फसल चक्र क्या है और किसानों को क्यों है इसकी जरूरत?

फसल चक्र क्या है और किसानों को क्यों है इसकी जरूरत?

फसल चक्र (Crop Rotation) मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन के लिहाज से बेहद अहम है। आइए, इसे समझने का प्रयास करें।

09 January 2021

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  • आज भले ही अधिकांश किसान अपने खेतों में केमिकल फर्टिलाइजर्स और पेस्टिसाइड्स का उपयोग करते हैं, लेकिन सदियों पहले हमारे पास ये सबकुछ नहीं था। हमारे पास अपने खेतों के लिए महज कुछ ही साधन थे, जिनमें ‘फसल चक्र’ (Crop Rotation) शीर्ष पर हुआ करता था। दुःखद बात ये है कि समय के साथ हम खुद ही हमारी कारगर तकनीकों और विधियों को भूलने लगे। आज एक बार फिर से फसल चक्र जैसी कारगर विधि को जोर-शोर से अपनाने की आवश्यकता है, ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सके।

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको फसल चक्र (Crop Rotation) पर जानकारी प्रदान करेंगे। हम आपको बताएंगे कि फसल लेने की ये प्राचीन विधि किस तरह से आज भी भारतीय कृषि के लिए प्रासंगिक है। तो चलिए, जानकारियों का ये सफर शुरू करते हैं और इस विषय को विस्तार से जानते हैं।

     

    फसल चक्र क्या है?

     

    फसल चक्र (Crop Rotation) फसल लेने की एक विधि है, जिसके तहत एक ही भूमि पर अलग-अलग समय में अलग-अलग फसल ली जाती है। सामान्य शब्दों में कहें तो फसल की अदला-बदली को ही फसल चक्र कहा जाता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है और पोषक तत्वों की मात्रा में भी वृद्धि होती है। उदाहरणतः धान के बाद दलहन की फसल लेना फसल चक्र कहलाता है।

     

    किसानों को फसल चक्र क्यों अपनाना चाहिए?

     

    हर पौधे या फसल की पोषक तत्वों की आवश्यकता अलग होती है। यदि कोई किसान लगातार एक ही तरह की फसल लेता है तो उससे मिट्टी को नुकसान पहुंचता है और उत्पादन पर भी इसका असर पड़ता है। वहीं खरपतवार और कीटों की समस्या भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में फसल चक्र अपनाकर किसान ऐसी कई समस्याओं से निजात पा सकते हैं। फसल चक्र से न सिर्फ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि जैव विविधता में भी मदद मिलती है। वहीं, इससे फसल से जुड़ी बीमारियां भी दूर रहती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फसल चक्र मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जो कृषि उत्पादन में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

     

     फसल चक्र

     

    इसके फायदे क्या हैं?

     

    फसल चक्र के बहुत से फायदे हैं। आइए, हम  फसल चक्र के फायदों को विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं।

     

    मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है:

     

    फसल चक्र से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। जैसा कि आप जानते हैं कि हर फसल अलग होती है। कुछ की जड़ें गहरी होती हैं, तो कुछ की सतही या उथली। फसल के अलग-अलग गुण फसल चक्र के निर्धारण में मदद करते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि किसान बारी-बारी इन फसलों का चयन करते हैं, तो मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि सतही फसल होगी, तो पौधे मिट्टी के ऊपरी सतह में मौजूद पोषक तत्वों को ग्रहण करेंगे। वहीं, यदि गहरी जड़ों वाली फसल ली जाएगी तो मिट्टी के निचले हिस्सों में मौजूद पोषक तत्वों का लाभ भी लिया जा सकेगा। यहां मकसद यही होता है कि मिट्टी में मौजूद तमाम पोषक तत्वों का भरपूर लाभ लिया जा सके और यह विधि इस काम में किसानों की मदद करती है। इसके अतिरिक्त फसल चक्र से मिट्टी में वायु संचार यानी Aeration भी बेहतर हो पाता है। 

