पॉपकॉर्न बिज़नेस का वादा: लागत कम, मुनाफा ज़्यादा

मुनाफे का असली फ्लेवर चखने के लिए करें पॉपकॉर्न बिज़नेस

बिज़नेस आइडियाज़ की तलाश करने वालों के लिए पॉपकॉर्न का बिज़नेस एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इससे कम लागत में अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है। आइए, इसे जानें।

02 March 2021

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  • आपने कभी पॉपकॉर्न को फूटकर उछलते हुए देखा है? जब-जब ये पॉपकॉर्न फूटकर उछलते हैं ना...तो उन्हें खाने के अरमान भी दिल में उछलने लगते हैं। सच बताएं, तो पॉपकॉर्न दुनिया की ऐसी चीज़ है, जिसे खाने के लिए छोटे-बड़े सभी आतुर रहते हैं। इसका स्वाद जितना अच्छा है, उतना ही अच्छा इसका बिज़नेस भी है, जिसके बारे में आज आप Knitter के ब्लॉग में जानेंगे।

     

    बिज़नेस और रोज़गार की इस श्रृंखला में हम आपको पॉपकॉर्न के बिज़नेस के बारे में बताएंगे। हम बताएंगे कि आप किस तरह इस बिज़नेस को शुरू कर सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं? तो चलिए, जानकारियों के इस सफर को शुरू करते हैं। लेकिन, आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि आप यहां क्या-क्या जान पाएंगे?

     

    आप जानेंगे-

     

    • पॉपकॉर्न का बिज़नेस क्या है?
    • इसमें स्कोप क्या है?
    • कौन से लाइसेंस/ रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत पड़ेगी?
    • कितनी जगह चाहिए होगी?
    • लागत कितनी आएगी?
    • मुनाफा कितना होगा?
    • एक्सपर्ट की क्या राय है?

     

    पॉपकॉर्न बिज़नेस पर एक नज़र में:

     

    भारत में पॉपकॉर्न का मार्केट लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। बीते एक दशक की बात की जाए, तो बिक्री के आंकड़ों में भी बहुत ज़्यादा बढ़त देखने को मिली है। वहीं, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स जैसे न्यूट्रीन्ट्स की मौजूदगी के चलते हेल्थ कॉन्शियस लोग इसे एक हेल्दी स्नैक ऑप्शन के रूप में देख रहे हैं। 

    वैसे भी पॉपकॉर्न एक ऐसा स्नैक है, जिसे हर उम्र और वर्ग के लोग खाते हैं। फिर चाहे वो बच्चे हों, बूढ़े हों, या फिर जवान, पॉपकॉर्न को ना कोई नहीं कहता। अच्छी बात ये है कि पॉपकॉर्न के बढ़ते मार्केट को देखते हुए किसान भी कॉर्न यानी कि मक्के के उत्पादन पर ज़ोर दे रहे हैं। भले ही लोग भारत में पॉपकॉर्न की बढ़ती लोकप्रियता को वेस्टर्न कल्चर से प्रेरित बता रहे हों, लेकिन सच्चाई ये है कि इस बिज़नेस में संभावनाएं काफी अच्छी हैं।

     

    स्कोप:

    • बाज़ार में अच्छी मांग
    • तगड़ा मुनाफा
    • कम निवेश में शुरुआत

     

    पॉपकॉर्न बिज़नेस का वादा: लागत कम, मुनाफा ज़्यादा

     

     

    लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन:

     

    पॉपकॉर्न का बिज़नेस शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले स्थानीय प्रशासन से ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ेगा। आप नगर निगम, नगर पंचायत या ग्राम पंचायत में इसके लिए अर्ज़ी दे सकते हैं। इसके अलावा आपको उद्यम (UDYAM) रजिस्ट्रेशन कराना होगा। चूंकि, ये काम फूड बिज़नेस ऑपरेशंस के तहत आता है, आपको FSSAI का लाइसेंस भी लेना पड़ेगा। यदि आप ये काम बड़े पैमाने पर शुरू करना चाहते हैं, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन की भी ज़रूरत पड़ेगी।

     

    मशीनरी:

     

    बाज़ार में आपको पॉपकॉर्न बनाने की कई मशीनें मिल जाएंगी। आप अपने बजट और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इनका चुनाव कर सकते हैं। मुख्यतः आपको दो मशीनों की ज़रूरत पड़ेगी। 

     

    • पॉपकॉर्न मेकिंग मशीन
    • पैकेज सीलिंग मशीन 

     

