Dowry System: दहेज के खिलाफ ये कानून बनेंगे आपके हथियार

दहेज (dowry) उत्पीड़न के खिलाफ पीड़ित की मदद करेंगे ये कानून

दहेज (Dowry) उत्पीड़न के चलते हर साल हज़ारों महिलाएं (Women) अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं। जानिए क्या है दहेज और इससे जुड़े कानून (law against dowry)

12 January 2021

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  • समझा जाता है कि समय के साथ हम ज़्यादा जागरूक (Aware) होते जा रहे हैं और हमारा समाज कई कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, लेकिन दहेज प्रथा (Dowry System) हमारे समाज की ऐसी कुरीति है जो समय के साथ और खतरनाक रूप लेती जा रही है।

     

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में महिलाओं (Womens) के खिलाफ कुल 4,05,861 अपराध दर्ज किए गए, जिनमें से 30 प्रतिशत अपराध पति या ससुरालियों द्वारा महिला प्रताड़ना के मामले हैं। दहेज महिलाओं को प्रताड़ित करने का एक मुख्य कारण है। 

     

    क्या है दहेज ? (What is Dowry?)

     

    शादी के समय लड़की को परिजनों या रिश्तेदारों द्वारा दिए जाने वाले उपहारों (Gifts) को तो दहेज नहीं कहा जा सकता। आसान शब्दों में समझें तो जिन वस्तुओं या धन की मांग वर पक्ष द्वारा की जाती है वो ही दहेज कहलाया जाएगा। शादी के दौरान अभिभावकों और रिश्तेदारों से वर-वधु को मिले सभी उपहारों और नकदी का पूरा हिसाब रखना होगा। इसके अलावा किए गए लेन देन पर दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 

    इस ब्लॉग में आप दहेज और उसके खिलाफ बने कानूनों (Law against dowry) के बारे में जानेंगे और जागरूक होकर इस कुरीति के विरुद्ध आवाज़ उठा सकेंगे।

     

    दहेज प्रथा का इतिहास (History of Dowry System)

     

    प्राचीन काल में भारत (India) में दहेज प्रथा (Dowry System) की मान्यता नहीं थी। उत्तर वैदिक काल में लड़की की शादी में पिता द्वारा तोहफे देने का चलन शुरू हुआ, जिसे वहतु नाम से जाना जाता था।

     

    इसके बाद मध्य काल में उपहारों के साथ-साथ पिता द्वारा अपनी हैसियत के हिसाब से धन भी दिया जाने लगा। धीरे धीरे इसका स्वरूप बिगड़ा और प्रतिष्ठा साबित करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा धन, उपहार दिए जाने लगे जिसे दहेज के नाम से पहचान मिली।

     

    देखा जाता है कि वर पक्ष द्वारा सरेआम लड़के का सौदा किया जाता है और दहेज की मांग की जाती है। लड़की के परिवार को प्रताड़ित किया जाता है। इस कुप्रथा के चलते हर साल हज़ारों बेटियां मौत को गले लगा लेती हैं या मार दी जाती हैं। 

     

    दहेज प्रथा (Dowry System) को रोकने के लिए भारत की दंड संहिता (IPC- Indian Penal Code) में कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में पीड़ित इनका फायदा नहीं उठा पाते। यहां पर हम दहेज से संबंधित ज़रूरी कानूनों पर से बात करेंगे।

     

    1-  जानें क्या कहता है ‘दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961’

     

    दहेज लेना और देना दोनों हैं अपराध जी हां! दहेज की मांग करना ही नहीं, उस मांग को पूरा करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। 1961 में बनाए गए दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) के तहत दहेज लेने और देने की प्रक्रिया में सम्मिलित अपराधी (Criminal) को कड़ी सजाओं का प्रावधान है। इसके तहत पीड़ित परिवार से कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करवा सकता है। 

     

    कई कारणों से पीड़ित परिवार दहेज संबंधी शिकायत कराने से हिचकते हैं, जिसके चलते इसमें महिला अधिकारों से जुड़ी गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) को भी केस दर्ज करवाने का अधिकार है। वहीं, जिला अधिकारी ऐसे मामलों में खुद भी संज्ञान ले सकते हैं।

     

    कानून के तहत ये है अपराध:

     

