ग्रामीण पत्रकारिता की नींव बन सकते हैं ये मीडिया कोर्स

ग्रामीण पत्रकारिता की नींव बन सकते हैं ये मीडिया कोर्स

बदलते वक्त के साथ मीडिया और खबरों में ग्रामीण पत्रकारिता को भुला दिया गया है। इसे पुनः मज़बूत बनाने की ज़रूरत है, जिसमें मीडिया कोर्स अहम योगदान दे सकते हैं।

17 March 2021

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  • मौजूदा समय में भले ही पत्रकारिता ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ज़मीन तलाश ली हो, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग पत्रकारिता में अपनी ज़मीन तलाशने से कोसों दूर हैं। कहने का मतलब ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, खासकर युवा वर्ग पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर तलाशने में थोड़े पीछे रह रहे हैं। भले ही कुछ लोग स्ट्रिंगर या न्यूज़ गैदरर के तौर पर छोटी-मोटी खबरें चैनल्स या अखबारों को पहुंचाते रहते हैं, लेकिन उन्हें वो प्रोत्साहन नहीं मिलता, जिनके वो हकदार हैं। 

     

    वे असली प्रोत्साहन तब हासिल कर पाएंगे, जब वे पत्रकारिता के अस्तित्व और उसके महत्व को पूरी तरह से समझ पाएंगे और अपनी एक नई पहचान बनाएंगे। इसके लिए उन्हें इस पेशे से जुड़े नियमों, तकनीकों और कार्यशैली में माहिर होना पड़ेगा। यदि वे ऐसा कर पाते हैं, तो निश्चित रूप से वो ‘ग्रामीण पत्रकारिता’ को नई दिशा दे पाएंगे और एक नया कल लिख पाएंगे।

     

    लेकिन, यहां सवाल ये उठता है कि वे कैसे इस दिशा में अग्रसर हो सकते हैं? तो उसका जवाब हम आपको देंगे। Knitter के इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि कैसे आप पत्रकारिता और मीडिया जगत से जुड़ी पढ़ाई कर ग्रामीण पत्रकारिता को मज़बूती प्रदान कर सकते हैं? 

     

    आप किस तरह से इस क्षेत्र में महारत हासिल कर सकते हैं? तो चलिए, आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि ऐसे कौन से कोर्स हैं, जो ग्रामीण युवाओं को इस दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। लेकिन, इस बीच ये भी जान लेते हैं कि यहां किन-किन पहलुओं पर बात की जाएगी?

     

     

    आप इन विषयों को करीब से जानेंगे-

     

    ग्रामीण पत्रकारिता क्या है?

    इसका महत्व क्या है?

    ऐसे कौन से कोर्स हैं, जो गांवों में पत्रकारिता को बढ़ावा दे सकते हैं?

     

    ग्रामीण पत्रकारिता: 

     

    जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि ग्रामीण मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता को ही “ग्रामीण पत्रकारिता” कहा जाता है। इसमें हम किसानों की बात करते हैं। आदिवासियों की बात करते हैं। गरीबों की बात करते हैं और उनसे जुड़े मुद्दों की बात करते हैं। गांवों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है? स्थानीय समस्याएं क्या है? कृषि और किसानों की स्थिति क्या है? हम इन सारे सवालों का जवाब ग्रामीण पत्रकारिता के ज़रिए जानने का प्रयास करते हैं।

     

    ग्रामीण पत्रकारिता का महत्व

     

    ग्रामीण पत्रकारिता इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि मेनस्ट्रीम मीडिया को इससे ज़्यादा कोई सरोकार नहीं रह गया है। उसके लिए महज़ टीआरपी और नंबर्स मायने रखते हैं, जो ग्रामीण पत्रकारिता से पूरे नहीं हो पाते। यदि ग्रामीण क्षेत्रों की बात सामने लानी है, तो ग्रामीण पत्रकारिता को मज़बूती प्रदान करनी होगी। हमें गांव से जुड़े मुद्दे जैसे कि बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सैनिटेशन जैसे मामलों पर बात करनी होगी। 

     

