डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के लिए ऐसे करें जगह का चुनाव

डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के लिए ऐसे करें जगह का चुनाव

डेयरी बिज़नेस मुनाफे के लिहाज़ से एक अच्छा विकल्प है। लेकिन, इसके लिए सही जगह बहुत ज़्यादा मायने रखती है। आइए, जगह के निर्धारण से जुड़ी कुछ अहम बातें जानें।

26 February 2021

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  • निशानेबाज़ी का एक प्रसिद्ध शब्द है ‘बुल्स आई’...ये शब्द तब उपयोग में लाया जाता है, जब किसी का निशाना सीधे टारगेट के बीचों-बीच जाकर लगता है। आपको बता दें कि बिज़नेस भी कुछ-कुछ निशानेबाज़ी जैसा ही है। यदि आप अपनी रणनीतियों को सही तरह से अंजाम देने में असफल रहे, तो समझिए ‘बुल्स आई’ से चूक गए। इसलिए बिज़नेस करने से पहले रणनीति ज़रूर तैयार करें और जगह के निर्धारण को इसकी पहली सीढ़ी समझें।

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको इसी पहलू से अवगत कराएंगे। हम बताएंगे कि आप कैसे अपने डेयरी फार्म के लिए सही जगह का चुनाव कर सकते हैं और अपने बिज़नेस को नई ऊंचाइयां दे सकते हैं? हम ये भी बताएंगे कि आप किन-किन तरीकों से पशुओं के आवास की व्यवस्था कर सकते हैं? तो चलिए जानकारियों का ये सफर शुरू करते हैं और ये जान लेते हैं कि इस दौरान आपको क्या-क्या बातें बताई जाएंगी।

     

    आप जानेंगे-

    • डेयरी फार्मिंग क्या है?
    • डेयरी फार्मिंग के लिए सही जगह कैसे चुन सकते हैं?
    • पशुओं का आवास कैसा हो सकता है?
    • एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

     

    डेयरी फार्मिंग पर एक नज़र

     

    डेयरी फार्मिंग कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसके तहत दूध और दूध से बने उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए गाय, भैंस और बकरी जैसे पशुओं को पाला जाता है। यह एक एग्री बिज़नेस है, जो धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रहा है।

     

    डेयरी फार्म के लिए सही जगह का निर्धारण ऐसे करें

     

    डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के लिए ऐसे करें जगह का चुनाव

     

    सही लोकेशन चुनें

     

    डेयरी फार्म खोलने के लिए ऐसी जगह चुनें, जो किसी शहर या कस्बे के करीब हो। इससे आपको दो फायदे मिलेंगे। पहला, आपको बड़ी संख्या में कस्टमर मिलेंगे। दूसरा, गांवों की तुलना में बेहतर दाम मिलेंगे।

     

    मिट्टी अवश्य जांचें

     

    फार्म तैयार करने से पूर्व उस जगह की मिट्टी को अवश्य परख लें। मिट्टी बहुत ज़्यादा सूखी न हो। मिट्टी में हल्की सी नमी ज़रूरी है।  

     

    बनावट ऊंची रखें

     

    डेयरी फार्म बनाते वक्त ऊंचाई का विशेष ध्यान दें। पशुओं को रखने के लिए आप जो बिल्डिंग या जगह तैयार करेंगे, वह आस-पास के एरिया के मुकाबले ऊंची होनी चाहिए। इसके कई फायदे मिलेंगे। पहला, बारिश के मौसम में पानी के जमाव की समस्या नहीं होगी। दूसरा, पशुओं के अपशिष्ट पदार्थ सीधे नालियों में बह जाएंगे। तीसरा, साफ-सफाई करने में परेशानी नहीं होगी।

     

    सूरज की रोशनी का ध्यान रखें

     

    पशुओं के लिए ऐसे आवास का निर्माण करें, जहां सूर्य की रोशनी अच्छी तरह से पड़ती हो। इसके लिए आपको सही दिशा का चुनाव भी करना होगा। फार्म की चौड़ाई वाला हिस्सा उत्तर दक्षिण की तरफ हो और लंबाई वाला हिस्सा पूरब-पश्चिम की तरफ होना सही रहेगा। इससे ये फायदा भी होगा कि पशुओं के आवास में नमी नहीं रहेगी, प्लेटफॉर्म सूखे रहेंगे और नाली से बदबू भी नहीं आएगी। 

     

    वेंटिलेशन अच्छा हो

     

    आवास निर्माण के दौरान वेंटिलेशन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पशुओं का आवास पूरी तरह से बंद नहीं होना चाहिए वर्ना उनके लिए रहना मुश्किल होगा और उन्हें ऑक्सीजन भी सही मात्रा में नहीं मिल पाएगी।  

     

    कनेक्टिविटी

     

    डेयरी बिज़नेस में कनेक्टिविटी एक अहम पहलू है। इसलिए ऐसी जगह पर डेयरी फार्म बनाएं, जो सड़क से ज़्यादा दूर न हो। साथ ही वहां ट्रांसपोर्ट के पूरे साधन भी मौजूद होने चाहिए। सड़क से 100 से 200 मीटर की दूरी सही रहेगी। जानकारों का मानना है कि पशुओं का आवास सड़क से एकदम सटा हुआ भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी पशु गाड़ियों की आवाज़ और हॉर्न से भी विचलित हो जाते हैं। इसलिए एक निश्चित दूरी ज़रूरी है। 

     

    बिजली व पानी

     

    ये डेयरी फार्मिंग की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। पशुओं के सही रख-रखाव के लिए बिजली बहुत ज़रूरी है। बिजली से रात में रोशनी की व्यवस्था हो सकेगी और गर्मियों के मौसम में पशुओं के लिए पंखे या कूलर आदि भी चलाए जा सकेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पशु हम इंसानों के मुकाबले बहुत ज़्यादा पानी पीते हैं। इसलिए उनके पीने के लिए पानी हर पल मौजूद होना चाहिए। इसके अलावा आवास की साफ-सफाई के लिए भी पानी की ज़रूरत होगी।

