देश में पहली बार किसी महिला को फांसी, जानें क्या है अपराध?

आज़ाद भारत में पहली बार महिला को फांसी, जानें पूरी कहानी

महिला अपराधी को फांसी, ये सुनने में अजीब लगता है। मगर अब ये हकीकत है। आज़ाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी। आइए, इसी बारे में जानें।

18 February 2021

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  • आज़ाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। वजह है महिला का वो खौफनाक कदम जो बरसों पहले उठाया गया था। अपने प्यार को पाने के लिए इस महिला ने किए थे 7 कत्ल। वो भी अपने ही परिवार के सदस्यों के। तो आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि अमरोहा की शबनम सैफी और उसकी खूनी कहानी…

     

    13 साल पुरानी खौफनाक कहानी

     

    ये कहानी 13 साल पुरानी है, जब अमरोहा की शबनम को सलीम से इश्क हुआ था। अपने प्रेमी सलीम को पाने के लिए शबनम ने प्यार में अंधी होकर अपने ही परिजन की जघन्य हत्या कर दी। शबनम ने अपने ही परिवार के 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मां-बाप और परिजन को कुल्हाड़ी से काटते वक्त उसके हाथ ज़रा भी नहीं कांपे।

     

    शबनम ने अपने प्रेमी के साथ निकाह करने के लिए अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी। कहा जाता है कि वारदात के वक्त शबनम के पेट में उसके प्रेमी का बच्चा था।

     

    अमरोहा के बावनखेड़ी गांव की वारदात

     

    15 अप्रैल 2008 का दिन था, जब अमरोहा के बाबनखेड़ी गांव में रहने वाली शबनम ने पहले पूरे परिवार को नशे की दवा देकर बेहोश किया। फिर सभी की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी।

     

     

     

    पढ़ी लिखी शिक्षामित्र थी शबनम

     

    शबनम अपने परिवार की आंख का तारा थी। शबनम पढ़ी-लिखी और शिक्षा मित्र थी। वह एम.ए. पास करके शिक्षामित्र बनी थी। पोस्ट ग्रेजुएट शबनम सलीम के प्यार में पागल हो चुकी थी। परिवार को रिश्ता मंजूर नहीं था, जिससे नाराज़ शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।

     

    जेल में दिया था बच्चे को जन्म

     

    दिसंबर 2008 में जेल में ही शबनम ने बच्चे को जन्म दिया था। शबनम को बेटा हुआ था। करीब 7 सालों तक बेटा शबनम के साथ जेल में ही रहा। इसके बाद शबनम ने अपने बेटे को अपने कॉलेज के दोस्त के हवाले कर दिया था।

     

    मथुरा जेल में फांसी घर

     

    1870 में महिलाओं को फांसी देने के लिए मथुरा जेल में विशेष फांसी घर बनवाया गया था। आज़ादी के बाद से किसी को यहां फांसी पर नहीं लटकाया गया है। सालों से बंद पड़े इस फांसी घर को मरम्मत की दरकार है।

     

    पवन जल्लाद ने किया था निरीक्षण

     

    जानकारी के मुताबिक, मेरठ के पवन जल्लाद ने मथुरा जेल के इस फांसी घर का निरीक्षण किया था। पवन ने बताया था कि अंदर तख्ता टूटा है और लीवर में भी दिक्कत है।

     

    बक्सर से आएगा फांसी का फंदा

     

    आपको बता दें कि शबनम को फांसी देने के लिए फांसी का फंदा बिहार के बक्सर से आएगा। नियम के मुताबिक, फांसी के फंदे की रस्सी बक्सर में ही तैयार की जाती है।

    तो ये थी अमरोहा की शबनम की खूनी कहानी लेकिन,

     

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    लेखक- नितिन गुप्ता 

     



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