जानें, क्या हैं इंटरनेट के साइड इफेक्ट्स?

जानें, क्या हैं इंटरनेट के साइड इफेक्ट्स?

इंटरनेट के अनेक लाभ हैं। लेकिन मानव जीवन पर इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। आज इस ब्लॉग में हम उन्हीं पर प्रकाश डालेंगे।

08 January 2021

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  • बधाई हो इंडिया! साल 2020 के अंत तक हमारे देश में करीब 639 मिलियन इंटरनेट यूज़र्स हो गए हैं इसे आप उपलब्धि मानें या कुछ और... लेकिन जिस तेज़ी से इंटरनेट यूज़र्स बढ़ रहे हैं, लगता है इस मामले में कम से कम हम दुनिया का नंबर-1 देश ज़रूर बन जाएंगे। कोरोना संकट ने भले ही देश को सालों पीछे धकेल दिया हो, लेकिन इंटरनेट यूसेज में हमने तगड़ी छलांग लगाई है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो कि एक बड़ा आंकड़ा है। रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि ग्रामीण भारत में इंटरनेट पेनेट्रेशन करीब 45 फीसदी तक बढ़ा है। जबकि शहरी इलाकों में यह महज़ 11 फीसदी ही रहा है।

     

    जैसे-जैसे देश में स्मार्टफोन यूज़र्स की संख्या बढ़ रही है, इंटरनेट यूसेज भी बढ़ रहा है। लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि क्या इस इंटरनेट का उपयोग सही तरीके से हो रहा है? ये सवाल काफी पेचीदा है क्योंकि बीते कुछ समय में इंटरनेट पेनेट्रेशन के साथ-साथ इसके दुरुपयोग और नकारात्मक प्रभावों की बात भी सामने आई है। इसने मानव जीवन को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। वहीं, इसके कुछ अच्छे पहलुओं को छोड़ दिया जाए, तो पता चलता है कि कहीं न कहीं इंटरनेट ने मानव जीवन में एक असंतुलन भी पैदा कर दिया है।

     

    जानें, क्या हैं इंटरनेट के साइड इफेक्ट्स?

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको कुछ ऐसी ही बातों से परिचित कराएंगे। हम आपको बताएंगे कि इंटरनेट ने किस तरह से मानव जीवन को प्रभावित किया है। तो चलिए, आगे बढ़ते हैं और इस विषय पर प्रकाश डालते हैं।

     

    रीयल लाइफ से ज़्यादा वर्चुअल लाइफ को तवज्जो

     

    जब से इंटरनेट डेटा सस्ता हुआ है, ऑनलाइन वक्त बिताने वालों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली है। लोग वास्तविक जीवन से ज़्यादा वक्त अपनी वर्चुअल लाइफ को दे रहे हैं। अब ऐसा प्रतीत होता है जैसे इंसान इंटरनेट को नहीं, बल्कि इंटरनेट इंसानों को चला रहा है। देखा जाए, तो लगभग सभी लोग सोशल नेटवर्किंग ऐप्स पर एक्टिव हैं। बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी के हाथ में स्मार्टफोन हैं और इंटरनेट की बदौलत वो स्मार्टफोन उनकी नई दुनिया बनता जा रहा है। बच्चे प्लेग्राउंड में जाकर गेम्स खेलने की बजाय ऑनलाइन गेमिंग को तवज्जो दे रहे हैं, जिसके चलते उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। वहीं, युवा पीढ़ी भी अपना ज़्यादातर वक्त इंटरनेट पर बिता रही है। लेकिन इस बीच वो ये बात भूल रहे हैं कि सस्ता डेटा और इस 5 इंच की स्क्रीन के बाहर भी एक दुनिया है, जो कि उनका इंतज़ार कर रही है।

     

     

    वर्क-लाइफ बैलेंस में आ रही है कमी

     

    मौजूदा युग प्रतिस्पर्धा का युग है। इस युग में अगर आप एक सेकंड भी पीछे रहते हैं, तो समझो आप पीछे रह गए। यही वजह है कि कई कंपनियां लोगों के पर्सनल स्पेस में भी दखल दे रही हैं। अब लोगों को घर पहुंचकर भी अपने दफ्तर के काम निपटाने पड़ते हैं, जिससे उनकी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में असंतुलन सा पैदा हो चुका है। लिहाज़ा, जो वक्त कर्मचारी को अपने परिवार के साथ बिताना चाहिए, उसे उन्हें अब ऑफिस के काम के लिए डेडिकेट करना पड़ रहा है। इससे लोगों में फ्रस्ट्रेशन बढ़ रहा है और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

     

    साइबर क्राइम में बढ़ोतरी

     

    बीते कुछ वर्षों में इंटरनेट के उपयोग के साथ-साथ साइबर क्राइम की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2019 में FBI ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की थी कि साइबर क्राइम का शिकार होने के मामले में भारतीय दुनिया में तीसरे नंबर पर आते हैं। सच्चाई ये है कि लोग इंटरनेट यूज़ करना तो जानते हैं, लेकिन वो ये नहीं जानते कि सेक्योर्ड तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। हैकर्स इसी बात का फायदा उठाते हैं और लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। यही वजह है कि हैकिंग जैसी चीज़ें आज कल आम सी बात हो गई है। कई बार ऐसी बातें भी सामने आईं कि यूनिवर्सिटीज़ या अन्य संस्थानों की वेबसाइट हैक कर उनके डेटा से छेड़छाड़ की गई। कई मामलों में एग्ज़ाम पेपर्स तक लीक कर दिए गए। वहीं पर्सनल डेटा ब्रीच जैसे मामले में भी इंडिया में लगातार बढ़ रहे हैं।

     