    हालांकि, यदि आप फ्लेवर्ड पॉपकॉर्न बेचना चाहते हैं, जैसे कि कैरेमल फ्लेवर, तो आपको पॉपकॉर्न कैरेमल मशीन की भी ज़रूरत पड़ेगी, क्योंकि इसी की मदद से पॉपकॉर्न पर फ्लेवर की कोटिंग होती है। इसके अलावा आपको पैन, ट्रे और कुछ किचन इक्विपमेंट्स की भी ज़रूरत पड़ेगी।

     

    स्पेस:

     

    करीब 500 स्क्वायर फीट की जगह में आप इस बिज़नेस की शुरुआत कर सकते हैं। वहीं, यदि आप मध्यम स्तर पर ये काम शुरू करना चाहते हैं, तो इस बिज़नेस को ऑपरेट करने के लिए करीब 1000 से 1500 स्क्वायर फीट एरिया चाहिए होगा। यदि आप बड़े स्तर इस काम को अंजाम देना चाहते हैं, तो संभवतः इससे भी बड़ी जगह की आवश्यकता पड़ सकती है। सबकुछ आपके प्रोजेक्ट पर निर्भर करता है।

     

    पॉपकॉर्न बनाने की विधि:

     

    इसमें सबसे पहले कॉर्न की पॉपिंग की जाती है। इसके लिए मशीन में फिट कुकिंग केटल में कॉर्न यानी की मक्के के दाने डाले जाते हैं। उसमें तेल या बटर का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही नमक और कुछ मसाले भी डाले जाते हैं। इस तरह पॉपकॉर्न तैयार हो जाते हैं।

     

    अगर आप कोई खास फ्लेवर जैसे कि कैरेमल फ्लेवर्ड पॉपकॉर्न बनाना चाहते हैं, तो आपको पॉप किए गए पॉपकॉर्न को कैरेमल मशीन में डालना होगा। आपको बता दें कि कैरेमल को शुगर सिरप या चीनी की मदद से तैयार किया जाता है। 

     

    जब आप पॉपकॉर्न को कैरेमल मशीन में डालेंगे, तो प्रोसेसिंग के दौरान पॉपकॉर्न पर कैरेमल की कोटिंग चढ़ जाएगी। इसके बाद इन कैरेमलाइज़्ड पॉपकॉर्न को किसी बड़े पैन या ट्रे में निकालकर ठंडा किया जाता है। जैसे ही पॉपकॉर्न ठंडा हो जाता है, उसे एअर टाइट डिब्बों में या पैकेट्स में पैक कर दिया जाता है।

     

    पॉपकॉर्न बिज़नेस का वादा: लागत कम, मुनाफा ज़्यादा

     

    पॉपकॉर्न का मार्केट:

     

    • सिनेमा हॉल
    • शॉपिंग मॉल
    • रेस्टोरेंट
    • मेला व प्रदर्शनी
    • स्थानीय दुकान
    • रीटेल आउटलेट्स आदि

     

    सरकारी मदद:

     

    यदि आप छोटे स्तर पर इस बिज़नेस को शुरू करना चाहते हैं, तो संभवतः आपको किसी लोन या सब्सिडी की आवश्यकता न पड़े। लेकिन, यदि आप बड़े स्तर पर कोई यूनिट लगाने का प्लान कर रहे हैं, तो आप CGTMSE, स्टैंड अप इंडिया और प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) जैसी योजनाओं के तहत लोन और सब्सिडी जैसे लाभ ले सकते हैं। PMEGP के तहत शहरी क्षेत्रों के लिए 15 से 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है, तो वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 25 से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल जाती है।  

     

    लागत:

     

    इस काम को आप हर स्तर पर शुरू कर सकते हैं। यदि आप बहुत ही छोटे स्तर पर पॉपकॉर्न का बिज़नेस शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, तो करीब 40 से 50 हज़ार रुपये भी काफी होंगे। मध्यम स्तर पर आपको करीब 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे। यदि आप बड़े पैमाने पर इस बिज़नेस के लिए कोई यूनिट लगाना चाहते हैं, तो आपको 8 से 10 लाख रुपये निवेश करने पड़ सकते हैं।

     

    मुनाफा:

     

    मुनाफे के लिहाज़ से देखें, तो इस बिज़नेस में आप 35 से 40 प्रतिशत तक का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं। हालांकि, जानकार बताते हैं कि मल्टिप्लेक्सेस में प्रॉफिट मार्जिन कई गुना तक बढ़ जाता है, क्योंकि वहां पॉपकॉर्न को बहुत अधिक कीमतों पर बेचा जाता है।  

     

    पॉपकॉर्न बिज़नेस का वादा: लागत कम, मुनाफा ज़्यादा

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको बिज़नेस के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

     

     

    लेखक- कुंदन भूत

      

     



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