स्ट्रॉबेरी की बागवानी: महज़ 3 लाख रु. लागत और मुनाफा दोगुना

स्ट्रॉबेरी की खेती में हैं अपार संभावनाएं, जानिए ऐसे

चटक लाल रंग की दिखने वाली स्ट्रॉबेरी जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही सेहतमंद भी है। किसानों के लिए भी स्ट्रॉबेरी की खेती फायदे का सौदा है। आइए, जानें।

29 March 2021

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  • दुनिया भर में स्ट्रॉबेरी (strawberry) को इसके विशिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता है। यह फल जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही सेहतमंद भी है। इसका उपयोग जैम, चॉकलेट, आइसक्रीम, मिल्क-शेक आदि बनाने में खूब किया जाता है। 

     

    बता दें कि इसकी खेती में भी अपार संभावनाएं हैं। यदि आप ज़्यादा मुनाफे की खेती करना चाहते हैं, तो स्ट्रॉबेरी की खेती (strawberry farming) आपके लिए बेहतर विकल्प है।


     

    तो आइए, Knitter के इस ब्लॉग में स्ट्रॉबेरी की खेती (strawberry ki kheti) को करीब से समझें। 

     

    यहां आप जानेंगे-

     

    • स्ट्रॉबेरी के लिए ज़रूरी जलवायु
    • स्ट्रॉबेरी के लिए उपयोगी मिट्टी
    • स्ट्रॉबेरी की खेती का सही समय
    • स्ट्रॉबेरी की खेती की तैयारी कैसे करें?
    • स्ट्रॉबेरी की उन्नत किस्में
    • स्ट्रॉबेरी की फसल में लगने वाले कीट और रोग
    • स्ट्रॉबेरी की पैदावार 
    • स्ट्रॉबेरी की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    तो आइए सबसे पहले स्ट्रॉबेरी के लिए सही जलवायु (Climate) के बारे में जानते हैं। 

     

    स्ट्रॉबेरी की खेती में हैं अपार संभावनाएं, जानें यहां

     

    स्ट्रॉबेरी के लिए ज़रूरी जलवायु

     

    स्ट्रॉबेरी ठंडी जलवायु वाली फसल है। इसे मैदानी इलाकों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है। तापमान बढ़ने पर पौधों में नुकसान होता है और उपज प्रभावित होती है।

     

    स्ट्रॉबेरी के लिए उपयोगी मिट्टी

     

    इसकी खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। लेकिन, बलुई दोमट मिट्टी में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन अधिक होता है। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए। मिट्टी की जांच आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र अथवा कृषि विभाग से ज़रूर करा लें।   

     

    खेती का सही समय और तैयारी

     

    स्ट्रॉबेरी की रोपाई सितंबर से नवंबर के मध्य की जाती है। सितंबर के पहले सप्ताह में खेत की तीन बार अच्छी जुताई कर लें, फिर उसमें गोबर की खाद अच्छे से बिखेर कर मिट्टी में मिला दें। साथ में पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेत तैयार करते समय मिला दें।

     

    स्ट्रॉबेरी की उन्नत किस्में

     

    स्ट्रॉबेरी भारत की बागवानी में एक नया फल है। इसकी अधिकतर किस्में दूसरे देशों से आयात की गई है। हमारे देश में मुख्य रूप से विंटर डाउन, विंटर स्टार, ओफ्रा, कमारोसा, चांडलर, स्वीट चार्ली, ब्लैक मोर, एलिस्ता, सिसकेफ़, फेयर फाक्स आदि किस्मों की खेती की जाती है। 

     

    स्ट्रॉबेरी की फसल में लगने वाले कीट और रोग

     

    स्ट्रॉबेरी की फसल को कई तरह के कीट एवं रोग नुकसान पहुंचाते हैं। इससे उपज में काफी कमी आ जाती है। स्ट्रॉबेरी की फसल में लगने वाले रोग में थ्रिप्स, लाल मकड़ी, काला धब्बा, ग्रे मोल्ड, चेफर, झरबेरी, रस भृग प्रमुख है। 

     

    रोगों से बचाव के लिए आप नीम की खली पौधों की जड़ों में डालें। इसके अलावा समय-समय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करें।

     

    स्ट्रॉबेरी की फसल में पैदावार 

     

    स्ट्रॉबेरी के फलों की उपज कई बातों पर निर्भर करती है। जैसे- उगाई जाने वाली किस्म, वहां की जलवायु, मृदा का स्तर, पौधों की संख्या, फसल प्रबंधन इत्यादि। यदि फसल का सही प्रबंधन और देखभाल किया जाए तो एक एकड़ क्षेत्रफल में 80 से 100 क्विंटल फलों का उत्पादन हो जाता है। एक पौधे से आप 800-900 ग्राम फल प्राप्त कर सकते हैं।  

     

    लागत और कमाई

     

    आमतौर पर एक एकड़ स्ट्रॉबेरी की फसल में 2-3 लाख रुपये की लागत आती है। पैदावार होने के बाद खर्च निकालकर 5-6 लाख का फायदा हो जाता है। 

     

    स्ट्रॉबेरी की खेती में हैं अपार संभावनाएं, जानें यहां

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता



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