पपीते की बागवानी : महज़ 3 लाख की लागत और लाखों की कमाई

पपीते की बागवानी आपको बना देगी ‘सेठ जी’

बागवानी (horticulture) में पपीते की खेती (papaya cultivation) एक अच्छा विकल्प है। आइए, इस ब्लॉग में पपीते की खेती को विस्तार से जानें...

22 January 2021

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  • आज भी ज़्यादातर किसान परंपरागत खेती करते आ रहे हैं, जबकि अच्छी आमदनी के लिए किसानों को नकदी फसलों की खेती को अपनाने की ज़रूरत है। नकदी फसलों के लिए बागवानी सबसे अच्छा विकल्प है। बागवानी (horticulture) में पपीते की खेती (papaya cultivation) करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है । 

     

    पपीता ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। इसे नकदी फसलों का राजा माना जाता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, इसके स्वाद, पोषक तत्व और औषधीय गुणों के कारण इसकी डिमांड बाज़ार में साल भर रहती है। इस फल में कई पाचक एन्जाइम होते हैं जिसमें पेट की कई बीमारियों  को दूर करने की क्षमता होती है। 

     

    जो किसान पपीते की खेती (papite ki kheti) करना चाहते हैं, उन्हें किन-किन बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत होगी। इसकी चर्चा आज हम Knitter के इस ब्लॉग में करेंगे। 

     

    इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे- 

    • पपीते के लिए जलवायु
    • पपीते के लिए मिट्टी
    • पपीते की खेती का समय
    • खेती की तैयारी कैसे करें
    • पपीते की उन्नत किस्में
    • पपीते की खेती में सिंचाई
    • लगने वाले रोग और उसका इलाज 
    • पपीते की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

    जिससे आप पपीते की उन्नत खेती करके अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

     

    तो आइए सबसे पहले पपीते के लिए जलवायु (Climate) के बारे में जानते हैं। 

     

    पपीते के लिए जलवायु

     

    पपीता गर्म और नम जलवायु का पौधा है। इसकी खेती के लिए 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान अच्छा होता है। इसकी बागवानी के लिए अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेंटीग्रेड और 10 सेंटीग्रेड से कम नहीं होना  चाहिए।

     

    आपको बता दें, पपीते की खेती ठंडे प्रदेश को छोड़कर पूरे भारत में की जा सकती है। 

     

    पपीते के लिए मिट्टी

     

    पपीते के लिए उपजाऊ मिट्टी की ज़रूरत होती है। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी (sandy loam soil) उपयुक्त होती है। इसे लाल मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, लेकिन चिकनी मिट्टी पपीते के लिए ठीक नहीं होती है। पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पीएच वैल्यू (ph) 5.5 से 6.5 होनी चाहिए।

     

    जलभराव वाली मिट्टी में पपीते की खेती नहीं करनी चाहिए। इससे पपीते में जड़गलन रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।  

     

    पपीते की खेती का समय

     

    पपीते की खेती के लिए पौधा रोपण (पौधों की रोपाई) साल में दो बार की जा सकती है। 

    पहला- फरवरी-मार्च के महीने में 

    दूसरा- जुलाई-अगस्त के महीने में  

     

    खेती की तैयारी ऐसे  करें

     

    पपीते की खेती करने के लिए किसानों को गहरी जुताई करके खेत को समतल कर लेना चाहिए। पौधे की रोपाई से पहले बीजों का उपचार ट्राईकोड्रमा या अन्य दवाइयों से कर लेना चाहिए।   

     

    खेत में ढाल ज़रूरी होनी चाहिए जिससे पानी का निकास हो सके। इसके लिए 50x50x50 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे 1.5x1.5 मीटर के फासले पर खोद लेने चाहिए। हो सके तो पपीते की खेती बेड (Bed) बनाकर मल्चिंग विधि से करें। इससे सिंचाई की ज़रूरत कम पड़ती है और पपीते में रोग लगने की संभावना कम हो जाएगी। 

     

    पपीते की उन्नत किस्में

     

    इन दिनों पपीते की संकर प्रजातियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ताइवान किस्म  तो किसानों की पहली पसंद है। इसके अलावा पपीते की ऐसी अनेक प्रजातियां हैं, जिसका अच्छा उत्पादन है। 

     

    पपीते के किस्मों में रेड लेडी 786, पूसा नन्हा, पूसा डवार्फ, पूसा जायंट, पूसा डेलिसियस, पूसा मैजेस्टी, कयोम्बटूर-1, कयोम्बटूर-2, कयोम्बटूर-3, कयोम्बटूर-4 वाशिंगटन, सोलो, सिलोन प्रमुख हैं। 

     

    पपीते की वैज्ञानिक खेती की पूरी जानकारी

     

    पपीते की बागवानी में सिंचाई

     

    पपीते की अच्छी खेती के लिए गर्मियों के दिनों में 6 से 7 दिन पर और सर्दियों में 10 से 12 दिन पर सिंचाई करनी चाहिए। बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन बारिश नहीं होने पर सिंचाई ज़रूर करें।

     

    लगने वाले रोग और उसका इलाज़ 

     

    पपीते में कीड़ों का प्रकोप बहुत ज्यादा नहीं होता है, लेकिन वायरस से पपीते की बागवानी को बहुत अधिक हानि होती है। 

     

    पपीते में सबसे ज्यादा जड़गलन और पाले की समस्या होती है। अगर पाला पड़ने की आशंका हो तो किसानों को शाम के समय धुंआ करने के साथ हल्की सिंचाई भी कर देनी चाहिए।

     

    पपीते की खेती से कमाई

     

    यदि किसान अच्छी क्वॉलिटी के पपीते का उत्पादन करें तो इससे लाखों की कमाई कर सकते हैं। पपीते की एक हेक्‍टेयर खेती से एक सीजन में करीब 10 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है। 

     

    थोक भाव में पपीते को 15 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भी बेचने पर एक क्विंटल पर 1500 रुपए मिल सकते हैं। यदि आपके खेत से एक सीज़न में 90-100 क्विंटल पपीते का उत्पादन हो तो करीब 13.5 लाख रुपए की फसल तैयार होती है। खेती की तैयारी में अगर आपका खर्च 3 से साढ़े 3 लाख रुपए खर्च होता है तो आप करीब 10 लाख रुपए एक सीजन में कमा सकते हैं।

     

    पपीते की वैज्ञानिक खेती की पूरी जानकारी

    संक्षेप में कहें तो किसान पपीते की बागवानी से कम समय, कम क्षेत्र, कम लागत में अधिक पैदावार व अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। अगर किसान पपीते की बागवानी वैज्ञानिक तकनीक से करें, तो यह एक अच्छा कृषि व्यवसाय साबित हो सकता है।

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता



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