    हमें प्रयास करना होगा कि ग्रामीणों को ये मूलभूत सुविधाएं ठीक उसी तरह से उपलब्ध हों, जैसा हम शहरों में अनुभव कर पाते हैं। तब जाकर जनता, जनप्रतिनिधियों और सरकार तक बात पहुंचाई जा सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ग्रामीण इलाकों में भी पत्रकार हैं। लेकिन, सच्चाई ये है कि ये महज़ खबरों के संकलन तक ही सीमित रह गए हैं। कम ही होता है कि कोई ठोस ग्रामीण मुद्दा लोगों तक पहुंचता है।

     

    लिहाज़ा, हमें और आपको एक बार फिर से ग्रामीण पत्रकारिता को नए सिरे से परिभाषित करने की ज़रूरत है। गांव की बात करके और गांव से जुड़े अहम मुद्दों को सरकार तक पहुंचा कर ही हम इस विधा को जीवित रख सकते हैं। 

     

    इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारों की एक नई फौज तैयार करने की ज़रूरत है, जिसमें मीडिया और उससे जुड़ी पढ़ाई अहम भूमिका निभा सकती है। आइए, पत्रकारिता और मीडिया जगत से जुड़े ऐसे ही कुछ कोर्स पर नज़र डालते हैं, जो गांवों में नई पीढ़ी के पत्रकार तैयार करने में मदद कर सकते हैं।

     

    ग्रेजुएशन लेवल के कोर्स:

     

    बैचलर्स इन जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन (B.J.M.C.)

     

    यह पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र से जुड़ा एक लोकप्रिय कोर्स है। इसे मीडिया जगत में दाखिल होने का एंट्री पास भी माना जाता है। अखबारों और टीवी चैनलों के न्यूज़ रूम में काम करने की इच्छा रखने वाले लोग इस कोर्स में काफी दिलचस्पी रखते हैं। हालांकि, इस कोर्स को करके आप ग्रामीण क्षेत्र में भी अपने पत्रकारिता करियर को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

     

    पढ़ाई:

     

    इसमें पत्रकारिता और मीडिया के इतिहास से लेकर इसके तकनीकी पहलुओं को भी शामिल किया जाता है। आप पत्रकारिता, रेडियो प्रसारण, फोटो जर्नलिज़्म और इंटरनेट राइटिंग जैसी चीज़ें सीखते हैं। साथ ही पत्रकारिता के नियमों और कार्यशैली से परिचित होते हैं। इसके अलावा आप पत्रकारिता के सामाजिक मूल्यों को भी जान पाते हैं।

     

    करियर विकल्प:

     

    पत्रकार, न्यूज़ एनालिस्ट, रेडियो जॉकी, टीवी संवाददाता, फीचर लेखक, स्तंभकार, फोटो जर्नलिस्ट।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 3 साल

     

    योग्यता:

     

    • 12वीं पास

     

    बैचलर ऑफ आर्ट्स इन कन्वर्जेंट जर्नलिज़्म (BACJ) 

     

    टीवी और इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के बीच ये कोर्स आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इस अंडर ग्रेजुएट कोर्स के ज़रिए टीवी जर्नलिज़्म और न्यूज़ के अलावा इंटरनेट पत्रकारिता से जुड़ी कई बारीकियां सीखी जा सकती हैं।

     

    पढ़ाई:

     

    इसमें आपको पत्रकारिता के सिद्धांतों के अलावा क्रिएटिव राइटिंग, ब्रॉडकास्ट जर्नलिज़्म, जनसंपर्क, क्राइम जर्नलिज़्म, खेल पत्रकारिता जैसे विषयों की पढ़ाई करनी पड़ती है। साथ ही स्टोरी डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

     

    करियर विकल्प:

     

    कंटेंट डेवलपर, सोशल मीडिया मैनेजर, न्यूज़ राइटर, एडिटर, प्रपोज़ल राइटर, रिसर्च असिस्टेंट, रेडियो पत्रकार, रिपोर्टर और कंटेंट राइटर।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 3 साल

     

    योग्यता:

     

    • 12वीं पास

     

