त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, भाग-2(पंचायत समिति)

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, भाग-2(पंचायत समिति)

पंचायत समिति त्रिस्तरीय पंचायती राज की मध्यवर्ती इकाई है जो गाँव का विकास करने के लिए सबसे उच्च जिला परिषद और सबसे निचले ग्राम पंचायत इकाई को जोड़कर रखती है।

26 June 2020

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  • अभी तक आप लोगों ने हमारे ब्लॉग त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, भाग-1(ग्राम पंचायत) में पढ़ा कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था की पहली इकाई ग्राम पंचायत है।

     

    अब आप इस ब्लॉग में पढ़ेंगे कि पंचायती राज संस्था में द्वितीय स्तर पर पंचायत समिति क्या है?

     

    पंचायत राज की त्रिस्तरीय संरचना में ग्राम स्तर से ऊपर अर्थात मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति होती है। जो ग्राम पंचायत एवं जिला परिषद के बीच कड़ी का कार्य करता है। पंचायती राज की इस संस्था को ‘क्षेत्र समिति’ या ‘आंचलिक परिषद्’ भी कहते हैं। इस समिति का गठन भी सभी राज्यों में एक समान नहीं है।

     

    इस मध्यवर्ती स्तर को आंध्रप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में ‘पंचायत समिति कहा जाता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इसे ‘क्षेत्र समिति’ असम में ‘आंचलिक पंचायत समिति’, पश्चिम बंगाल में ‘आंचलिक परिषद्’, गुजरात में ‘तालुका परिषद्’, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ‘जनपद पंचायत’ कर्नाटक में ‘पंचायत संघ परिषद्’ कहा जाता है।

     

    विभिन्न राज्यों में पंचायत समितियों के नाम
                        राज्य का नाम  समिति का नाम
        बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, झारखंड     पंचायत समिति
        आन्ध्र प्रदेश      मंडल पंचायत
        तमिलनाडु     पंचायत यूनियन 
        पश्चिम बंगाल     आंचलिक परिषद 
        असम      आंचलिक पंचायत 
        कर्नाटक     पंचायत संघ परिषद्
        मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़     जनपद पंचायत
        अरुणाचल प्रदेश     अंचल समिति
        उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड     क्षेत्र पंचायत

     

    पंचायत समिति की संरचना

     

    जैसा कि हम सभी जानते हैं राज्य सरकारें विकास कार्यों में सुलभता के लिए प्रत्येक जिले को ब्लॉक/खण्डों में बांटती है। इस ब्लॉक को विकास खण्ड भी कहा जाता है। 73वें संविधान संशोधन के अनुसार प्रत्येक विकास खण्ड में पंचायत समिति के गठन का प्रावधान है।

     

    इन विकास खंडों में जनसंख्या के आधार पर पंचायत समिति के सदस्यों की संख्या का निर्धारण किया जाता है। लगभग 5000 की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य को चुनने का प्रावधान है। इन सदस्यों का निर्वाचन  ग्राम पंचायतों के सदस्यों की तरह ही प्रत्यक्ष रूप से जनता करती है। इन्हीं पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक प्रमुख/पंचायत समिति के अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है।

     

    महत्वपूर्ण बिन्दु

    यहाँ यह भी बताना आवश्यक है कि प्रत्येक पंचायत समिति में चुनकर आए हुए सदस्यों के अतिरिक्त उस क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा के सदस्य भी पदेन सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।

     

    पंचायत समिति क्षेत्र के अंतर्गत ब्लॉक के वह क्षेत्र शामिल नहीं होते है, जो किसी नगर निगम, नगरपालिका, अधिसूचित क्षेत्र या कैन्टोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है।

     

    पंचायत समिति की बैठक

     

    पंचायत समिति की साधारण बैठक पंचायती राज अधिनियम के अनुसार दो माह में एक बार बुलाना आवश्यक है। बैठक की सूचना खंड विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति के सभी सदस्यों को 10 दिन पूर्व भेजनी होती है। पंचायत समिति की प्रत्येक बैठक साधारणत: पंचायत समिति के खंड मुख्यालय में की जाती है।

     

    बैठक की कोरमपूर्ति

     

    पंचायत समिति बैठक का कोरम कुल सदस्यों की संख्या के आधे सदस्यों की उपस्थिति से पूरा होगा। बैठक में कोरम पूरा नहीं होने पर बैठक दुबारा बुलाने का प्रावधान है। इस प्रकार दोबारा बुलाई गई बैठक में कुल सदस्यों की संख्या के पाँचवें भाग, अर्थात्  20% की उपस्थिति से कोरम पूरा होने का प्रावधान है। इससे कम विधिमान्य नहीं है। पंचायत समिति की बैठक की अध्यक्षता पंचायत समिति अध्यक्ष और उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष करता है। यदि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों अनुपस्थित हों तो उपस्थित सदस्यों के बीच से एक सदस्य का चयन अध्यक्षता के लिए किया जाता है।

     

    पंचायत समिति के पदाधिकारी

     

    पंचायत समिति के कार्यों के संपादन व संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा कई अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। पंचायत समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को खंड विकास अधिकारी(BDO) कहते हैं। इस पदाधिकारी के नीचे भी कई सहायक विकास अधिकारी होते हैं जो कृषि, सहकारिता, पशुपालन इत्यादि के विशेषज्ञ होते हैं। यहाँ यह भी जिक्र करना आवश्यक है कि पंचायत समिति की बैठकों में संबंधित पदाधिकारियों का उपस्थित रहना अनिवार्य होता है, जो बैठक के संचालन में भी हिस्सा लेते हैं।

     

