कृषि के सभी चरण में है कृषि मशीनरी का महत्व

जानें, खेती में उपयोग होने वाली खास 15 मशीनें

आधुनिकीकरण के इस दौर में किसानों के लिए खेती करना अब काफी आसान हो गया है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे मशीनीकरण के विकास से खेती का स्वरूप बदल रहा है।

21 September 2020

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  • आप हमारे ब्लॉग नए लोगों के लिए भी खेती करना है आसान, जानें कृषि के विभिन्न चरण में पढ़ा, कि कृषि में हाथ आजमा रहे नए लोगों को खेती के सभी चरण को जानना क्यों जरूरी है।

     

    हम इस ब्लॉग में कृषि के विभिन्न चरणों में मशीनीकरण (Mechanization in various stages of agriculture) और उसके लाभ के बारे में जानेंगे। जिससे नए किसान को खेती में प्रयुक्त होने वाले मशीनों को जानने में काफी मदद मिलेगी।

     

    आधुनिक तकनीकी के दौर में आज खेती-किसानी भी मशीनों से दूर नहीं है। खेती के लिए जुताई करना हो या कटाई सभी प्रकार के कृषि कार्यों में मशीनों का प्रयोग होने लगा है। तकनीकी और प्रौद्योगिकी के विकास ने आज खेती के स्वरूप को बदल के रख दिया है।

     

    आइए जानें, कृषि के विभिन्न चरणों में प्रयुक्त कृषि मशीनें(agriculture equipment)

     

    कृषि के विभिन्न चरण और कृषि मशीनरी

     

    भूमि की तैयारी में प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Agricultural machinery used in land preparation)

     

    ट्रैक्टर (Tractor)

    किसानों के लिए ट्रैक्टर का आविष्कार किसी वरदान से कम नहीं है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, ट्रैक्टर खेती में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली मशीन है। ट्रैक्टर का उपयोग खेत की जुताई से लेकर अनाज के भंडारण तक में किया जाता है। 

     

    कल्टीवेटर (Cultivator)

    कल्टीवेटर का प्रयोग जुताई के बाद खेत में ढेलों को तोड़ने, मिट्टी को भुरभुरी करने और खेत में सूखी घास और जड़ों को ऊपर लाने के लिए करते है। इस मशीन का प्रयोग कतार युक्त फसलों में निराई हेतु भी किया जा सकता है। 

     

    पडलर (Padler)

    पडलर का उपयोग प्रायः खेतों की मचाई(गीली जुताई) के लिए किया जाता है। जो कि धान की फसल में रोपाई पद्धति के लिए आवश्यक होती हैं। उन्नत पडलर का उपयोग खरपतवारों को नष्ट करने, पानी का जमीन के अंदर ज्यादा रिसने को कम करने एवं धान के पौधों की रोपाई हेतु उपयुक्त परिस्थिति बनाने के लिए भी किया जाता है।

     

    बीजों की बुआई/रोपाई में प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Agricultural machinery used in sowing / transplanting of seeds)

     

    बुआई मशीन(ड्रिल) Sowing machine

    इस उपकरण का प्रयोग बीजों की एक समान बुआई के लिए किया जाता है। इस मशीन से  3-4 कतारों में एक साथ बुआई की जा सकती है।

     

    इसके अलावा इस मशीन से बीज की बुआई के साथ-साथ खाद एवं उर्वरक दोनों को आवश्यकतानुसार निर्धारित मात्रा में गिराए जा सकते हैं।

     

    प्लांटर (Planter)

    प्लांटर का भी प्रयोग बुआई मशीन(ड्रिल) की तरह बीजों को प्राय: एक निश्चित बीज की दूरी पर पंक्तियों में बुआई हेतु किया जाता है। 

     

    लेकिन इसमें अलग-अलग फसल के बीजों के लिए अलग-अलग प्लेटों का प्रयोग किया जाता है।

     

    रोपाई मशीन (Transplanting machine)

    इस मशीन ने धान या अन्य फ़सलों को रोपने की प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है। इसके तीन भाग होते हैं।

    (1) धान के पौधों को पकड़ने वाली चिमटी, (2)धान को सीधा रखने वाला बॉक्स और (3)इस बॉक्स को सहारा देने  वाली चौखटा। 

     

    बॉक्स में पौधे रख दिए जाते हैं। बॉक्स में नली रहती है, जिसके सहारे से पौधे की रोपाई  की जाती है।

     

    फर्टिलाईजर ड्रिल (Fertilizer drill)

    इस मशीन का उपयोग मेड़ों पर बीज बुआई के लिए किया जाता है। फर्टिलाईजर ड्रिल सामान्य रूप से सीड-फर्टिलाईजर ड्रिल होती है, जिसका किसान, आमतौर पर बीज और उर्वरक डालने के लिए उपयोग करते हैं। इस मशीन का प्रयोग करने से बीजों का अंकुरण अच्छा होता है।

     

    सिंचाई में प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Agricultural machinery used in irrigation)

     

    ट्यूबवेल (Tube Well)

    भारत में नहरों के बाद तालाब और कुँआ सिंचाई का प्रमुख साधन है लेकिन इसके लिए किसानों को मशीनों की जरूरत पड़ती है। जिसमें नलकूप महत्वपूर्ण साधन है।

    नलकूप (ट्यूबवेल) मशीन-चालित पंप होता है जिसे लगाकर कुँआ से पानी निकाला जाता है।

     

    पंपिंगसेट/मोटर पंप (Pumpingset / motor pump)