     

    पौधों को संतुलित पोषण प्राप्त होता है:

     

    हम सभी ये बात जानते हैं कि मिट्टी में तरह-तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं और इन पोषक तत्वों की बदौलत ही हमारी फसल बढ़ पाती है। यहां ये बताना भी जरूरी है कि हर फसल अलग-अलग मात्रा में पोषक तत्वों को ग्रहण करती है। कुछ फसलों को बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व चाहिए होते हैं तो कुछ के लिए पोषक तत्वों की कम मात्रा भी काफी होती है। मान लीजिए यदि आपने ऐसी कोई फसल ली है जिसके लिए अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता है, तो अगली बार ऐसी कोई फसल लें जो मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा कम होने के बावजूद भी अच्छी तरह बढ़े। इससे ये होगा कि फसल को संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकेगी।

     

    खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है:

     

    फसल चक्र से किसानों को खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिलती है। कई फसल ऐसी होती है, जिसके बार-बार लिए जाने से खरपतवार के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में खरपतवार तेजी से बढ़ने लगते हैं। लिहाजा, किसानों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और ऐसी फसल लेनी चाहिए जिससे खरपतवार के लिए एक विपरीत वातावरण तैयार हो। इस तरह किसान खरपतवार की समस्या से मुक्त हो सकेंगे।  

     

    कीटों की रोकथाम होती है:

     

    खेतों में होने वाले कीट किसानों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। फसल चक्र से किसानों को कीटों की रोकथाम में भी मदद मिल जाती है। कुछ फसल कीटों के लिए बिल्कुल उपयुक्त होते हैं। इसलिए किसानों को मौसम और जलवायु को ध्यान में रखते हुए ऐसी फसल लेनी चाहिए, जिन पर कीटों का प्रभाव न के बराबर हो। यहां ये बताना भी आवश्यक है कि फसल चक्र से कीटों की रोकथाम में मदद मिलती है मगर ये कीटों के प्रभाव को पूरी तरह नहीं रोक सकते। इसलिए जरूरी है कि आप फसल चक्र के साथ अन्य उपाय भी अपनाएं। इस तरह आप कीटों को पूरी तरह से रोकने में कामयाब रहेंगे।

     

    मिट्टी का कटाव नहीं होता:

     

    यदि किसान सही तरीके से फसल चक्र को अपनाते हैं तो इससे मिट्टी के कटाव में भी कमी आती है। जैसा कि आपको पता है कि हवा और पानी के जरिए मिट्टी का कटाव आम बात है। लेकिन यदि फसल चक्र के तहत किसान सही फसल लेते हैं, तो उनकी ये समस्या भी दूर हो जाती है।

     

    इन सभी फायदों के अतिरिक्त फसल चक्र किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से भी अहम है। जानकारों का मानना है कि फसल चक्र से उत्पादन में वृद्धि होती है और कृषि लागत में भी कमी आती है। इसलिए हर किसान को फसल चक्र अपनाना चाहिए।

     

    फसल चक्र का निर्धारण करने वाले कारक

    • सिंचाई का स्रोत
    • मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति
    • फर्टिलाइजर, मशीन और श्रमिकों की उपलब्धता
    • फसल की अवधि
    • प्रसंस्करण ईकाइयों और बाजार की उपलब्धता

     

    फसल चक्र का उदाहरण:

     

    वर्ष  

    खरीफ

    रबी

    ज़ायद

    पहले वर्ष

    धान

    गेहूं

    हरी सब्ज़ियां

    दूसरे वर्ष

    मक्का

    जौ/सरसों

    परती छोड़ सकते हैं

    तीसरे वर्ष

    तिलहनी फसल/बाजरा

    दलहनी फसल

    सब्ज़ियां

    चौथे वर्ष

    धान

    गेहूं/मटर

    तरबूज़/ खरबूज़ा

     

    फसल के हिसाब से फसल चक्र का वर्गीकरण:

     

