ऑर्किड फार्मा के शेयर ने किया निवेशकों को मालामाल

ऑर्किड फार्मा: 4 महीने में 1 लाख रुपये ऐसे बने 70 लाख रुपये

ऑर्किड फार्मा के शेयर ने बीते 4 महीने में 70 गुना से भी ज़्यादा का रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया है। आइए, जानें ये रोचक कहानी।

16 March 2021

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  • क्या हो अगर रातों-रात आपकी किस्मत आपको ‘फर्श से अर्श’ तक पहुंचा दे? यकीन नहीं होगा ना? लेकिन, दिवालिया हो चुकी ऑर्किड फार्मा के मामले में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। करीब 4 महीने में 70 गुना रिटर्न देकर इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है।

     

    रोज़ लग रहा है अपर सर्किट

     

    इस फार्मा शेयर में रोज़ अपर सर्किट लग रहा है। आपको बता दें कि नवंबर की शुरुआत में ये शेयर महज़ 18 रुपये में मिल रहा था। लेकिन, आज ये 1,277 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इस उछाल से निवेशकों की तो चांदी हो गई है। 

     

    क्या होता है अपर सर्किट?

     

    जब किसी शेयर में सिर्फ खरीदारी होती है और कोई बेचने वाला नहीं होता, तो वो अपर सर्किट पर लॉक हो जाता है। लोग जितने अधिक शेयर खरीदते हैं, शेयर के दाम उतनी ही तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। अलग-अलग शेयरों में सर्किट फिल्टर अलग-अलग होते हैं। 

     

     

    सामान्यतः 5 से लेकर 20 प्रतिशत तक के सर्किट लगते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी शेयर की कीमत 200 रुपये है और अगर उसमें 10 प्रतिशत का अपर सर्किट लगता है, तो वो 220 रुपये पर लॉक हो जाएगा। 

     

    ऐसे बदली किस्मत

     

    आपको जानकर हैरानी होगी कि ये कंपनी पूरी तरह दिवालिया हो चुकी थी। लेकिन, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में जाकर इसकी किस्मत पूरी तरह बदल गई। 

     

    NCLT के रेज़ोल्यूशन प्लान के दौरान धानुका लैब्स ने ऑर्किड फार्मा को खरीद लिया और यहीं से इसकी टर्न अराउंड स्टोरी शुरू हो गई। 3 नवंबर 2020 को इसके शेयर स्टॉक एक्सचेंज में दोबारा लिस्ट हुए और इसके बाद से ही इसमें लगातार तेज़ी देखने को मिल रही है।

     

    कारोबार पर एक नज़र:

     

    कंपनी के कारोबार की बात की जाए, तो साल 2020 की दिसंबर तिमाही में कंपनी को करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। इस दौरान कंपनी के नेट सेल्स में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई थी। 

     

    कंपनी के नेट सेल्स 102.63 करोड़ रुपये थे। यहां बताना ज़रूरी है कि इससे पहले 2019 की दिसंबर तिमाही में भी कंपनी को 34.75 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि, अब धानुका लैब्स के खरीदने के बाद उम्मीद की जा रही है कि ये कंपनी पहले से बेहतर परफॉर्म करेगी।

     

    धानुका लैब की हिस्सेदारी

     

    रेज़ोल्यूशन प्लान के बाद ऑर्किड फार्मा में धानुका लैब की हिस्सेदारी करीब 98.04 प्रतिशत है। बाकी की हिस्सेदारी वित्तीय संस्थानों और रिटेल निवेशकों के पास है। रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी महज़ 0.5 प्रतिशत ही है। शायद यही वजह है कि रिटेल निवेशक इस शेयर पर टूट पड़े हैं।

     

    रुचि सोया और आलोक इंडस्ट्रीज़ ने भी किया था कमाल

     

    यहां बताना ज़रूरी है कि NCLT की प्रक्रिया के बाद रुचि सोया और आलोक इंडस्ट्रीज़ की किस्मत भी कुछ ऐसे ही चमकी थी। रुचि सोया को बाबा रामदेव के पतंजलि समूह ने खरीदा था, जिसके बाद 21 रुपये का ये शेयर 1,529 रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। हालांकि, वर्तमान में ये 719 रुपये पर ट्रेड कर रहा है।

     

    वहीं, आलोक इंडस्ट्रीज़ की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। करीब 3 रुपये के आस-पास ट्रेड करने वाले इस शेयर ने देखते ही देखते लंबी छलांग लगाई और कुछ ही समय में ये 58 रुपये तक पहुंच गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आलोक इंडस्ट्रीज़ को मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने जेएम फाइनेंशियल के साथ मिलकर खरीदा था।

     

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    लेखक- कुंदन भूत 

     

     



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