    बैचलर ऑफ साइंस इन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (BSc.EM)

     

    इस कोर्स में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ी पढ़ाई होती है। आप टीवी, रेडियो और ऑनलाइन मीडिया को करीब से जान और समझ पाते हैं। ये कोर्स इन क्षेत्रों में काम करने के लिए आपको टेक्निकल नॉलेज प्रदान करता है। ये क्षेत्रीय और ग्रामीण पत्रकारिता को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकता है।

     

    पढ़ाई:

     

    आप टीवी, रेडियो और ऑनलाइन माध्यमों के लिए लिखना सीखते हैं। आपको कैमरा ऑपरेट करना, रिपोर्टिंग करना, एडिटिंग करना सिखाया जाता है। साथ ही आप एंकरिंग और न्यूज़ रीडिंग के गुर भी सीखते हैं।

     

    करियर विकल्प:

     

    रेडियो और टेलीविज़न एडिटर, रेडियो जॉकी, न्यूज़ एंकर, कैमरा पर्सन, वीडियो एडिटर, रिपोर्टर, ब्रॉडकास्ट प्रॉड्यूसर, प्रोमो प्रॉड्यूसर आदि।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 3 साल

     

    योग्यता:

     

    • 12वीं पास

     

    बैचलर ऑफ साइंस इन मल्टीमीडिया (BSc.MM)

     

    ये एक मल्टीमीडिया कोर्स है, जिससे आपको कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में करियर बनाने में मदद मिलती है। मीडिया और एंटरटेनमेंट, प्रोडक्ट लॉन्च और कॉर्पोरेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में मल्टीमीडिया की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। 

     

    पढ़ाई:

     

    इस कोर्स में आप मल्टीमीडिया के सारे पहलुओं से अवगत होते हैं और प्रैक्टिकल नॉलेज भी हासिल करते हैं। टेक्स्ट, एनिमेशन, ग्राफिक्स, ऑडियो और वीडियो के उपयोग को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। आप तकनीकी रूप से अधिक दक्ष हो पाते हैं। आप UI/UX जैसी चीज़ें भी सीखते हैं।

     

    करियर विकल्प:

     

    विज़ुअल कंटेंट क्रिएटर, पब्लिशर, कार्टून प्रोडक्शन एक्सपर्ट, एनिमेटर, वेब और एंटरटेनमेंट कंटेंट प्रॉड्यूसर।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 3 साल

     

    योग्यता:

     

    • 12वीं पास

     

    पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल के कोर्स:

     

    मास्टर्स इन जर्नलिज़्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC)

     

    ये एक मास्टर्स डिग्री है, जो आपको पत्रकारिता और जनसंचार को गहराई से समझने में मदद करती है। आप इस फील्ड की छोटी-बड़ी सभी बातों से वाकिफ होते हैं और एक बेहतर मीडिया प्रोफेशनल बनते हैं।

     

    पढ़ाई:

     

    मीडिया कानूनों और समाज में मीडिया की भूमिका को समझने के अलावा आप मानव अधिकारों को भी समझ पाते हैं। आपको मीडिया रिसर्च, कम्युनिकेशन, रिपोर्टिंग और प्रोडक्शन से जुड़ी बारीकियां सिखाई जाती हैं।

     

    करियर विकल्प:

     

    लेखक, पत्रकार, न्यूज़ एनालिस्ट, स्तंभकार, न्यूज़ और फैशन फोटोग्राफर, स्क्रीन राइटर, रेडियो जॉकी आदि।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 2 साल

     

    योग्यता:

     

    • ग्रेजुएशन
    • BJMC ग्रेजुएट को प्राथमिकता

     

    मास्टर ऑफ आर्ट्स इन ब्रॉडकास्ट जर्नलिज़्म (MABJ)

     

    रेडियो और टीवी में काम करने की इच्छा रखने वालों के लिए ये कोर्स बिल्कुल सही है। यहां तक कि ऑनलाइन पत्रकारिता सीखने के लिए भी ये कोर्स एक लाजवाब ऑप्शन है। इसे करके आप न्यूज़ प्रोडक्शन, टेलीविज़न प्रोग्राम प्रोडक्शन और रेडियो ब्रॉडकास्ट के एक्सपर्ट बन सकते हैं।