    भारत में अलग-अलग क्षेत्र में जलवायु और आदानों की उपलब्धता के आधार पर किसान फसल चक्र को अपनाते हैं। कुछ प्रचलित फसल चक्र इस प्रकार हैं-

    दलहनी फसल- दलहनी फसलों में आप सीजन के हिसाब से मूंग और गेहूं, धान और चना, बाजरा और चना, ज्वार और चना आदि का उपयोग कर सकते हैं।

     

    सब्जी की फसल- सब्ज़ियों के लिए आप मौसम को ध्यान में रखकर पालक और टमाटर, भिंडी और मटर, फूल गोभी और मूली, बैंगन व लौकी, आलू और मूली जैसी सब्ज़ियां फसल चक्र के तहत उगा सकते हैं।

     

    अन्न की फसल- अन्न की फसल में आप मक्का और गेहूं, धान और गेहूं, बाजरा और गेहूं, चना और गेहूं, गन्ना और गेहूं फसल चक्र के रूप में ले सकते हैं।

    हरी खाद की फसल- इसके तहत हरी खाद की मदद से फसल उगाई जाती है। जैसे कि हरी खाद और गेहूं, फिर हरी खाद और धान, हरी खाद और केला, हरी खाद और गन्ना फसल चक्र का हिस्सा होते हैं।

     

    कौन सी फसल नहीं लेनी चाहिए?

     

    फसल चक्र अपनाते वक्त इस बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि एक ही तरह की फसल या एक ही गुण वाली फसल न ली जाए। इससे मिट्टी के पोषक तत्वों में कमी आती है और विशेष प्रजाति के कीड़े लगने की आशंका बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आप खीरे की फसल लेते हैं, तो उसके बाद तरबूज़ या खरबूज़े की फसल न लें। वहीं, यदि आप फूल गोभी उगाते हैं, तो उसके तुरंत बाद पत्ता गोभी या ब्रॉकली न लगाएं। इसके अतिरिक्त यदि आप आलू की फसल ले रहे हैं तो उसके बाद टमाटर की फसल न लें।

     

    फसल चक्र के सिद्धांत:

    • यदि आपने कोई ऐसी फसल ली है जिसमें ज्यादा खाद की आवश्यकता पड़ती है, तो अगली बार कम खाद वाली फसल लें।
    • यदि आपने सतही या उथली जड़ वाली फसल ली है, तो अगली बार गहरी जड़ वाली फसल लें।
    • यदि आपने अधिक पोषक तत्व ग्रहण करने वाली कोई फसल ली है तो अगली बार उसे खाली छोड़ना बेहतर रहेगा। इससे मिट्टी में पुनः पोषक तत्वों के निर्माण को समय मिल सकेगा।
    • यदि आपने अनाज की फसल ली है, कम से कम तीन साल में एक बार दलहन की फसल जरूर लें।
    • यदि फसल में बार-बार किसी विशेष प्रजाति के कीट होते हैं, तो उस फसल को दोबारा न लें।
    • यदि आपने ऐसी कोई फसल ली है, जिसमें अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है, तो अगली बार कम पानी वाली फसल ही लें।
    • सबसे महत्वपूर्ण बात, बाजार की मांग के अनुरूप ही फसल लें।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। इस ब्लॉग में हमने फसल चक्र (Crop Rotation) के बारे में बताने की कोशिश की है। हमने आपको बताया कि किसान फसल चक्र अपनाकर किस तरह से बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं? वे किस तरह इस विधि के जरिए मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों में संतुलन बनाए रख सकते हैं और अपनी उपज के लिए उनका फायदा ले सकते हैं? ये ब्लॉग किसान भाइयों को फसल चक्र के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराएगा।

     

    हम आपसे यही आशा करते हैं कि आप इसी तरह Knitter के साथ बने रहेंगे और हमारे इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स पढ़ते रहेंगे।  

     

    आपको बता दें कि Knitter पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण के अलावा एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।



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