    • दहेज देना
    • दहेज लेना
    • दहेज लेने और देने के लिए उकसाना
    • वधू पक्ष से सीधे या अप्रत्यक्ष (directly or indirectly) तौर पर दहेज की मांग करना
    • विज्ञापन के माध्यम से दहेज की मांग करना

     

    कानून के तहत सज़ा:

     

    दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) के तहत विभिन्न धाराओं के अंदर अपराधी पाए जाने पर 3 से 5 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। वहीं, दहेज की रकम के मुताबिक जुर्माना भी लगाया जाता है।

     

    ये कहते हैं आंकड़े:-

     

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2017 से 2019 के आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में हर साल बढ़ोतरी देखी जा रही है।

     

    दहेज है अपराध- लेने और देने वाले जाएंगे जेल

     

    दहेज उत्पीड़न क्या है ?

     

    दहेज प्रथा (Dowry System) से जुड़ा सबसे बुरा पहलू इसके लिए महिलाओं पर होने वाला अत्याचार है। दहेज उत्पीड़न के मामलों दहेज के लालची परिवार या पति शादी के बाद लड़की को दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं। कई बार तो दहेज की मांग बार-बार की जाती है और महिला को ससुराल में शारीरिक व मानसिक रूप (Physically and Mentally) से प्रताड़ित (Torture) किया जाता है।

     

    यहां कई बार महिला की हत्या तक बात पहुंच जाती है और कई बार उन्हें प्रताड़ित कर आत्महत्या (Suicide) के लिए मजबूर किया जाता है। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक भारत में दहेज उत्पीड़न के चलते करीब हर घंटे एक महिला की मौत होती है।

     

    दहेज है अपराध

     

    जानें क्या है सेक्शन 498-A ?

     

    शादी के बाद महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा में दहेज एक प्रमुख कारण है। धारा 498-A​ को 1983 में विवाहित महिलाओं को पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की जाने वाली क्रूरता से बचाने का प्रावधान है। भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की ये धारा महिलाओं को दहेज उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। और इसमें आरोपियों के लिए तुरंत गिरफ्तारी और आरोप साबित होने पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

     

    कानून के तहत ये हैं अपराध:

     

    • शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना
    • मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना
    • जान से मारने की धमकी देना
    • कोई मांग मनवाने के लिए महिला या उसके रिश्तेदार को परेशान करना

     

    498-A के तहत सज़ा का प्रावधान

    इस धारा के तहत आरोप साबित हो जाने पर अपराधी को जुर्माने और तीन से पांच साल की सज़ा का प्रावधान है।

     

    दहेज है अपराध

     

    कैसे और कहां करें शिकायत

    यदि आप या आपका कोई रिश्तेदार दहेज संबंधी उत्पीड़न का सामना कर रहा है तो आप इन कानूनों के अंतर्गत शिकायत दर्ज करवा सकते हैं-

    • नज़दीकी पुलिस स्टेशन या महिला थाना में जाकर या फोन के माध्यम से 
    • 181 महिला हेल्पलाइन पर
    • वन स्टॉप सेंटर पर जाकर
    • कोर्ट में केस दर्ज करवा कर


    दहेज उत्पीड़न के संबंध कानून की जानकार और वकील पिंकी घड़े बताती हैं

    दहेज उत्पीड़न का सामना कर रही महिलाओं को पुलिस सुरक्षा और कॉउंसलिंग भी मुहैया करवाई जाती है। वहीं, भारतीय दंड संहिता के दहेज निषेध अधिनियम 1961 व  सेक्शन 498 के तहत दहेज मामलों के आरोपियों के लिए सजा का प्रावधान है। पुलिस स्टेशन, महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर्स पर दहेज से जुड़े मामलों की शिकायत की जा सकती है।

     

    शादी में मिले उपहारों (Gifts) और मजबूरी में दिए गए दहेज के बीच कानूनी तौर पर अंतर स्पष्ट करना बहुत आसान नहीं है। साथ ही कई बार दहेज उत्पीड़न के कानूनों का दुरुपयोग भी किया जाता है। इससे दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए हैं। इसके लिए नई पीढ़ी का जागरूक (Aware) होना ज़रूरी है ताकि वे दहेज (Dowry) लेने और देने से इनकार करें और इस प्रथा का अंत हो।

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