मशरूम की खेती: मुनाफा ज़्यादा, निवेश कम

मशरूम उगाकर आमदनी को बढ़ाएं, यहां मिलेगी हर जानकारी

अगर आप किसान हैं और ज़्यादा मुनाफे की खेती करना चाहते हैं, तो मशरूम आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें आप खेत के बिना भी खेती कर सकते हैं।

09 February 2021

  • 774 Views
  • 4 Min Read

  • छतरी के आकार की दिखने वाली मशरूम की फसल आज ज़्यादा मुनाफे की पहचान बन चुकी है। मशरूम में जहां प्रोटीन की ज़्यादा मात्रा होती है, वहीं ये औषधीय गुणों से भरपूर है। अपने गुणों के कारण ही आज बाज़ारों में इसकी चमक साफ देखी जा सकती है। प्राचीन काल से ही मशरूम को एक खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है। 

     

    ऋग्वेद में भी मशरूम की खेती (Mushroom ki kheti) का उल्लेख है। पिछले कुछ वर्षों में बाज़ार में मशरूम की मांग तेज़ी से बढ़ी है। हालांकि, जिस हिसाब से बाज़ार में मशरूम की मांग है, उस हिसाब से उत्पादन नहीं हो रहा है, ऐसे में किसानों के लिए मशरूम की खेती मुनाफे वाला कृषि व्यवसाय है।

     

    तो आइए, इस ब्लॉग के ज़रिए मशरूम की खेती पर प्रकाश डालते हैं। लेकिन, उससे पहले संक्षेप में यह जान लेते हैं कि मशरूम है क्या?

     

    मशरूम क्या है?

     

    मशरूम एक प्रकार का कवक है, जिसे फफूंद भी कहते हैं। प्रकृति में हज़ारों प्रकार के मशरूम पाए जाते हैं, इनमें कई तो ज़हरीले भी होते हैं। मशरूम में अधिक मात्रा में प्रोटीन एवं पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जैसे कि विटामिन डी। यह फफूंद से बनता है और इसके आकार के बारे में कहा जाए  तो लगभग एक छत्ते के आकार का होता है।

     

    ग्लोबल मार्केट में  मशरूम 

     

    मशरूम का निर्यात पूरे विश्व में किया जाता है। हर साल करीब 20 लाख टन मशरूम निर्यात होता है, जिसमें भारत का हिस्सा महज़ 2400 टन है। विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए इसका महत्व ज़्यादा है। संसार में 15 बिलियन डॉलर का मशरूम खाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। जबकि 3 बिलियन डॉलर औषधि के लिए।

     

    मशरूम की खेती: मुनाफा ज़्यादा, निवेश  कम

     

    मशरूम के प्रकार

     

    हमारे देश में मुख्यतः चार प्रकार के मशरूम की खेती  है। 

     

    • बटन मशरूम 
    • ढिंगरी मशरूम 
    • मिल्की मशरूम 
    • पुआल मशरूम 

     

    1- सफेद बटन मशरूम

     

    सफेद बटन मशरूम को पहले निम्न तापमान वाली जगहों पर उगाया जाता था, लेकिन नई तकनीकोंं से इस खेती को कई जगह पर किया जाने लगा है। इसे कमरे, शेड, झोपड़ी में आसानी से उगाया जा सकता है। भारत में इसके कवक जाल के फैलाव के लिए 22-26 डिग्री तापमान की ज़रूरत होती है। बाद में 14-18 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त होता है। 

     

    बटन मशरूम उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है। इन छ: महीनों में बटन मशरूम की दो फसलें उगाई जा सकती हैं। मशरूम की खेती के लिए कंपोस्‍ट खाद की ज़रूरत होती है, इसके लिए धान की पुआल का भी उपयोग किया जाता है।

     

    2- ढींगरी मशरूम

     

    इसका आकार सीप जैसा होता है, इसलिए इसे ऑयस्टर कहा जाता है। इस मशरूम की खेती को साल भर किया जा सकता है। ढींगरी मशरूम (oyster mushroom)

    के लिए तापमान 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए। आद्रता 70-90 प्रतिशत होनी चाहिए। 

     

    इसे उगाने के लिए गेहूं और धान के भूसे दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। ढिंगरी को किसी भी प्रकार के बेकार पड़े अवशेष जैसे- पुआल, भूसे या पत्तों पर आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी खेती मात्र 40 से 50 दिन में हो जाती है। 

     

     3- मिल्की मशरूम

     

    मिल्की मशरूम की खेती के फैलान के लिए 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की ज़रूरत होती है। फलन के लिए 30 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान चाहिए होता है। इसे ग्रीष्मकालीन मशरूम के रूप में जाना जाता है, इसका आकार बड़ा और आकर्षक होता है। यह पैडीस्ट्रा मशरूम की तरह एक उष्णकटिबंधीय मशरूम है। मार्च से अक्तूबर तक जलवायु मिल्की मशरूम (milky mushroom) की खेती के लिए उपयुक्त होती है।

     

     4- पुआल मशरूम

     

    पुआल मशरूम (straw Mushroom) को चाइईनीज मशरूम या ‘गर्म मशरूम’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ये सापेक्षतः उच्च तापमान पर उगती है। इसके फैलान के लिए 32 से 34 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान उपयुक्त होता है। 

     

    यह तेज़ी से उगने वाली मशरूम है तथा अनुकूल उत्पादन परिस्थितियों में इसका एक फसल चक्र 4 से 5 सप्ताह में पूर्ण हो जाता है। इस मशरूम के उत्पादन के लिए विभिन्न प्रकार के सेलुलोज युक्त पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है तथा इन पदार्थों में कार्बन व नाइट्रोजन के 40 से 60:1 अनुपात की आवश्यकता होती है, जो अन्य मशरूमों के उत्पादन की तुलना मे बहुत ज़्यादा है। 

