एक आंगनवाड़ी केंद्र खुलने से गांव को मिलते हैं कई लाभ

गांव के मां-बच्चों की देखभाल कर रहे आंगनवाड़ी केंद्र

आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं मुहैया की जाती हैं। ग्रामीण विकास में इनकी अहम भूमिका है।

03 February 2021

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  • आपने आंगनवाड़ी केंद्रों के बारे में ज़रूर सुना होगा। सरल भाषा में समझें तो ये एक तरह का प्ले स्कूल होता है, जहां गांव के छोटे बच्चे जाकर खेलते हैं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा उन्हें प्राथमिक शिक्षा भी दी जाती है। लेकिन, इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों की ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका होती है। 

     

    आंगनवाड़ी केंद्र से गांव के विकास को बल मिलता है। इससे ग्रामवासियों को कई सुविधाएं मिलती हैं। आज हम इसी पर बात करने वाले हैं। इस ब्लॉग में आपको इन बातों की जानकारी देंगे- 

     

    • आंगनवाड़ी केंद्र क्या हैं?
    • यह कैसे संचालित किए जाते हैं?
    • इनसे गांव की महिलाओं को कैसे रोज़गार मिलता है?
    • आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा गांव में क्या-क्या काम किए जाते हैं?
    • ग्रामीण विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका क्या है?

     

    आंगनवाड़ी केंद्र

     

    आंगनवाड़ी केंद्रों को भारत सरकार द्वारा 1975 में शुरू किया गया था। इनका मुख्य उद्देश्य पोषण, एजुकेशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाना है। शहरी क्षेत्रों में आंगनवाड़ी क्षेत्रों में 800 से 1000 की आबादी व ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्र 300 से 500 की जनसंख्या पर बनाये जाते हैं, इसलिए एक गांव में एक से ज्यादा आंगनवाड़ी केंद्र भी हो सकते हैं। राज्य स्तर पर इनका संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है।

     

    आंगनवाड़ी केंद्र में स्टाफ

     

    एक आंगनवाड़ी केंद्र में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक सहायिका की नियुक्ति की जाती है। इनके काम की निगरानी के लिए एक सुपरवाइजर को नियुक्त किया जाता है। इनके अंतर्गत 25 से 30 आंगनवाड़ी केंद्र आते हैं।


     

    एक आंगनवाड़ी केंद्र खुलने से गांव को मिलते हैं कई लाभ

     

     

    आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना और नियुक्ति

     

    आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना के लिए पंचायत द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग को प्रस्ताव भेजा जाता है। स्वीकृति के बाद गांव में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के लिए रिक्तियां निकाली जाती हैं, जिनके लिए स्थानीय महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं।

     

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की पोस्ट के लिए आवेदिका 12वीं पास होनी चाहिए। वहीं, सहायिका के पद के लिए पांचवी पास महिला आवेदन कर सकती है।दोनों पदों पर मेरिट 12वीं/5वीं के अंक, बीपीएल/अनुसूचित जाति आरक्षण, विधवा कोटा के आधार पर तैयार की जाती है।

     

    नियुक्ति के बाद इन कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक महीने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों में होने वाली विभिन्न गतिविधियों को इस बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।

     

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सैलरी

     

    आंगनवाड़ी कर्मचारियों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा वेतन जारी किया जाता है। दोनों को जोड़कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को करीब 10 हज़ार और सहायिका को लगभग 5 हज़ार रुपये कुल मासिक वेतन मिलता है। 

     

    आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा किए जाने वाले कार्य

     

    • गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और रेगुलर चेकअप का ध्यान रखना।
    • गांव के सभी छोटे बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करना।
    • बच्चों और महिलाओं को पौष्टिक आहार मुहैया करवाना ताकि वे कुपोषण के शिकार न हों। 
    • 3 से 6 साल के बच्चों को प्री-स्कूल एक्टिविटीज करवाना ताकि उनका बेहतर मानसिक विकास हो सके।
    • स्वास्थ्य और पोषण को लेकर गांव में जागरूकता फैलाना।
    • स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना।
    • गांव से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी डाटा इकट्ठा करना।
    • कुपोषण अथवा बीमारी के गंभीर मामलों को अस्पताल भेजना।
    • चुनाव के समय आंगनवाड़ी के कर्मचारियों द्वारा चुनाव आयोग की मदद करना।

     

    आंगनवाड़ी केंद्रों से गांव में रोज़गार

     

    ग्रामीण इलाकों में आंगनवाड़ी केंद्र खुलने से जहां गांव की दो स्थानीय महिलाओं को स्थाई रोज़गार मिलता है। वहीं, गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी रोज़गार के अवसर खुलते हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा गांव के स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर भोजन (मिड-डे-मील) की सुविधा दी जाती है, जिसके लिए गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाती है और उन्हें इसके लिए वेतन दिया जाता है।

     

    ग्रामीण विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका

     

    ग्रामीण विकास में आंगनवाड़ी केंद्र अहम भूमिका निभाते हैं। चूंकि, आंगनवाड़ी की कर्मचारी स्थानीय महिलाएं होती हैं। इसलिए वे गांव के हर परिवार की समस्याओं को अच्छे से समझ पाती हैं। वे उनके स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक हालात से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें मार्गदर्शन देती हैं और सरकारी मदद भी उपलब्ध करवाती हैं। वहीं, सर्वे के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा ही इलाके की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जाता है, जिसके आधार पर सरकार उन इलाकों के लिए योजनाएं तैयार करती है।


     

    एक आंगनवाड़ी केंद्र खुलने से गांव को मिलते हैं कई लाभ

     

     

     

    भारत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्र ज़मीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने के साथ उन तक सुविधाएं भी पहुंचा रहे हैं। इनसे ग्रामीण इलाकों में कुपोषण, निरक्षरता, बढ़ती जनसंख्या जैसी कई समस्याओं को रोकने में मदद मिल रही है। उम्मीद है आपको आंगनवाड़ी केंद्रों के कार्यों और उपयोगिता से संबंधी सभी सवालों के जवाब इस ब्लॉग में मिल पाए होंगे।

     

    ✍️

    लेखक- मोहित वर्मा         


     



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