हो रही है? इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, ये भी जान लेते हैं कि यहां आपको योजना से जुड़ी किन-किन बातों की जानकारी मिलेगी?

 

आप जान पाएंगे-

 

  • सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN Scheme) क्या है?
  • इसका उद्देश्य क्या है?
  • इसकी शुरुआत कब हुई?
  • इसके फायदे क्या हैं?
  • इसके तहत क्या सेवाएं मिलती हैं?
  • इस पर एक्सपर्ट की क्या राय है?

 

SUMAN योजना पर एक नज़र

 

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN Scheme) मैटरनल हेल्थ से जुड़ी एक योजना है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया जाता है। इस स्कीम के तहत उन्हें प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात की स्वास्थ्य सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाती हैं। गर्भधारण करने से लेकर प्रसव के छह महीने बाद तक ये सुविधाएं जच्चा-बच्चा को मिलती रहती हैं। यहां तक कि आपात स्थिति में भी स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं।

 

 

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना से जच्चा-बच्चा रहेंगे स्वस्थ

 

 

उद्देश्य

 

  • मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना।
  • चिकित्सकों की देखरेख में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना।
  • जच्चा-बच्चा की सही देखभाल करना।

 

शुरुआत

 

10 अक्टूबर, 2019 को इस योजना की शुरुआत की गई थी। दिल्ली में आयोजित 13वें सेंट्रल काउंसिल ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस योजना को लॉन्च किया गया था।

 

फायदे

 

  • महिलाओं का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित होता है।
  • प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं।
  • मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलती है।
  • लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं होती।
  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, PMSMA और लक्ष्य जैसी योजनाओं का एकीकृत लाभ मिलता है।

 

योजना के तहत मिलने वाली फ्री सुविधाएं

 

  • गर्भवती महिलाओं को 4 प्रसव पूर्व जांच की सुविधा मिलती है। वहीं, प्रसव के बाद नवजात शिशु की घर पर पहुंचकर 6 बार तक जांच की जाती है।
  • प्रशिक्षित मिडवाइफ/SBA की निगरानी में प्रसव कराया जाता है।
  • संपूर्ण गोपनीयता के साथ एक सम्मानजनक प्रसव की व्यवस्था की जाती है।
  • बच्चे के जन्म पर टीकाकरण की सुविधा मिलती है।
  • घर से स्वास्थ्य केंद्र तक मुफ्त परिवहन की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
  • प्रसव उपरांत परिवार नियोजन से जुड़ी काउंसलिंग भी की जाती है।
  • आपात स्थिति में एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
  • डिस्चार्ज होने के बाद घर तक परिवहन की फ्री सुविधा मिलती है।
  • नवजात और बीमार शिशुओं की संपूर्ण देखभाल की जाती है।
  • अलग-अलग योजनाओं के तहत कैश ट्रांसफर और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा भी मिलती है।

 

मातृ मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थिति

 

आंकड़ों पर नज़र डालें, तो भारत में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) में लगातार गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2016-2018 के मध्य मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) 113 तक पहुंच गई, जो कुछ समय पहले तक 122 हुआ करती थी।

 

वर्ष 2015-2017 के सरकारी आंकड़े भी कुछ यही कहानी बयां करते हैं। आइए, हम राज्यवार मातृ मृत्यु दर पर प्रकाश डालते हैं।

 

 

राज्य

मातृ मृत्यु दर (MMR)

असम

229

बिहार

165

झारखंड

76

मध्य प्रदेश

188

छत्तीसगढ़

141

ओडिशा

168

राजस्थान

186

उत्तर प्रदेश

216

उत्तराखंड

89

आंध्र प्रदेश

74

तेलंगाना

76

कर्नाटक

97

केरल

42

तमिलनाडु

63

गुजरात

87

हरियाणा

98

महाराष्ट्र

55

पंजाब

122

पश्चिम बंगाल

94

अन्य राज्य

96

 

*मातृ मृत्यु दर के ये आंकड़े प्रति 1 लाख शिशुओं के जन्म पर आधारित है। 

 

 

 

 

हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यहां आपको सरकारी योजनाओं के अलावा बिज़नेस, कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

 

 

लेखक- कुंदन भूत

 

 



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