भूमि की तैयारी और जुताई के प्रकार

खेती के लिए भूमि की तैयारी और जुताई के प्रकार

भूमि तैयार करने का मुख्य उद्देश्य ज्यादा पैदावार करना है। प्राचीन समय में खेत जोतने की क्रिया को कला, लेकिन आज इसे विज्ञान के रूप में जाना जा रहा है।

07 August 2020

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  • किसी भी फसल को उगाने के लिए किसी ना किसी प्रकार की जुताई की जाती है। फसलों को उगाने के लिए कृषि पद्धति में ‘जुताई’ एक महत्वपूर्ण और आवश्यक क्रिया है। 

     

    प्राचीन समय में खेत जोतने की क्रिया को ‘कला’ लेकिन आज इसे 'विज्ञान' के रूप में जाना जा रहा है। 

     

    आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगें कि खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे होती है और जुताई के प्रकार क्या है।  

     

    सबसे पहले जानते हैं कि जुताई क्या होती है?

     

    जुताई का अर्थ

     

    जुताई का अर्थ मिट्टी को गहराई से खोदना, कठोर मिट्टी को ढीला करना, वांछनीय मिट्टी को प्राप्त करने के लिए खरपतवार और कीटों के लार्वा को हटाना है। 
     
    दूसरे शब्दों में कहें तो भूमि की ऊपरी परत को चीरकर, पलटकर या जोतकर उसे बुवाई या पौध-रोपण के योग्य बनाना जुताई कहलाता है।

     

    जुताई के दौरान भूमि को कुछ इंचों की गहराई तक खोदकर मिट्टी को पलट दिया जाता है, जिससे नीचे की मिट्टी ऊपर आ जाती है और वायु, पाला, वर्षा, सूर्य के प्रकाश तथा गर्मी से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है।

     

    भूमि तैयारी का उद्देश्य

     

    भूमि तैयार करने का मुख्य उद्देश्य फसल की ज्यादा पैदावार के लिए मिट्टी को तैयार करना है। इसके लिए भूमि की जुताई व मिट्टी का समतलीकरण पूर्व निर्धारित समय पर किया जाता है। जिससे पौधे की जड़ को विकसित होने में मदद मिलती है।

     

    जुताई का उद्देश्य

    • फसलों की बुवाई के लिए मिट्टी तैयार करना।
    • फसल वृद्धि के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करना।
    • खेतों में खरपतवार को रोकना।
    • किसानों की आय में वृद्धि हो।
    • अधिक उपज वाली फसल प्राप्त करना।
    • मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों में सुधार करना।
    • मिट्टी के पोषण का उपयोग करना।

     

     जुताई का वर्गीकरण और प्रकार

     

    आपको बता दें, जुताई कई प्रकार की होती है, जैसे गहरी जुताई, छिछली जुताई, अधिक समय तक जुताई, ग्रीष्म ऋतु की जुताई, हराई की जुताई, मध्य से बाहर की ओर या किनारे से मध्य की ओर तथा एक किनारे से दूसरे किनारे की ओर जुताई।  

     

    यहाँ पर हम आपको जुताई की मुख्यतः तीन प्रकार के बारे में बता रहे हैं। 

     

    भूमि की तैयारी और जुताई के प्रकार

    (1) ऑन सीजन जुताई (2) ऑफ सीजन जुताई (3) आधुनिक जुताई

     

    ऑन सीजन जुताई

     

    फसल के मौसम की शुरुआत में या फसल उगाने के दौरान ऑन सीज़न जुताई की जाती है। आपको बता दें कि इस प्रकार की जुताई फसल के अनुसार खेती के पहले और खेती के बाद भी की जा सकती है।

     

    साधारणतः ऑन सीजन जुताई फसल बोने से पहले की जाती है ताकि फसल के लिए खेत तैयार किया जा सके।

    ऑन सीजन जुताई को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है।

     प्राथमिक जुताई और द्वितीयक जुताई

     

    1. प्राथमिक जुताई

     

    प्राथमिक जुताई में, सामान्य तौर पर मिट्टी की भौतिक ताकत को कम करने, पौधों को ढकने और मिट्टी के अन्य तत्वों को व्यवस्थित करना शामिल है। फसल उगाने के लिए, बुआई के लिए भूमि तैयार करने के लिए और किसी भी कृषि योग्य भूमि को खोदने के लिए किए गए कार्यों को प्राथमिक जुताई कहा जाता है।

     

    प्राथमिक जुताई के उपकरण

     

    प्राथमिक जुताई के लिए उपकरण ट्रैक्टर या पशुओं की सहायता से चलाए जाने वाले हो सकते हैं।

    1. पशुओं द्वारा चलाए जाने वाले उपकरण : इसमें अधिकतर स्वदेशी हल और मोल्ड बोर्ड(पाटा) हल शामिल होते हैं।
    2. ट्रैक्टर द्वारा चलाए जाने वाले उपकरण : इसमें मोल्ड बोर्ड हल, डिस्क वाले हल, अवभूमि हल, छेनी हल और अन्य ऐसे ही उपकरण शामिल होते हैं।

     

    2. माध्यमिक जुताई

     

