घर पर पुलिस आ जाए तो क्या होगा कानून और आपके अधिकार

जब पुलिस आपके घर आएः जानें, कानून और आपके अधिकार

यदि पुलिस किसी को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह CRPC (भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता) का उल्लंघन है।

06 February 2021

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  • राम-राम जी। क्या हाल? सब खैरियत। एक बात बताइए। कभी आपके घर पुलिस (Police) आई है? नहीं। लेकिन, कभी सोचा कि अगर आ ही गई तो फिर क्या करेंगे? रुकिए। घबराइए मत।आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपके लिए ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब लेकर आए हैं। ताकि आप या कोई आपका अपना ऐसी किसी मुसीबत में फंसे तो समस्या का हल चुटकी में मिल जाए।

     

    सबसे पहले, कानून क्या है?

     

    समाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए बनाए गए नियमों की व्यवस्था का नाम कानून है। इन्हीं के आधार पर राज्य और उसकी जनता के बीच एक बेहतर संबंध बनता है। वकील, कोर्ट, पुलिस (Police), कचहरी जैसे शब्द तो आपने सुने ही होंगे, इन सभी का काम जिनके आदेश से चलता है, उसे कानून (law) कहते हैं।

     

    कानून के स्रोत क्या हैं?

     

    भारत का संविधान कानून का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। कानून का कोई भी स्रोत इसका उल्लंघन नहीं कर सकता है। संसद और राज्य विधायिका भी कानून का स्रोत हैं। संसद देश के लिए कानून बनाती है जबकि राज्य विधायिका राज्य के लिए कानून बनाती है। केंद्र और राज्यों में शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। न्यायिक फैसले सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के द्वारा किए जाते हैं। ये भी कानून के स्रोत हैं।

     

    संविधान की क्या भूमिका?

     

    भारतीय संविधान ने नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार भी दिए हैं। अगर पुलिस किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी ढंग से गिरफ्तार कर लेती है तो यह संविधान के अनुच्छेद 20, 21 और 22 में मिले इन अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह निश्चित रूप से CRPC (भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता) का उल्लंघन है।

     

    नागरिक और मौलिक अधिकार

     

    यदि नागरिक को लगता है कि पुलिस (Police) ने गैर-कानूनी तरीके से उसे गिरफ्तार किया है, तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वह पुलिस के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। यदि पीड़ित गरीब है, तो उसे मुफ्त में कानूनी मदद दी जाएगी। वकील भी दिया जाएगा। यह भी अधिकार का हिस्सा है।

     

    पुलिस गिरफ्तारी के दौरान उपयोगी अधिकार

    • CRPC धारा 50(1): पुलिस पीड़ित को गिरफ्तारी का कारण बताए
    • किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाला पुलिसकर्मी वर्दी में होना चाहिए
    • नेम प्लेट पर उस पुलिसकर्मी का नाम साफ-साफ लिखा होना चाहिए
    •  CRPC धारा 41(B): पुलिस को गिरफ्तारी का मेमो तैयार करना होगा
    • इसमें पुलिसकर्मी का नाम, गिरफ्तारी का समय और गवाह के साइन होंगे
    • CRPC धारा 41(D): गिरफ्तार व्यक्ति वकील-परिजन से मिल सकता है
    • CRPC धारा 50(A): पीड़ित के परिजन को पुलिस गिरफ्तारी के बारे में बताए
    • CRPC की धारा 57 के मुताबिक, पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में नहीं रख सकती है।
    • यदि पुलिस (Police) पीड़ित को ज्यादा समय तक हिरासत में रखना चाहती है तो CRPC की धारा 56 के तहत, मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना होगी।

     

    आपको पुलिस कर ले गिरफ्तार तो याद रखना यह अधिकार

     

    गिरफ्तारी से पहले जरूरी मेडिकल जांच

     

    CRPC की धारा 54 के तहत, गिरफ्तार किया गया व्यक्ति पुलिस (Police) से मेडिकल जांच कराए जाने की मांग कर सकता है। ताकि उसके शरीर पर चोट का कोई निशान न होने की पुष्टि हो जाए। इसके बाद यदि पुलिस (Police) कस्टडी में पीड़ित को कोई चोट लगती है तो यह बात पुलिस के खिलाफ भी जा सकती है।

     

    वारंट के बिना संभव है गिरफ्तारी

     

    अगर अपराध संज्ञेय की श्रेणी में है तो पुलिस के पास आरोपी को न सिर्फ गिरफ्तार करने बल्कि घर की तलाशी लेने का भी अधिकार होता है। दंड संहिता प्रक्रिया के अध्याय 5 के तहत पुलिस बिना वारंट भी गिरफ्तार कर सकती है। अगर असंज्ञेय अपराध है तो घर या स्थान विशेष की तलाशी के लिए पुलिस को सीनियर ऑफिसर और मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना आवश्यक होता है।

     

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    लेखक- हिमांशु दुबे

     

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