    पंचायत समिति में आरक्षण

     

    पंचायती राज अधिनियम के अनुसार पंचायत समिति में सदस्यों और अध्यक्ष के पदों पर भी आरक्षण व्यवस्था का प्रावधान है। SC/ST/OBC वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात पर निर्भर करता है। इसके अलावा सभी पदों पर एक तिहाई (33%) सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। वर्तमान समय में कई राज्यों में महिलाओं के लिए यह आरक्षण बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इन राज्यों में पंचायतों का प्रत्येक दूसरा पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। लेकिन, यह आरक्षण प्रणाली चक्रानुक्रम/रोस्टर के अनुसार आवंटित किए जाते हैं।

     

    क्षेत्र पंचायत की आय के स्रोत

     

    क्षेत्र पंचायत की आय के स्रोत शासन द्वारा प्राप्त हाने वाली अनुदान एवं ऋण के रूप में प्राप्त होने वाली धनराशि है। क्षेत्र पंचायत अपने निजि संसाधनों से भी आय अर्जित कर सकती है। जिसमें विभिन्न प्रकार के कर जैसे-इमारतों से आय, बाजार एवं मेलों का आयोजन, प्रदर्शनियां, बाग-बगीचे, शौचालय एवं अन्य सुविधाएं आती हैं।

     

    पंचायत समिति के कार्य एवं दायित्व

     

    पंचायती राज अधिनियम द्वारा पंचायत समिति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दी गई है। विकासखण्ड स्तर पर ग्रामीण जरूरतों के हिसाब से पंचायत समिति योजनाएं बनाती है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का संपूर्ण विकास हो सके।

     

    पंचायत समिति के कार्य एवं दायित्व निम्नलिखित हैं।-

    •  केन्द्र तथा राज्य सरकार एवं जिला परिषद द्वारा सौंपे गए कार्य करना।
    •  सभी ग्राम पंचायत के वार्षिक योजनाओं पर विचार विमर्श  एवं समेकन करना तथा समेकित योजनाओं को जिला परिषद में प्रस्तुत करना।
    •  पंचायत समिति का वार्षिक योजना बजट पेश करना।
    •  कृषि एवं उद्यान की उन्नति एवं विकास करना। 
    •  खेती के उन्नत तरीको का प्रचार प्रसार करना, किसानों  के प्रशिक्षण का इंतजाम  करना।
    •  सरकार के भूमि विकास एवं भूसंरक्षण कार्यकलापों के कार्यान्वयन में सरकार और जिला परिषद की सहायता करना।
    •  लघु सिंचाई कार्यों के निर्माण एवं अनुरक्षण में सरकार और जिला परिषद् की सहायता करना।
    •  गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम एवं स्कीमों का आयोजन और कार्यान्वयन करना।
    •  पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा का विकास एवं विस्तार करना।
    •  खादी ग्राम एवं कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित करना।
    •  ग्रामीण आवास योजनाओं का कार्यान्वयन तथा आवास स्थल का वितरण करना।
    •  ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन, मरम्मत एवं संरक्षण करना।
    •  शिक्षा  के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय भवनों का निर्माण मरम्मत एवं संरक्षण आदि कार्य करना।
    •  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अन्तर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों का संचालित करना।
    •  महिलाओं एवं बच्चो के कार्यक्रम को कार्यान्वयन करना तथा इनके विकास हेतु कार्यक्रम का निर्माण करना।
    •  समाज कल्याण, जिसमें शारीरिक तथा मानसिक रूप से नि:शक्त लोगों के कल्याण हेतु कार्यक्रम तैयार करना तथा सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं को कार्यान्वयन कराना।
    •  कमजोर  वर्गो विशेषकर SC/ST वर्ग के लोगों का  कल्याण हेतु सरकार द्वारा चालायी गई योजनाओं का कार्यान्वयन करना।

     

    पंचायत समिति के अध्यक्ष को पद से हटाने का प्रावधान

    पंचायती राज अधिनियम के अनुसार कार्य न करने पर किसी भी क्षेत्र पंचायत सदस्य, पंचायत समिति के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को विधिसम्मत हटाए जाने का प्रावधान है। प्रक्रिया के अनुसार क्षेत्र पंचायत समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास का प्रस्ताव लाया जा सकता है और उस पर कार्यवाही की जा सकती है। निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के दो तिहाई बहुमत से पंचायत समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को हटाया जा सकता है।

    यदि

    1. अपने कार्यों तथा कर्तव्यों का पालन जानबूझ कर नहीं करता या पालन करने से इंकार करता है।
    2. अपने अधिकारों का दुरूपयोग करता है।
    3. अपने कर्त्तव्यों के पालन में दोषी पाया जाता है।
    4. मानसिक रूप से अपने कर्त्तव्यों के पालन में असमर्थ हो गया है। 

     

    नोट- पंचायती राज अधिनियम के अनुसार 2 वर्ष की अवधि तक पंचायत समिति  या पंचायत समिति के उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।

     

    पंचायत समिति का कार्यकाल

     

    पंचायत समिति का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से 5 सालों तक का होगा। पंचायत समिति के सदस्यों का कार्यकाल यदि किसी खास कारणों से उनके नियत कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाता है तो 6 महीने के भीतर उसका चुनाव कराना जरूरी होगा।

     

    संक्षेप में कहें तो पंचायत समिति विकास खंड स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच एक सम्वन्यक की भूमिका अदा करती है।

     

    त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की अन्तिम कड़ी में हम जिला परिषद अर्थात् जिला पंचायत की विस्तृत चर्चा अगले ब्लॉग- त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, भाग-3(जिला पंचायत)  में करेंगे। 

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