भेड़ बढ़ाएगी किसानों की आमदनी, जानिए कैसे

भेड़ बढ़ाएगी किसानों की आमदनी, जानिए कैसे

पशुपालन में भेड़ पालन का अहम स्थान है। यह छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए आसान और लाभकारी व्यवसाय है। आइए, भेड़ पालन को जानें।

21 February 2021

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  • किसानों की आय बढ़ाने में पशुपालन एक सबसे अच्छा विकल्प है। यदि आप कम पैसे में कोई व्यवसाय करना चाहते हैं तो भेड़ पालन फायदेमंद है। इसे छोटे और सीमांत किसान आसानी से कर सकते हैं। गाय-भैंस जैसे पशुओं के पालन में अधिक लागत की ज़रूरत होती है। लेकिन, भेड़ पालन में कम लागत की ज़रूरत होती है।

     

    आज हम Knitter के इस ब्लॉग में भेड़ पालन के बारे में जानकारियां देंगे। हम बताएंगे कि आप कैसे भेड़ पालकर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं? साथ ही ये भी समझाने का प्रयास करेंगे कि ग्रामीण भारत में  इसे गंभीरता से क्यों लेना चाहिए?

     

    पहले आपको  बता देते हैं कि यहां क्या-क्या जानकारियां मिलेंगी।

    आप जानेंगे-

     

    • भेड़ पालन क्या है?
    • भेड़ों की प्रमुख नस्लें
    • भेड़ पालन के फायदे
    • भेड़ पालन कैसे करें?
    • लागत और आमदनी
    • सरकारी योजना और सब्सिडी


    भेड़ पालन पर एक नज़र 

     

    भेड़ एक ऐसा पालतू पशु है, जो बहुत तेजी से बढ़ता है। यह एक शाकाहारी जानवर है, जो घास तथा पेड़ पौधों की हरी पत्तियों को खाकर पेट भर लेता है। इनकी देखभाल करने में बहुत मेहनत करने की ज़रूरत नहीं होती। 

     

    भेड़ पालन है फायदे का व्यवसाय

     

    ऐसे करें भेड़ पालन की शुरुआत

     

    इस व्यवसाय को शुरू करने से पहले सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि भेड़ पालन का उद्देश्य क्या है? यदि आप बड़े स्तर पर भेड़ पालन करना चाहते हैं तो बाड़े को बड़ा रखें। नस्ल का चयन करते समय अपने क्षेत्र की जलवायु, बाजार की उपलब्धता का ज़रूर ध्यान रखें। 

     

    मेमने की खरीदारी किसी प्रतिष्ठित फार्म से करें। 30-40 भेड़ के बीच एक नर भेड़ (मेढ) ज़रूर रखें। भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसान भेड़ पालन 20-30 भेड़ से करें, बड़े किसान या पशुपालक 100 से अधिक भेड़ों से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। 

     

    भेड़ों की नस्लें

     

    कश्मीर मेरीनो

     

    यह नस्ल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करने वाली भेड़ों से विकसित की गई है। इसमें कई देशी नस्लों का मिश्रण होता है। यह नस्ल साल भर में 2.8 किलो तक ऊन का उत्पादन करती है।

     

    मारवाड़ी

     

    मारवाड़ी नस्ल राजस्थान के जोधपुर, जालौर, नागौर, पाली और उदयपुर जिले के अलावा गुजरात के जेबरिया क्षेत्र में पाई जाती है। इस नस्ल का आकार मध्यम और चेहरा काला होता है। कान छोटे और नालीदार होते हैं। ऊन सफेद लेकिन, बहुत घना नहीं होता है।

     

    मालपुरा 

     

    यह नस्ल राजस्थान के जयपुर, टोंक, सवाईमाधोपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और बूंदी जिले में पाई जाती है। इनका चेहरा हल्का भूरा, लम्बी टांगे, कान छोटे होते हैं। पूंछ पतली और मध्यम से लंबे आकार की होती है। इसकी ऊन मोटी होती है।

     

    मगरा

     

    इस नस्ल की भेड़ों का चेहरा सफेद और आंख के चारों ओर हल्की भूरी पट्टी होती है। यह नस्ल राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश में पाई जाती है। ऊन मध्यम गुणवत्ता की होती है, जो अत्यधिक सफेद और चमकीली होती है।

     

