एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग है करियर का बेहतरीन विकल्प

साइंस स्टूडेंट्स एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बनाएं करियर

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के बाद छात्रों को बेहतरीन करियर के मौके मिलते हैं। आइए इस ब्लॉग में जानते हैं इस फील्ड से जुड़ी सभी बातें।

14 February 2021

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  • इस समय एविएशन सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिल रही है। इस सेक्टर में रोज़गार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। यदि आपकी रुचि हवाई जहाज़ में है तो पायलट बनने के अलावा भी आपके पास कई विकल्प हैं। एक विमान को डिज़ाइन करने से लेकर उसकी रिपेयरिंग और मेंटेनेंस का काम तक प्रोफेशनल्स के द्वारा किया जाता है। इन्हें हम एयरोनॉटिकल  इंजीनियर्स के तौर पर पहचानते हैं। 

     

    वैसे  एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने के बाद आप नासा, इसरो के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी नौकरी कर सकते हैं। तो चलिए, आज बात इंजीनियरिंग की इसी फील्ड के बारे में।

     

    एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग क्या है?

     

    सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक की तरह एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग भी इंजीनियरिग की एक शाखा है। हवाई जहाज़ और उससे संबंधित टेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाले छात्र इसमें एडमिशन लेते हैं। इसमें छात्रों को एयरक्राफ्ट्स, मिसाइल्स और स्पेसक्राफ्ट्स की कंस्ट्रक्शन, डिज़ाइनिंग, टेस्टिंग और एनालिसिस से जुड़ी बारिकियां सिखाई जाती हैं। सिलेबस में  प्रोपल्शन, मटेरियल  साइंस, एवियोनिक्स और एरोडायनामिक्स जैसे टॉपिक्स पढ़ाए जाते हैं।

     

    इस फील्ड में इंजीनियरिंग करने वाले छात्र हवाई जहाज़ों की डिज़ाइनिंग, मेंटेनेंस और एयरक्राफ्ट्स के लिए नए पुर्जे बनाने की दिशा में काम करते हैं।

     

    एयरोनॉटिकल इंजीनियर के लिए कोर्स

     

    एयरोनॉटिक्स की फील्ड में इंजीनियरिंग के लिए आप इसमें डिप्लोमा, इंजीनियरिंग डिग्री BE या BTech) या पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री (MTech) की पढ़ाई कर सकते हैं। इसमें डिप्लोमा कोर्स की अवधि 3 साल होती है और बीटेक (B.Tech) डिग्री की अवधि 4 साल होती है। एमटेक (M.Tech) की पढ़ाई बीटेक के बाद 2 साल की होती है।

     

    योग्यताएं और एग्ज़ाम्स

     

    • डिप्लोमा कोर्स के लिए 10वीं में विज्ञान और मैथ्स विषय के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए।
    • बीटेक (B.Tech) की डिग्री के लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स विषयों के साथ 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं।
    • सरकारी (IIT और NIT) और कई प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए आपको 12वीं के बाद JEE(जॉइंट एंट्रेंस एग्ज़ाम) की परीक्षा देनी होती है।
    • एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) के लिए 12वीं के बाद AME  CET की परीक्षा दे सकते हैं।
    • एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एमटेक (M.Tech) में प्रवेश के लिए आपको बीटेक B.Tech) न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे।
    • एमटेक (M.Tech) में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को GATE (इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट) परीक्षा पास करनी पड़ती है।

     

     

    एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की अनुमानित फीस

     

    • भारत में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स की फीस 10,000 से 50,000 रु. प्रति साल  तक है।
    • भारत के विभिन्न कॉलेजों में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक (B.Tech) डिग्री की फीस 50,000 से 1,50,000 रुपये प्रति वर्ष है।
    •  एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एमटेक (M.Tech) डिग्री की फीस 1 लाख से 3 लाख रुपये तक है।

     

    बताए गए कोर्स की अनुमानित फीस में सिर्फ ट्यूशन फीस शामिल है। अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में अन्य भी कई शुल्क लिए जाते है, जो अलग हैं। 

     

    नौकरी की संभावनाएं

     

    • नासा और इसरो जैसे स्पेस रिसर्च संस्थानों में 
    • सरकारी और प्राइवेट एयरलाइंस में 
    • मिलिट्री और रक्षा विभागों में
    • स्पेस क्राफ्ट(मिसाइल, विमान, रॉकेट) बनाने वाली सरकारी और प्राइवेट कंपनी में
    • कॉलेज/यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर

     

    सैलरी

     

    भारत में एक एयरोनॉटिकल इंजीनियर को शुरुआत में कम से कम 5 लाख रुपये सालाना का पैकेज आसानी से मिल जाता है। सरकारी संस्थानों में ज्यादा सैलरी से भी शुरुआत हो सकती है। हर फील्ड की तरह इसमें भी अनुभव के साथ सैलरी पैकेज बढ़ता जाता है। इस क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति अधिकतम 45 से 50 लाख प्रति वर्ष तक सैलरी पा सकता है। 

     

    यदि आपकी भी रुचि विमानों में है तो ये फील्ड आप ही के लिए है। अच्छे कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरियां और बढ़िया सैलरी आपका इंतजार कर रही है। उम्मीद है इंजीनियरिंग की इस फील्ड से संबंधी सभी सवालों के जवाब आपको मिल पाए होंगे। इस ब्लॉग को अपने परिचित स्टूडेंट्स के साथ ज़रूर साझा करें। ताकि छोटी आंखों में पल रहे बड़े-बड़े सपनों को सही दिशा मिल सके।

     

     

    लेखक मोहित वर्मा 

     



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