Law: गिरफ्तारी को लेकर कैसी है पुलिस-कानून की भूमिका?

Law: गिरफ्तारी को लेकर क्या है कानून? ऐसे समझिए मामला

किसी व्यक्ति को गिरफ्तार (Arrest) करने में क्या है कानून (Law) की भूमिका? क्या है पुलिस के अधिकार? इस ब्लॉग में इसी विषय पर बात होगी।

06 February 2021

  • 556 Views
  • 5 Min Read

  • अगर पुलिस (Police) आपके घर आए और किसी सदस्य को गिरफ्तार (Arrest) करके ले जाने की कोशिश करे तो आप क्या कर सकते हैं? कैसे रोक सकते हैं? यदि बात थाने तक पहुंच जाए तो फिर आप क्या कर सकते हैं? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हम लेकर आए हैं Knitter के इस ब्लॉग में। तो चलिए शुरू करते हैं बात गिरफ्तारी और कानून (Law) की।

     

    गिरफ्तारी और कानूनी सहायता (Police Arrest)

     

    मान लीजिए कि पुलिस गिरफ्तारी (Police Arrest) के लिए किसी के घर पहुंच ही चुकी है। मगर वह वकील बुलाकर कानूनी सहायता (Legal Help) ले सकता है। हां, यह ध्यान रहे कि यह काम थोड़ा जल्दी हो। दूसरा, याद रखें कि कुछ अपराधों (Crime) में पुलिस बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, गिरफ्तारी के समय पुलिस को किसी भी तरह की जबरदस्ती करना मना है। इसे गैर-कानूनी (Illegal) माना जाता है।

     

    लेकिन, आरोपी कहीं छिप जाए तो   

     

    अगर व्यक्ति खुद सामने नहीं आता है। गिरफ्तारी किसी बंद स्थान या मकान से होना है। तो ऐसे में मकान मालिक का फर्ज़ है कि वह आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दे। ऐसा न होने की स्थिति में पुलिस के पास यह अधिकार होता है कि वह ऐसे किसी स्थान, मकान आदि का ताला तोड़कर न सिर्फ छानबीन करे बल्कि आरोपी को पकड़कर गिरफ्तार कर ले।

     

    गिरफ्तारी और हथकड़ी लगाने की प्रक्रिया

     

    गिरफ्तारी के समय हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती। यह गैर-कानूनी है। हथकड़ी केवल कुख्यात अपराधियों को लगाई जाती है। या फिर उसे जिसके भागने की आशंका हो। ऐसे में मजिस्ट्रेट (Magistrate) के सामने पेश करने तक हथकड़ी लगाई जा सकती है। और हां, पुलिस हिरासत में मार-पीट करना, यातना देना गंभीर अपराध है।

     

    गिरफ्तारी और इसके बाद की प्रक्रिया (Police Arrest)

     

    • गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस को मजिस्ट्रेट को इसकी रिपोर्ट देना चाहिए।
    • गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे में कोर्ट में पेश करना जरूरी है।
    • बिना मजिस्ट्रेट के आदेश 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखना गैर-कानूनी है।
    • मजिस्ट्रेट वीकेंड-त्योहार और छुट्टी वाले दिन भी अदालत में बैठते हैं।
    • 24 घंटों में पुलिस स्टेशन से अदालत पहुंचने का समय नहीं जोड़ा जाता है।

     