    बेल्लारी

    यह नस्ल कर्नाटक के बेल्लारी जिले में पाई जाती है। इसके एक तिहाई नर सींग वाले होते हैं जबकि मादा के सींग नहीं होते हैं। पूंछ छोटी और पतली होती है। ऊन बहुत मोटी, बालों वाली और खुली होती है।

     

    भेड़ों में होने वाले रोग और इलाज़

     

    खुरपका और मुंहपका 

     

    यह बीमारी विषाणु जनित होती है। इस रोग से ग्रसित पशु के मुंह, जीभ, होंठ व खुरों के बीच की खाल में फफोले पड़ जाते है। इस रोग के लगते ही बीमार पशु को अलग बाड़े में रखना चाहिए। इससे बचाव के लिए पशुपालक भेड़ों को प्रत्येक 6 महीने के अन्तराल पर एफएमडी का टीका लगवाएं। 

     

    चर्म रोग

     

    भेड़ों की त्वचा पर अधिक बाल होने के कारण जूं, पिस्सू जल्दी लगते हैं। यह चमड़ी में अनेक प्रकार के रोग पैदा करते हैं, जिससे जानवर के शरीर में खुजली हो जाती है।इस रोग से बचाव के लिए भेड़ों को साल में कम से कम दो बार कीटनाशक से स्नान अवश्य करवाएं।

     

    गलघोंटू 

     

    यह बीमारी भेड़ों में जीवाणुओं द्वारा फैलती है। इस बीमारी से भेड़ों के गले में सूजन आ जाती है, जिससे उसे सांस लेने में कठिनाई होती है।इस बीमारी में भेड़ को तेज़ बुखार, नाक से लार निकलना तथा निमोनिया जैसे लक्षण दिखते हैं।

     

    गोल कीड़े

    इस प्रकार के कीड़े मुख्यतः भेड़ों की आंतों में धागे की तरह लम्बे व सफेद रंग के होते हैं जो भेड़ों की आंतों से खून चूसते हैं। कई बार भेड़ों को इन कीड़ों के कारण दस्त लगते हैं, जिससे भेड़  कमज़ोर हो जाती है।

     

    भेड़ पालक को  वर्ष में कम से कम तीन बार भेड़ों को पेट के कीड़ों को मारने की दवाई डॉक्टर की सलाह से ज़रूर देना चाहिए।

     

    भेड़ पालन के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

     

    • भेड़ पालन के लिए खुले स्थान का चुनाव करें 
    • बाड़े में साफ पानी, हवा, हरी घास, धूप की अच्छी व्यवस्था हो
    • भेड़ पालन से पहले इसके लिए ट्रेनिंग लें
    • बीमारियों से बचने के लिए समय पर भेड़ का टीका करण कराएं
    • ज़्यादा उम्र की भेड़ नहीं खरीदें
    • मेमने को एक वर्ष पूरा होने पर ही गर्भधारण कराएं
    • भेड़ के आहार और पोषण पर विशेष ध्यान दें
    • मेमने को अलग बाड़े में रखें
    • नर और मादा भेड़ के बीच 1:40 का अनुपात रखें
    • गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार तथा दाने की मात्रा बढ़ा दें

     

    भेड़ पालन है फायदे का व्यवसाय

     

    भेड़ पालन में लागत और मुनाफा

     

    अच्छी आय भेड़ों की संख्या पर निर्भर करती है। यदि वैज्ञानिक तरीके से भेड़ पालन की जाए तो एक भेड़ से साल भर में साढ़े चार हज़ार रु. की आमदनी ली जा सकती है। यही आप बड़े स्तर पर करते हैं तो आपको लाखों रु. की आमदनी हो सकती है।लागत की बात की जाए तो 20 भेड़ पालन के लिए लगभग एक लाख रु. का खर्च आता है। 

     

    सरकारी योजना और सब्सिडी

     

    केंद्र सरकार के 'राष्ट्रीय पशुधन मिशन' के तहत भेड़ पालन को बढ़ावा देकर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने का प्रयास कर रही है। इस मिशन के तहत देश में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है। इसमें अलग-अलग योजना के लिए अलग-अलग सब्सिडी दी जाती है। इसमें भेड़ पालन के लिए भी सब्सिडी दी जाती है। 

     

    इस योजना की अधिक जानकारी के लिए जिले के पशुधन अधिकारी या नज़दीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सकते हैं।  

     

    भेड़ पालन है फायदे का व्यवसाय


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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता

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