समानता के अधिकार ने दिलाई शादीशुदा बेटी को राहत, जानें कैसे?

अब शादीशुदा बेटी को भी मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति

अब शादीशुदा बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। यह मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा है। जानिए पूरा मामला।

23 March 2021

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  • मध्य प्रदेश की जबलपुर हाई कोर्ट ने 15 मार्च, 2021 को अपने फैसले में कहा कि अगर किसी शासकीय कर्मचारी की मौत हो जाए और उसके आश्रितों में बेटा न हो तो नौकरी के लिए बेटी भी आवेदन कर सकती है। फिर वह शादीशुदा हो या कुंवारी। शादीशुदा बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति पाने की हकदार है। कोर्ट के इस फैसले को मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। 

     

    क्या है मामला?

     

    मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट में सतना की रहने वाली प्रीति सिंह ने जनहित याचिका लगाई थी। वकील अनिरुद्ध पांडे ने उनकी ओर से दलीलें रखीं। याचिका के मुताबिक, प्रीति सिंह की मां मोहिनी सिंह कोलगवां पुलिस स्टेशन, सतना में ASI के पद पर तैनात थीं। 

     

    समानता के अधिकार ने दिलाई शादीशुदा बेटी को राहत, जानें कैसे?

     

    उनकी मौत 23 अक्टूबर, 2014 की सुबह नौकरी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में हो गई थी। इसके बाद उनकी बेटी प्रीति सिंह ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था, जिसे भोपाल पुलिस हेडक्वॉर्टर ने निरस्त कर दिया था। इसमें कहा गया था कि शादीशुदा बेटी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार नहीं है।

     

    बेटियों के लिए मिसाल बनेगा फैसला

     

    इस मामले की सुनवाई जज संजय द्विवेदी के सामने हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल-14 में समानता का अधिकार शामिल है। अनुकंपा नियुक्ति के मामले में भी भेदभाव नहीं किया जा सकता। जब शादीशुदा बेटा अनुकंपा नियुक्ति पा सकता है, तो बेटी क्यों नहीं?

     

    कोर्ट ने इन दलीलों पर सहमति जताई। शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को शादीशुदा होने के बावजूद अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।

     

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    लेखक- हिमांशु दुबे




     

     



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