    पंपिगसेट भी एक तरह की ट्यूबवेल मशीन होती है जिसे चलाने के लिए डीजल या पेट्रोल की जरूरत होती है। लेकिन यह मशीन किसानों के लिए मंहगी होती है क्योंकि डीजल और पेट्रोल के दाम किसानों के सामर्थ्य से दूर होता है। 

     

    आजकल अधिक नीचे से पानी निकालने के लिए पंपिंगसेट मशीन की स्थान पर अधिक पावर वाले मोटर पंपों की जरूरत होती है। जिसमें समरसेबल ही अधिक उपयुक्त मोटर पंप है जो काफी गहराई से पानी निकालने में सक्षम है। 

     

    उर्वरक और दवाओं के छिड़काव के लिए प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Agricultural machinery used for spraying fertilizers and medicines)

     

    उर्वरक स्प्रेयर (Fertilizer sprayer)

    यह फसलों पर दवा या उर्वरक छिड़काव करने की सरल मशीन है। इस मशीन को पीठ पर लादकर हाथ की सहायता से, दवाओं का एक समान रूप से छिड़काव किया जाता है। 

     

    फर्टीलाइजर ब्रार्डकास्टर (Fertilizer bardcaster)

    इस मशीन को किसानों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस मशीन का उपयोग कर, किसानों को अब हाथ से यूरिया का छिड़काव नहीं करना पड़ता है। इस मशीन की सहायता से किसान पूरे खेत में एक समान मात्रा में यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का छिड़काव आसानी से कर सकते हैं। 

     

    निराई-गुड़ाई प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Weeding-Used Agricultural Machinery)

     

    पम्परागत मशीनें (Conventional machines)

    फ़सलों की निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार निकालने के लिए पम्परागत विधि ही सुविधाजनक है। फसलों से हाथ द्वारा खरपतवार निकालना तो अच्छा होता है लेकिन इसमें बहुत अधिक समय और श्रम की जरूरत होती है।

     

    इन कार्यों के लिए अब आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है। जिसमें खुर्पी, कुदाल, इत्यादि प्रमुख हैं। 

     

    कोनो वीडर (Cono Weeder)

    कोनो वीडर धान की फसल से खरपतवार निकालने की उपयुक्त मशीन है। कोनो वीडर में दो रोटर, फ्लोट, फ्रेम और एक हैंडल लगा होता है। इस मशीन से निराई-गुड़ाई करना पंपरागत मशीनों से काफी आसान होता है। इसके प्रयोग से किसानों को  60-70 प्रतिशत मज़दूरी की बचत हो जाती है।

     

    फसल की कटाई में प्रयुक्त कृषि मशीनरी (Agricultural Machinery Used in Harvesting)

     

    हँसिया/दरांती(Sickle)

    दरांती हाथ से पकड़कर फसल एवं घास आदि काटने के काम आने वाली एक सरल कृषि उपकरण है। इसे हँसिया के नाम से भी जाना जाता है। इसे सब्जियों, अनाज फसलों, घास को काटने और अन्य वनस्पतियों की कटाई के लिए प्रयोग किया जाता है।

     

    हँसिया की आकृति अर्धचंद्राकार होती है। कुछ ऐसी हँसिया होती हैं जिनमें दाँतें बने रहते हैं और कुछ बिना दाँतों की बनी होती है। दाँतेदार हँसियों की कार्यक्षमता बिना दाँतों की हँसियों से अधिक होती है।

     

    रीपर(Reaper)

    यह अनाज वाली फसलों को काटने के काम आती है। यह मशीन धान-गेहूँ जैसी खड़ी फसलों को काटने लिए सबसे छोटी और सरल मशीन है। 

     

    यह मशीन जमीन से 5-8 सेंटीमीटर उपर तक की कटाई करती है। आपको बता दें कि इस मशीन से एक घंटे में लगभग एक एकड़ फसल की कटाई हो जाती है। जिससे किसानों को मजदूर और समय की काफी बचत होती है। 

     

    थ्रेसर(Thresher)

    यह थ्रेसर प्रायः चारा काटने की मशीन एवं बीटर टाइप थ्रेसर का संयुक्त रूप होती है। यह मशीन अनाज को भूसे से अलग करती है।  इस मशीन का उपयोग गेहूं, धान ज्वार, चना, मक्का, सोयाबीन, अरहर, सूर्यमुखी की गहाई(थ्रेसिंग) के लिया किया जाता है। 

     

    कम्बाइन हार्वेस्टर(Combine harvester)

    कम्बाइन हार्वेस्टर थ्रेसर से बड़ी मशीन होती है जो फसलों की कटाई के साथ-साथ मड़ाई का भी काम करती है। इसमें कई भाग होते हैं जैसे- हेडर यूनिट, मड़ाई यूनिट, सेपरेशन यूनिट एवं कलेक्शन यूनिट इत्यादि। इस मशीन से एक बार में ही फसल की कटाई, मड़ाई, ओसाई, सफाई हो जाती है। 

     

    संक्षेप में कहें तो कृषि मशीनीकरण उत्‍पादन बढ़ाने, समय की बचत, श्रम को कम करने और कृषि लागत घटाने में मदद करती है। इन सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरुरी है, किसानों के पास आधुनिक कृषि मशीनें हो, जिसकी भारत में भारी कमी है।

     

    अतः आधुनिक और टिकाऊ मशीनीकरण के लिए सरकार और कृषि मशीनें बनाने वाली कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए। जिससे किसानों को मशीनों की जरूरतें आसानी और कम दाम में उपलब्ध हो सकें। 

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