     

    उत्पादन की तैयारी

     

    मशरूम को उगाने के लिए शेड/झोपड़ी/कमरे को तैयार करना होता है। जिनके पास धन की कमी है, वह बांस और धान की पुआल से बने अस्थाई शेड/झोपड़ी का प्रयोग कर सकते हैं। बांस व धान की पराली से 30 Χ22Χ12 (लम्बाई Χचौड़ाई Χऊंचाई) फीट आकार के शेड/झोपड़ी बना सकते हैं। इसमें मशरूम उगाने के लिए 4 Χ25 फीट आकार की 12 से 16 स्लैब तैयार की जा सकती हैं।

     

    नमी एवं तापमान पर नियंत्रण 

     

    मशरूम की फसल को अच्छे से उगाने के लिए करीब 20 से 30 डिग्री का तापमान ही ठीक रहता है। नमी पर नियंत्रण करने के लिए आपको कभी-कभी दीवारों पर पानी का छिड़काव करना होगा, ध्यान रहे नमी लगभग 70 डिग्री तक होनी चाहिए, इसके बाद आपको कमरे के तापमान पर भी ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।

     

    ऐसे करें अच्छी खाद तैयार

     

    अच्छी खाद तैयार करने के लिए गेहूं और धान के भूसे का इस्तेमाल करें। किसान ध्यान रखें कि भूसे को कीटाणु रहित बनाना बेहद ज़रूरी है। भूसे को कीटाणु मुक्त बनाने के लिए करीब 1500 लीटर पानी में 1.5 किलो फार्मलीन एवं 150 ग्राम बेबिस्टीन मिलाना होता है। इसमें दोनों रसायन या कीटनाशकों को एक साथ मिलाना होता है। इसके बाद इस पानी में 1 क्विंटल, 50 किलो गेहूं का भूसा डालकर अच्छे से मिला लेना होता है। उसके बाद इसे कुछ समय के लिए ढक दें। कुछ समय बाद ये तैयार हो जाएगी।

     

    अच्छी खाद की पहचान

    • कम्पोस्ट खाद गहरे भूरे रंग की दिखेगी
    • खाद में नमी की मात्रा 60-65 प्रतिशत 
    • नाइट्रोजन की मात्रा लगभग 1.75-2.25 प्रतिशत
    • अमोनिया गैस की बदबू रहित हो
    • खाद कीट एवं रोगाणु रहित होनी चाहिए
    • खाद का पीएच मान 7.2-7.8 के बीच होना चाहिए

     

    मशरूम की बुवाई 

     

    खाद तैयार होने के बाद भूसे को हवा में बाहर कहीं अच्छे से फैला लें।16 बाय 18 का एक पॉलिथीन बैग लेकर इसमें परतों के हिसाब से बुवाई करते हैं, जैसे कि पहले भूसा उसके ऊपर बीज और इसी तरह से 3-4 परतें बना लेते हैं। ध्यान रहे पॉलीथीन के नीचे दोनों कोने पर छेद हो, जिससे पानी निकल सके। बैग को इस तरह बांधे कि उसमें हवा न जा सके। इसके बीज या भूसे का अनुपात हर एक परत में बराबर होना आवश्यक है। हालांकि, ये मिल्की मशरूम में ही की जाती है। जबकि ऑरेस्टर मशरूम में मिक्स करने की तकनीकी का इस्तेमाल होता है। इस पैकेट में कुछ छोटे-छोटे छेद कर दिए जाते है। जिससे मशरूम के पौधे बाहर निकल सकें।

     

    मशरूम बीज की कीमत  

     

    बीज की बात करें तो करीब 75 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आप इसे बाज़ार से खरीद सकते हैं। ब्रांड और किस्म के मुताबिक, थोड़ा बहुत अंतर भी आ सकता है। इसलिए ये ज़रूरी है कि आप पहले यह तय करें कि कौन सा मशरूम उगाना चाहते हैं।

     

    प्रशिक्षण के लिए यहां जाएं

     

    किसानों के लिए मशरूम की खेती करना काफी आसान है। इसके लिए आप देशभर के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों व कृषि अनुसंधान केंद्रों में एक से दो हफ्ते या एक महीने का फ्री प्रशिक्षण ले सकते हैं।

     

    ये हैं कुछ चुनिंदा संस्थान:

     

    जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंत नगर, उत्तराखंड

    वेबसाइट: www.gbpuat.ac.in

     

    आणंद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, आणंद, गुजरात

    वेबसाइट: www.aau.in

     

    पादप रोग संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली

    वेबसाइट: www.iari.res.in

     

    राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर, बिहार,

    वेबसाइट: www.pusavarsity.org.in

     

    राष्ट्रीय खुंब अनुसंधान केंद्र, चम्बाघाट, सोलन, हिमाचल प्रदेश https://dmrsolan.icar.gov.in/nrcmushroomhindi/index.html

     

    हिसार कृषि अनुसंधान, हिसार, हरियाणा https://icar.org.in/hi

     

    आप अपने जिले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से भी संपर्क कर सकते हैं। 

     

    हम आशा करते हैं कि मशरूम की खेती पर हमारा यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। यदि आप हमारे अन्य ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं, तो आप Knitter पर जाकर उन्हें पढ़ सकते हैं। 

     

     

    लेखक- नितिन गुप्ता

     

    कृषि की अन्य ब्लॉग