    प्राथमिक जुताई के बाद, बीजों की बुवाई और रोपण के लिए जोती हुई उचित मिट्टी तैयार करने के लिए किए गए कार्यों को ही माध्यमिक जुताई कहा जाता हैं। इस प्रकार की जुताई कार्य प्रायः हल्के और उत्कृष्ट होते हैं और इन्हें प्राथमिक जुताई के कार्यों के बाद किया जाता है। माध्यमिक जुताई में खेत के विभिन्न जुताई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मिट्टी को तैयार करना शामिल होता है।
     

    माध्यमिक जुताई के उपकरण

     

    माध्यमिक जुताई के कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को माध्यमिक जुताई उपकरण कहते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के उपकरण शामिल हैं। जैसे -

    1. हैरो,
    2. कल्टीवेटर्स,
    3. इंटर कल्टीवेटिंग हैरो
    4. लैवलर,
    5. मिट्टी के ढेलों को तोड़ने वाले क्रशर्स इत्यादि।

    इसके अलावा खेती के बाद जुताई के प्रकार को अंजाम दिया जाता है तो इसे इंटर-कल्टीवेशन भी कहा जाता है। इस प्रकार जुताई में किए जाने वाले कार्यों में निराई, गुड़ाई, ड्रिलिंग, अर्थिंग या साइड ड्रेसिंग की जाती है।

     

    ऑफ सीजन जुताई

     

    ऑफ सीजन जुताई का तात्पर्य उन जुताई के कार्यों से है, जो फसल के पौधों को तुरंत बढ़ाने के लिए नहीं की जाती है, लेकिन आने वाली मुख्य मौसम की फसल के लिए मिट्टी को उपयुक्त रूप से कंडीशनिंग करती है।
     
    ऑफ सीजन जुताई मिट्टी को समतल करने के लिए फसल को काटने के बाद निर्धारित किए जाती हैं। ऑफ सीजन जुताई मिट्टी में हानिकारक वनस्पतियों और जीवों की आबादी को कम करने के उद्देश्य से की जाती है।

     

    ऑफ सीजन जुताई के प्रकार

     

    1. कटाई के बाद की जुताई

    पिछली फसल की कटाई को जड़ से उखाड़ने और जल संरक्षण के उद्देश्यों व मिट्टी की संरचना को संरक्षित करने के उद्देश्य से फसलों की कटाई को जुताई कहा जाता हैं।

        

    2. ग्रीष्मकालीन जुताई 

    गर्मियों के दौरान बारिश के पानी को बनाए रखने के साथ-साथ कीटों को नियंत्रित करने, मिट्टी के कटाव को कम करने के लिए ग्रीष्मकालीन जुताई की जाती है।

     

    3. शीतकालीन जुताई 

    कम तापमान वाले क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम के दौरान किए गए जुताई कार्यों को शीतकालीन जुताई कहा जाता है। शीतकालीन जुताई खरपतवार को जड़ से उखाड़कर मिट्टी की भौतिक स्थितियों में सुधार के लिए की जाती है।

      

    4. परती जुताई

    परती जुताई, खाली पड़ी भूमि पर की जाती है। परती जुताई का उद्देश्य मिट्टी में रोगजनक कीटों के रोगाणु या अंडे, सभी खरपतवारों  को जड़ से खत्म करना है।

     

    आधुनिक जुताई

     

    विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के विकास के साथ-साथ आधुनिक कृषि का भी विकास हुआ है। खेती की पुरानी परम्पराओं के स्थान पर अब एक नई कृषि पद्धति का विकास हुआ है। आधुनिक समय में किसानों ने भी खेती की नई तकनीकों को अपनाना शुरू कर दिया है।

     

    पारंपरिक जुताई में, ऊर्जा अक्सर बर्बाद होती है और कभी-कभी, मिट्टी की संरचना नष्ट हो जाती है। जुताई की प्रथाओं में हाल ही में काफी बदलाव हुए हैं और कई नई अवधारणाएँ पेश की गई हैं जैसे- न्यूनतम जुताई, शून्य जुताई, ठूंठ वाली गीली जुताई।

       

         आपको बता दें कि शून्य जुताई खेती के माध्यम से, मिट्टी को हानि पहुंचाए बिना हर साल आसानी से फसल उगाई जा सकती है। इससे मिट्टी में रिसने वाले पानी की मात्रा बढ़ जाती है और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों धारण की क्षमता बढ़ती है एवं पोषक तत्वों का चक्र भी सुचारु रूप से चलता है। इस प्रकार की जुताई किसान अब चावल के खेत में सब्जियां उगाने के लिए अपना रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी हो रही है।

     

    यहां जानकारी के लिए बता दें कि इस तकनीक से फसलों की पैदावार में 20% की वृद्धि होती है और अनाज की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

     

    संक्षेप में कहें तो जुताई के लिए कोई विशेष समय निश्चित नहीं किया जा सकता। यह कार्यकाल स्थान की जलवायु तथा फसल की किस्म पर निर्भर है। जलवायु के अनुसार कृषि के लिए वर्ष को खरीफ, रबी और जायद में बांटा गया है तथा इन्हीं के अनुसार फसलें भी विभाजित होती हैं। खरीफ की फसल वर्षा ऋतु में, रबी की फसल जाड़े में तथा जायद की फसल ग्रीष्म ऋतु में की जाती है।



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