कम ज़मीन पर ज़्यादा उत्पादन के लिए अपनाएं मल्टीलेयर फार्मिंग

कम ज़मीन पर ज़्यादा उत्पादन के लिए अपनाएं मल्टीलेयर फार्मिंग

मल्टीलेयर फार्मिंग में कम लागत में किसान ज़्यादा पैसे कमा सकते हैं। इसमें एक साथ चार फसलें उगाई जाती हैं, जिससे खाद-पानी की बचत होती है।

14 January 2021

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  • क्या आप भी थोड़ी ज़मीन और कम लागत में एक साथ चार फसलें उगाना चाहते हैं? जी हां! ये सब संभव हो सकता है मल्टीलेयर फार्मिंग से। इससे आपको एक फसल की मेहनत में चार फसलों का उत्पादन मिल सकता है। बीते कुछ सालों में मल्टीलेयर फार्मिंग खेती में मुनाफा बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका सिद्ध हुई है, जिसे अपनाकर देश के कई किसान बहुत अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस ब्लॉग में हम खेती के इस तरीके पर विस्तार से बात करने वाले हैं ताकि आप भी इसका फायदा उठा सकें।

     

    क्या है मल्टीलेयर फार्मिंग?

     

    मल्टीलेयर फार्मिंग यानी बहुस्तरीय खेती में चार से पांच फसलें एक साथ ली जाती हैं। ये फसलें मिट्टी के नीचे अलग-अलग लेवल से पोषण लेती हैं और ज़मीन के ऊपर भी उनकी ऊंचाई अलग होती है। ये फसलें एक-दूसरे के पोषण की ज़रूरतों को पूरा करती हैं। खरपतवार और कीटों की समस्या से भी जैविक तरीके से छुटकारा मिलता है, जिससे कम लागत में किसान अच्छा मुनाफा कमा पाते हैं।

     

    मल्टीलेयर फार्मिंग के लाभ

    • कम ज़मीन में ज़्यादा उत्पादन।
    • एक साथ ले सकते हैं कई फसलें।
    • पानी की 70 फीसदी तक की बचत होती है।
    • निराई-गुड़ाई की मेहनत बच जाती है।
    • कीट-पतंगों का प्रकोप कम होता है।
    • खरपतवार नहीं उगते।
    • खाद कम लगती है।

     

    कैसे की जाती है मल्टीलेयर फार्मिंग?

     

    मल्टीलेयर फार्मिंग को साधारण शब्दों में समझने की कोशिश करें तो इसमें जैविक तरीके से ज़मीन की हर परत पर मौजूद पानी और पोषक तत्वों का लाभ उठाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए एक साथ चार से पांच तरह की फसलें एक साथ उगाई जाती हैं, जिनकी जड़ें ज़मीन के अलग-अलग हिस्से से पानी और पोषण लेती हैं। वहीं ज़मीन के ऊपर भी ये फसलें अलग-अलग समय में अलग-अलग ऊंचाई तक बढ़ती हैं और एक-दूसरे को पोषित करने के साथ-साथ कीटों और खरपतवारों से भी बचाती हैं। इसमें चार फसलों के लिए एक फसल जितनी ही खाद लगती है साथ ही फसलों को एक-दूसरे से भी पोषण मिलता है।

     

    कम ज़मीन पर ज़्यादा उत्पादन के लिए अपनाएं मल्टीलेयर फार्मिंग

     

    क्या-क्या उगाया जा सकता है?

     

    मल्टीलेयर खेती में ज़मीन की अलग-अलग परत(लेयर) पर उगने वाली फसलों को उगाया जाता है। यहां  हम चार लेयर में होने वाली खेती के बारे में समझने की कोशिश करेंगे।

    पहली लेयर-

    जमीन को खोदने के बाद सबसे पहले ज़मीन के नीचे  2 इंच की गहराई तक उगने वाली फसल जैसे अदरक या हल्दी की बिजाई की जाती है।

    दूसरी लेयर-

    इसमें सतह के ऊपर एक-दो फुट तक उगने वाली मौसमी साग-सब्जियां बीजी जाती हैं जैसे- मेथी, पालक, चौलाई इत्यादि। इन फसलों को तैयार होने पर जड़ सहित उखाड़ा जाता है, जिससे मिट्टी हल्की होती रहती है और गुड़ाई करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

    तीसरी लेयर-

    इसमें बेलों में उगने वाली फसलें उगाई जाती हैं जैसे- करेला, परवल, कद्दू, ककड़ी आदि। इसके लिए बांस के डंडे खेतों में खड़े किए जाते हैं। जिसके आसपास इसकी बुवाई की जाती है।

    चौथी लेयर-

    चौथी लेयर में फलदार पौधे रोपे जाते हैं, जिनकी जड़ें तीन फीट से भी ज्यादा गहरी होती है और लंबाई 4-5 फीट से ज्यादा। इसमें पपीता, नींबू, अमरूद, आडू, नाशपाती, आम, लीची समेत अन्य पौधे क्रमबद्ध तरीके से रोपे जा सकते हैं।

     

    कैसे तैयार करें खेत?

     

    इसके लिए जैविक तरीके से पॉली हॉउस जैसा स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है। इसमें बांस के डंडों और घास का इस्तेमाल किया जाता है। 5-6 फीट की दूरी पर 6-7 फीट लंबे बांस के डंडे गाड़े जाते हैं, जिन्हें ऊपर से तारों से बुना जाता है। तार के जाल के ऊपर घास डालने के बाद उसके ऊपर लकड़ियां डाली जाती हैं, ताकि घास उड़े ना।

     

    इसका फायदा ये होता है कि सीधी धूप ज़मीन की सतह तक नहीं पहुंचती, जिससे नमी बनी रहती है और वहीं फसलों को ज़रूरी धूप और बारिश का पानी भी मिलता रहता है। इसके साथ ही खेतों को चारों तरफ से 4 से 5 से फीट तक कपड़े से ढका जाता है, जिससे कीट-पतंगे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं।

     

    कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, मल्टीलेयर फार्मिंग से लागत में करीब 4 गुना तक कमी आती है और उत्पादन 7 से 8 गुना तक बढ़ जाता है। एक साथ कई फसलें उगाने से खाद और पानी की बचत तो होती ही है। साथ ही फसलों से एक-दूसरे को भी पोषक तत्व भी मिलते हैं। 

     

    मल्टीलेयर फार्मिंग अपनाने के लिए आप अपने-अपने इलाकों की जलवायु के हिसाब से अलग-अलग फसलें उगा सकते हैं। हालांकि इसका सिद्धांत यही रहे कि फसल जड़ों की गहराई और पौधे की ऊंचाई के हिसाब से तय की जाएं। एक गहराई और एक ऊंचाई तक उगने वाली फसलों को एक साथ नहीं उगाया जा सकता।

     

    उम्मीद है मल्टीलेयर फार्मिंग का तरीका आपको समझ में आने के साथ-साथ पसंद भी आया होगा। आप इसको अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं और जानकारी को दूसरों के साथ भी शेयर कर सकते हैं। हमारे चैनल पर आप खेती और किसानों से संबंधी और भी ब्लॉग पढ़ सकते हैं।

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