आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम है ‘हनी मिशन’

80 फीसदी तक मिलेगा अनुदान, जानें हनी मिशन से जुड़ी हर जानकारी

मधुमक्खी पालन कम लागत में ज़्यादा फायदे का बिज़नेस बन चुका है। इस बिज़नेस में राष्ट्रीय हनी मिशन योजना बड़ी भूमिका निभा रही है।

07 February 2021

  • 345 Views
  • 5 Min Read

  • एक ‘अगस्त क्रांति’ इतिहास के पन्नों में दर्ज़ है और दूसरी वर्तमान में रोज़गार की पहचान बन चुकी है। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय हनी मिशन की, जिसकी शुरुआत अगस्त 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वीट क्रांति’ के नाम से की थी।

     

    राष्ट्रीय हनी मिशन की शुरुआत करते वक्त प्रधानमंत्री ने श्वेत क्रांति (दूध से संबंधित) के समान ‘स्वीट क्रांति’ की ज़रूरत को समझाया था। इसके साथ ही बताया था कि कैसे स्वीट क्रांति कम पैसे में युवाओं के लिए ज़्यादा मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है। 

     

    आपको ‘स्वीट क्रांति’ यानी राष्ट्रीय हनी मिशन से जुड़ी हर जानकारी निटर (Knitter) के इस ब्लॉग में मिलेगी। जिससे आप भी मधुमक्खी पालन से जुड़कर अपने भविष्य को संवार सकते हैं।

     

    राष्ट्रीय हनी मिशन 

     

    खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) अपने ‘हनी मिशन’ कार्यक्रम के जरिए बड़े पैमाने पर प्रवासी कामगारों को रोज़गार के मौके उपलब्ध करा रहा है। आयोग की ओर से स्थानीय तौर पर रोज़गार के मौके उपलब्ध कराना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को मधुमक्खी पालन में शामिल करके रोज़गार के अवसर उत्पन्न करना और भारत में शहद उत्पादन को बढ़ावा देना है।

     

     

     

    शहद की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हनी मिशन की शुरुआत की है। जिससे ग्रामीण भारत में रोज़गार के अच्छे अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। इस योजना का संचालन खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के द्वारा किया जाता है। योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए एक लाख से ज़्यादा बक्से दिए गए हैं। इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी का ब्योरा आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके जान सकते हैं।

     

    (https://www.kviconline.gov.in/honeymission/images/hindihoneymissionguidelines.pdf)

     

    हनी मिशन योजना के तहत मधुमक्खी पालन करने वालों को मदद प्रदान की जाती है। आर्थिक सहायता के साथ-साथ युवाओं को वैज्ञानिक रूप से प्रशिक्षित भी किया जाता है। लोन और सब्सिडी की व्यवस्था भी की गई है।

     

    हनी मिशन का लक्ष्य

     

    • शहद का उत्पादन बढ़ेगा
    • रोज़गार बढ़ाने में सफलता मिलेगी
    • किसानों को अतिरिक्त आय अर्जित करने का स्रोत मिलेगा
    • किसानों के अलावा बेरोज़गार युवक भी लोन लेकर व्यवसाय शुरू कर सकते हैं
    • मधुमक्खी पालन के अलावा, मोम और पॉलन का भी व्यवसाय बढ़ेगा

     

    सरकार के मुताबिक, साल 1956 से 2017 तक इस बिज़नेस से लोगों की कमाई और रोज़गार शून्य था। वहीं, साल 2017 से 2020 के बीच में 40,000 रोज़गार का सृजन किया गया है। इसके अलावा 8,600 मीट्रिक टन शहद उत्पादन किया गया है। साथ ही 1.36 लाख मधुमक्खी के बक्से का वितरण किया गया।

     

    लोन/सब्सिडी

     

    योजना के तहत 80% तक अनुदान दिया जा रहा है और केवल 20% धनराशि मधुमक्खी पालक को अपने पास निवेश करना होगा।

    यानी मधुमक्खी पालन के दस बक्से द्वारा नई तकनीक से व्यवसाय शुरू करने में लगभग 35 हज़ार रुपये की लागत आती है। जिसका 80% यानी 28 हज़ार रुपये प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा अनुदान दिया जाएगा। केवल 20% यानी 7 हज़ार रुपये मधुमक्खी पालक को निवेश करना होगा।

    योजना के तहत 65 फीसदी तक का लोन दिया जा सकता है। इसकी जानकारी के लिए आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या अपने जिले उद्यान कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

     

    प्रशिक्षण

     

    मधुमक्खी पालन करते वक्त अगर आप ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो वातावरण, नए-नए उपकरण एवं प्रबंध की जानकारी, उत्पादन के लिए तकनीकी जानकारी का होना बेदह ज़रूरी है। 

    हनी मिशन प्रोजेक्ट के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपने क्षेत्र के खादी ग्रामोद्योग विभाग से संपर्क करना होगा। प्रशिक्षण में सफलता हासिल करने वाले उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट दिया जाता है, जिसके बाद ही वह सरकार द्वारा हनी मिशन योजना के अंतर्गत सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।

    विभाग द्वारा चलाए जा रहे ट्रेनिंग कोर्स में 5 दिन से 9 महीने तक के कोर्स उपलब्ध हैं। जिनकी ज़्यादा जानकारी आप नीचे दिए लिंक से सकते हैं।

     

    (http://www.kvic.gov.in/kvicres/newhm/hmkviccourses.html

    https://www.kviconline.gov.in/honeymission/report/ho_rep.jsp?REPNAME=MisTrainingCenterlist

    https://www.kviconline.gov.in/honeymission/report/ho_rep.jsp?REPNAME=MisTrainerlist)

     

    यहां मिलेगी जानकारी

     

    मधुमक्खी पालन के लिए अलग-अलग राज्यों में प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसकी जानकारी आप जिला बागवानी अधिकारी राज्य सरकार के निदेशक, बागवानी प्रबंधक निदेशक, राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, बी विंग, दूसरी मंज़िल, जनपथ भवन, जनपथ रोड, नई दिल्ली, फोन नं. 011–23325265 पर ले सकते हैं।

     

    योग्यता

     

    मधुमक्खी पालन से जुड़ने के लिए कई तरह के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स किए जा सकते हैं। डिप्लोमा के लिए अभ्यर्थी के लिए साइंस स्ट्रीम से स्नातक होना ज़रूरी है। हॉबी कोर्स के लिए किसी विशेष योग्यता की ज़रूरत नहीं होती है। प्रशिक्षण के लिए एक हफ्ते से लेकर 9 महीने तक का कोर्स उपलब्ध है। प्रशिक्षण शुल्क फीस 500 से लेकर 4,000 रुपए तक है।

     

     

     

    हम आशा करते हैं कि मधुमक्खी पालन पर हमारा यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। यदि आप हमारे अन्य ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं, तो आप Knitter पर जाकर उन्हें पढ़ सकते हैं। 

     

    लेखक- नितिन गुप्ता 


     



    यह भी पढ़ें



    कृषि की अन्य ब्लॉग