    NCRB की रिपोर्ट भी कुछ इसी ओर इशारा करती है। बीते वर्ष साइबर क्राइम के मामलों में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई। वर्ष 2018 में जहां साइबर क्राइम के 28248 मामले दर्ज किए गए थे, तो वहीं वर्ष 2019 में ये मामले बढ़कर 44546 हो गए। रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि करीब 60 प्रतिशत मामले अकेले फ्रॉड के थे। इसलिए ज़रूरी है कि हम अधिक सजग होकर इंटरनेट का इस्तेमाल करें।

     

    इंटरनेट की लत और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव

     

    आप मानें या ना मानें, लेकिन लोगों को इंटरनेट की लत लग चुकी है। सुबह अपने बिस्तर से उठने से लेकर देर रात अपनी आंखें बंद करने तक वो इंटरनेट सर्फिंग करते रहते हैं। इस एडिक्शन की वजह से उनके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई शोधकर्ताओं का ये मानना है कि इंटरनेट के अत्यधिक इस्तेमाल से डिप्रेशन के मामले बढ़ने लगे हैं। खासकर, युवा व किशोर इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कुछ शोध ये भी बताते हैं कि इंटरनेट की लत किसी नशे की लत की तरह ही है। जब इंसान अत्यधिक इंटरनेट इस्तेमाल करता है तो वो अपने आस-पास घटित हो रही घटनाओं पर भी पूरा ध्यान नहीं दे पाता है। इससे उसका सामाजिक और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है। वहीं उसे कई फिज़िकल हेल्थ प्रॉब्लम्स भी फेस करनी पड़ती है। जानकारों का मानना है कि आपकी बॉडी फंक्शनैलिटी पर भी इंटरनेट का प्रभाव पड़ता है। आपकी आंखें, नर्वस सिस्टम, मसल्स और स्केलटल सिस्टम पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

     

    स्पैम ईमेल विज्ञापनों का खतरा

     

    इन दिनों ईमेल मार्केटिंग ज़ोरों पर है और इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग यूज़र्स का पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं। कई बार यूज़र को बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ता है। आपने देखा होगा कि कई बार हमें ऐसे ईमेल और एसएमएस भी मिलते हैं जिनमें किसी पुरस्कार या धनराशि की बात होती है और कहा जाता है हमें इसका लाभ लेने के लिए कुछ पैसे ट्रांसफर करने होंगे या अकाउंट डीटेल्स देनी होंगी। अकसर यूज़र्स ऐसी ठगी करने वालों के छलावों में आकर या तो उन्हें बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं या फिर अपनी अकाउंट संबंधी सभी जानकारियां प्रदान कर देते हैं। दोनों ही स्थितियों में यूज़र को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त कई बार हमें ऐसी लिंक भी मिलती है जिस पर क्लिक करने के बाद हमारा अकाउंट तक हैक हो जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि आप ऐसे ईमेल स्पैम आदि से बचें।

     

    इंटरनेट का दुरुपयोग कर हो रही समय की बर्बादी

     

    इंटरनेट का आविष्कार लोगों के काम को आसान बनाने के लिए किया गया, लेकिन कई यूज़र्स ऐसे हैं जो इसका सदुपयोग करने की बजाय दुरुपयोग पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। अकसर देखा गया है कि यूज़र्स अपने जीवन का अधिकतर समय इंटरनेट पर गुज़ार देते हैं और उनके पास दूसरे इंपोर्टेंट कामों के लिए पर्याप्त वक्त नहीं बचता। विद्यार्थी जीवन इससे सर्वाधिक प्रभावित होता है। वे पढ़ाई और दूसरी अन्य महत्वपूर्ण बातों से परे इंटरनेट का उपयोग महत्वहीन चीज़ों कि लिए करते हैं। कई बार ये भी देखा गया है कि वो कुछ अनचाहे वीडियोज़ और ऑनलाइन कॉन्टेंट से प्रभावित होकर गलत राह भी पकड़ लेते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सही चीज़ों के लिए किया जाए। यहां पैरेंटल गाइडेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

     

    सोशल बिहेवियर में बदलाव

     

    कई हालिया शोध ये भी बताते हैं कि इंटरनेट से इंसान के सोशल बिहेवियर में भी बदलाव आ रहे हैं। जो शब्द हमने कभी सुने नहीं थे, वो भी अब अस्तित्व में आने लगे हैं। संभवतः हमने पहले कभी साइबर बुलीइंग और साइबर रेसिसम जैसे शब्द नहीं सुने होंगे। लेकिन बीते कुछ समय में ऐसे मामले आए हैं जहां ऑनलाइन माध्यमों के ज़रिए लोगों ने अपना अग्रेसिव बिहेवियर दिखाया है। कई बार ऐसे बर्तावों के चलते सामने वाले पर डर और अकेलेपन जैसी फीलिंग्स भी घर कर जाती हैं और कभी-कभी वो आत्महत्या जैसा बड़ा कदम भी उठा लेते हैं। लिहाज़ा हमें अपने सोशल बिहेवियर को लेकर बहुत ज़्यादा सजग रहने की आवश्यकता है, खासकर तब, जब हम ऑनलइन हों।  

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। इस ब्लॉग में हमने इंटरनेट और उसके उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है। हमने आपको बताया कि इंटरनेट कैसे मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है और इसके नकारात्मक प्रभाव क्या हैं? साथ ही ये भी बताया कि कैसे इंटरनेट हमारे सोशल बिहेवियर यानी सामाजिक आचरण को बदल रहा है।

     

    हम आशा करते हैं कि आप Knitter के साथ यूं ही बने रहेंगे और हमारे अन्य इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स भी पढ़ेंगे।  

     

    आपको बता दें कि Knitter पर आपको एजुकेशन और करियर के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

     

     

    लेखक- कुंदन भूत



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