     

    आहार की व्यवस्था

     

    दुधारू पशुओं के आहार का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए ऐसे स्थान का चयन करें, जहां हरा चारा उपलब्ध हो। इसके अलावा दाना-पानी और भूसे आदि की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। ज़रूरत पड़ने पर पशुओं को सप्लीमेंट्स भी देने पड़ते हैं, ताकि उनमें पोषक तत्वों की कमी न रहे।

     

    मार्केटिंग और लेबर

     

    ये दोनों ही चीज़ें इस बिज़नेस के महत्वपूर्ण पहलू हैं। डेयरी फार्मिंग से आप दूध, पनीर और खोया जैसे उत्पाद प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन, यदि वो मार्केट तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाएंगे, तो नुकसान होने की आशंका बढ़ जाएगी। इसलिए आवास ऐसी जगह हो, जहां से आप अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर सकें और उन्हें समय पर बाज़ार तक पहुंचा सकें। वहीं, फार्म और पशुओं की देख-रेख के लिए, दूध निकालने के लिए, साफ-सफाई के लिए आपको लेबर की ज़रूरत पड़ेगी। लिहाज़ा, इस पहलू को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

     

    स्टोरेज की व्यवस्था हो

    पशुओं के आवास स्थल पर स्टोरेज स्पेस की भी ज़रूरत पड़ती है। इस तरह आप पशुओं का चारा, भूसा, दाना तथा दूध निकालने वाले बर्तन आदि स्टोर कर पाते हैं। इसके अलावा यदि इस व्यवसाय से जुड़ा कोई और सामान भी हो, तो उसे भी रखने की जगह मिल जाती है।

     

    वातावरण उपयुक्त हो

     

    डेयरी फार्मिंग के लिए अच्छे वातावरण का होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। पशु जितनी साफ-सुथरी जगह में रहेंगे, उनके लिए उतना ही अच्छा रहेगा। प्रदूषित वातावरण पशुओं को बीमार कर सकता है। साथ ही इससे उत्पादकता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए एक अच्छे व सुरक्षित वातावरण का चुनाव ज़रूरी है।

     

    डेयरी फार्मिंग के हाउस मैनेजमेंट पर एक नज़र

     

    आप पशुओं को रखने के लिए तीन तरह के आवास के बारे में सोच सकते हैं।

     

    बंद आवास- इस तरह के आवास में पशुओं को बांध कर रखा जाता है। साथ ही उनके दाने-पानी की व्यवस्था भी वहीं कर दी जाती है। इसके अलावा पशुओं का दूध भी उसी स्थान पर ही निकाला जाता है। वहीं, पशुओं को चरने के लिए बहुत कम समय के लिए छोड़ा जाता है।

     

    फायदे-

     

    • पशुओं को खिलाना-पिलाना आसान होता है।
    • वे एक-दूसरे पर लद नहीं पाते।
    • गंदगी भी सीमित जगह तक रहती है।

     

    नुकसान-

     

    • पशु पूरी तरह से आज़ाद नहीं रह पाते।
    • आवास निर्माण थोड़ा खर्चीला होता है।
    • पशुओं की संख्या बढ़ने पर मुश्किलें आती हैं।

     

    खुला आवास: इसके तहत एक निश्चित घेरे में बाड़ बनाई जाती है और पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है। उस बाड़े में ही पशुओं के खाने-पीने की व्यवस्था कर दी जाती है।

     

    फायदे-

     

    • पशु अधिक सहजता के साथ रह पाते हैं।
    • उन्हें प्राकृतिक वातावरण का अनुभव हो पाता है।
    • आवास निर्माण में खर्चा कम आता है।

     

    नुकसान-

     

    • पशुओं के आवास के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है।
    • उन्हें अलग-अलग दाना-पानी देने में थोड़ी मुश्किलें आती हैं।
    • बेकाबू पशुओं को संभालना मुश्किल हो जाता है।

     

    अर्ध खुला आवास- इसके तहत पशुओं को एक निश्चित समय के लिए ही बांधकर रखा जाता है। उन्हें खिलाने और दूध निकालने के दौरान बांधा जाता है और बाकी समय उन्हें खुला रहने दिया जाता है।

     

    फायदे-

     

    • पशु अधिक उन्मुक्तता के साथ रह पाते हैं।
    • वे ज़्यादा आक्रामक व्यवहार नहीं करते हैं।

     

    नुकसान-

     

    • कभी-कभी बेकाबू पशुओं को संभालना मुश्किल हो जाता है।

     

    ध्यान देने योग्य बातें

     

    • आवास तीन हिस्सों में बंटा होना चाहिए। 
    • एक जगह पर पशुओं को रखा जाना चाहिए, दूसरे स्थान पर दूध निकाला जाना चाहिए और तीसरा स्थान दाना-पानी, भूसा और दूध निकालने के बर्तन आदि रखने के लिए निर्धारित होना चाहिए।
    • बीमार पशुओं को अलग स्थान पर रखना चाहिए।
    • आवास स्थल का तापमान 25-27 डिग्री के मध्य होना चाहिए।
    • पशुओं में पर्याप्त दूरी होनी चाहिए।
    • नांद या चरनी पशुओं से उचित दूरी पर होनी चाहिए।
    • आवास की ऊंचाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
    • पशुओं के आवास की रोज़ाना साफ-सफाई होनी चाहिए।

     

    डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के लिए ऐसे करें जगह का चुनाव

     

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    लेखक- कुंदन भूत

     



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