     

    पढ़ाई:

     

    इसमें टीवी, रेडियो और ऑनलाइन पत्रकारिता के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है। इनके लिए रिपोर्टिंग कैसे होती है, एडिटिंग कैसे की जाती है, न्यूज़ प्रोडक्शन कैसे होता है? ये सारी चीज़ें इसमें शामिल होती हैं। इसके अलावा ब्रॉडकास्ट जर्नलिज़्म से जुड़ी हर बात सिखाई जाती है।

     

    करियर विकल्प:

     

    कॉपी एडिटर, रेडियो प्रॉड्यूसर, वॉइस ओवर आर्टिस्ट, ऐड फिल्म मेकर, वीडियो एडिटर, प्रोमो प्रॉड्यूसर, रेडियो जॉकी, न्यूज़ एंकर।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    • 2 साल

     

    योग्यता:

     

    • ग्रेजुएशन

     

    एम.एससी. इन मीडिया रिसर्च (MSc.MR)

     

    ये एक ऐसा कोर्स है जो आपको प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और न्यू मीडिया के लिए ग्राउंड लेवल पर तैयार करता है। इसके बूते आप मार्केट रिसर्च, पॉलिटिकल रिसर्च और विज्ञापन रणनीतियों के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इस कोर्स के बूते आपको गांव में रहने वाले लोगों की साइकोलॉजी समझने में भी मदद मिलेगी।

     

    पढाई:

     

    इसमें आपको सर्वे, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, मार्केट ट्रेंड और इस जैसी अलग-अलग चीज़ें सिखाई जाती हैं। मार्केट रिसर्च, केस स्टडी, रिसर्च डिज़ाइन और कंटेंट एनालिसिस के तकनीकी पहलुओं से भी अवगत कराया जाता है। साथ ही मीडिया रिसर्च और पॉलिटिकल रिसर्च की शिक्षा भी दी जाती है।

     

    करियर विकल्प:

     

    मार्केट रिसर्चर, पॉलिटिकल एनालिस्ट, सर्वे एग्ज़ीक्यूटिव, सोशल मीडिया एनालिस्ट आदि।

     

    कोर्स की अवधि:

     

    •  2 साल

     

    योग्यता:

     

    • ग्रेजुएशन

     

    पीजी डिप्लोमा इन स्क्रीन राइटिंग 

     

    ये कोर्स आपको फिल्म, टीवी और OTT प्लेटफॉर्म के लिए तैयार करता है। आप स्क्रिप्ट राइटिंग और स्क्रीनप्ले के क्षेत्र में काम करने के काबिल बन पाते हैं।

     

    पढ़ाई:

     

    इसमें आपको स्क्रिप्ट लिखना सिखाया जाता है। आप बेसिक नॉलेज के साथ-साथ लेखन संबंधी टेक्निकल बातें भी जान पाते हैं। इस कोर्स में आपको टीवी, वीडियो गेम्स, फिल्म, ओटीटी प्लेटफॉर्म और थिएटर के लिए लिखना सिखाया जाता है। आप स्टेप बाई स्टेप शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म और वेब सीरीज़ राइटिंग सीख पाते हैं। स्टोरी बोर्डिंग इसका एक अहम हिस्सा है।

     

    करियर विकल्प:

     

    स्क्रीन राइटर, स्क्रिप्ट राइटर, स्टोरी बोर्ड राइटर, वेब सीरीज़ और टीवी राइटर।

     

    कोर्स की अवधि:  

    • 2 साल

     

    योग्यता:

     

    • ग्रेजुएशन

     

    इन सबके अलावा और भी कई ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल के कोर्स हैं, जिन्हें करके आप अपने करियर को नए मुकाम पर ले जा सकते हैं। साथ ही ग्रामीण पत्रकारिता की सच्ची भावना को जीवित रख सकते हैं। 

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यहां आपको ट्रेंडिंग टॉपिक्स के अलावा बिज़नेस, कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

     

     

    लेखक- कुंदन भूत

     



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