    अगर पुलिस आपके घर आए और किसी सदस्य को गिरफ्तार (Arrest) करके ले जाने की कोशिश करे तो आप क्या कर सकते हैं? कैसे रोक सकते हैं? यदि बात थाने तक पहुंच जाए तो फिर आप क्या कर सकते हैं? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हम लेकर आए हैं Knitter के इस ब्लॉग में। तो चलिए शुरू करते हैं बात गिरफ्तारी और कानून (Law and Order) की। गिरफ्तारी और कानूनी सहायता मान लीजिए कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए किसी के घर पहुंच ही चुकी है। मगर वह वकील बुलाकर कानूनी सहायता ले सकता है। हां, यह ध्यान रहे कि यह काम थोड़ा जल्दी हो। दूसरा, याद रखें कि कुछ अपराधों (Crime) में पुलिस बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, गिरफ्तारी के समय पुलिस को किसी भी तरह की जबरदस्ती करना मना है। इसे गैर-कानूनी माना जाता है। लेकिन, आरोपी कहीं छिप जाए तो    अगर व्यक्ति खुद सामने नहीं आता है। गिरफ्तारी किसी बंद स्थान या मकान से होना है। तो ऐसे में मकान मालिक का फर्ज है कि वह आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दे। ऐसा न होने की स्थिति में पुलिस के पास यह अधिकार होता है कि वह ऐसे किसी स्थान, मकान आदि का ताला तोड़कर न सिर्फ छानबीन करे बल्कि आरोपी को पकड़कर गिरफ्तार कर ले। गिरफ्तारी और हथकड़ी लगाने की प्रक्रिया गिरफ्तारी के समय हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती। यह गैर-कानूनी है। हथकड़ी केवल कुख्यात अपराधियों को लगाई जाती है। या फिर उसे जिसके भागने की आशंका हो। ऐसे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने तक हथकड़ी लगाई जा सकती है। और हां, पुलिस हिरासत में मार-पीट करना, यातना देना गंभीर अपराध है। गिरफ्तारी और इसके बाद की प्रक्रिया गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस मजिस्ट्रेट को इसकी रिपोर्ट देना चाहिए। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे में कोर्ट में पेश करना जरूरी है। बिना मजिस्ट्रेट के आदेश 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखना गैर-कानूनी है। मजिस्ट्रेट वीकेंड-त्योहार और छुट्टी वाले दिन भी अदालत में बैठते हैं। 24 घंटों में पुलिस स्टेशन से अदालत पहुंचने का समय नहीं जोड़ा जाता है। Content Image गिरफ्तार हुए व्यक्ति की डॉक्टरी जांच CRPC की धारा 53(2): महिला की जांच रजिस्टर्ड मेडिकल ऑफिसर की देखरेख में की जाए पीड़ित का अधिकार है कि उसकी मेडिकल जांच की जाए मजिस्ट्रेट के निर्देशानुसार यह जांच रजिस्टर्ड मेडिकल ऑफिसर द्वारा की जाती है गिरफ्तारी, लॉकअप और महिला आपको पता है कि यदि पुलिस किसी महिला को गिरफ्तार करने के बाद थाने ले जाती है तो उसे केवल महिलाओं वाले कमरे में रखा जा सकता है। थाने में महिला रहे, यह मांग की जा सकती है। बस ध्यान रहे कि बिना पढ़े-बिना जाने किसी कागज पर दस्तख़त न करें। न अंगूठा लगाएं। अगर अनपढ़ हैं, तो किसी और से पढ़वा लें। जुर्म कबूल करने के बाद कैसे मिले न्याय दरअसल, होता यह है कि कई बार पुलिस और उसकी मार के डर से निर्दोष व्यक्ति भी अपराध कबूल कर लेता है। मगर ऐसा करने मात्र से ही वह दोषी हो जाएगा, ऐसा नहीं है। केवल मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया गया जुर्म ही मान्य होता है। और हां यदि पुलिस वहां भी दबाव बनाती है तो यह बात मजिस्ट्रेट को बताएं। पीड़ित के पास सारे कारण जानने का अधिकार आम नागरिक के पास पुलिस से यह पूछने का अधिकार है कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है? वैसे भी यह अनिवार्य है कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा रहा है, पुलिस खुद उसे यह तमाम जानकारियां उपलब्ध करवाए। दूसरा न्यायपालिका की ओर से पुलिसथानों में पीड़ित के अधिकारों से संबंधित नोटिस बोर्ड लगाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। -एम.फारुक फारुकी, वकील , बुरहानपुर (म.प्र.) लेखक- हिमांशु दुबे

     

     

    गिरफ्तारी, लॉकअप और महिला (Police Arrest)

     

    आपको पता है कि यदि पुलिस किसी महिला (Women) को गिरफ्तार करने के बाद थाने ले जाती है, तो उसे केवल महिलाओं वाले कमरे में रखा जा सकता है। थाने में महिला रहे, यह मांग की जा सकती है। बस ध्यान रहे कि बिना पढ़े-बिना जाने किसी कागज़ पर दस्तख़त न करें। न अंगूठा लगाएं। अगर अनपढ़ हैं, तो किसी और से पढ़वा लें।

     

    जुर्म (Crime) कबूल करने के बाद कैसे मिले न्याय (Justice)

     

    दरअसल, होता यह है कि कई बार पुलिस और उसकी मार के डर से निर्दोष व्यक्ति भी अपराध कबूल कर लेता है। मगर ऐसा करने मात्र से ही वह दोषी हो जाएगा, ऐसा नहीं है। केवल मजिस्ट्रेट (Magistrate) के सामने कबूल किया गया जुर्म (Crime) ही मान्य होता है। और हां, यदि पुलिस वहां भी दबाव बनाती है तो यह बात मजिस्ट्रेट को बताएं, ताकि पीड़ित को न्याय मिल पाए।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यहां आपको ट्रेंडिंग टॉपिक्स के अलावा बिज़नेस, कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

     

    लेखक- हिमांशु दुबे

     



    यह भी पढ़ें



    जागरूकता की अन्य ब्लॉग