कीवी की बागवानी से कमाए लाखों का मुनाफा

कीवी की खेती: कम लागत में ज़्यादा कमाई

कीवी अपने स्वाद और औषधीय गुणों के कारण लोकप्रिय है। कम लागत में उन्नत खेती करके आप कीवी की बागवानी से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानें...

15 February 2021

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  • इन दिनों कीवी की बाज़ार में खूब मांग है। इसकी लोकप्रियता का कारण है, इसमें अनेक औषधीय गुणों का होना। यह फल स्वाद से भरपूर और पौष्टिक होते हैं। इसमें विटामिन सी, विटामिन बी, फास्फोरस, पौटिशयम व कैल्शियम तत्व ज़्यादा मात्रा में पाए जाते हैं, जो कई  बीमारियों को दूर करते हैं। 

     

    भूरे रंग के छिलके वाला यह फल अंदर से मुलायम और हरे रंग का होता है। इसमें  काले रंग के छोटे-छोटे बीज भी होते हैं। इसकी खेती से किसानों को अच्छी कमाई होती है। 

     

    यदि आप भी कीवी की खेती (kiwi ki kheti) करने का मन बना रहे हैं तो आपको किन-किन बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत होगी। इसकी चर्चा आज हम Knitter के इस ब्लॉग  में करेंगे।

     

    इसमें हम आपको बताएंगे- 

    • आवश्यक जलवायु
    • आवश्यक तापमान
    • उपयोगी मिट्टी
    • खेती की तैयारी कैसे करें
    • कीवी की उन्नत किस्में
    • सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन
    • लगने वाले रोग और उसका इलाज़ 
    • कीवी की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    सबसे पहले बात कीवी के लिए ज़रूरी जलवायु की। 

     

    जलवायु

     

    कीवी के लिए ठंडी और आर्द्र जलवायु (Climate) की ज़रूरत होती है। ऐसे क्षेत्र जिनकी समुद्र तल से ऊंचाई 800-1500 मीटर है, वहां इसको आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खेती के लिए अधिक पानी की ज़रूरत होती है। इसके पौधे सर्दी के मौसम में अधिक पैदावार देते हैं, जबकि अधिक गर्मी, तेज़ हवा और पाला पौधों के लिए हानिकारक होते हैं।  

     

    हमारे देश में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नीलगिरी की पहाड़ियों पर इसकी खेती अधिक होती है। 

     

    तापमान

     

    इसकी खेती के लिए तापमान सबसे महत्वपूर्ण है। इसकी खेती गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में नहीं करनी चाहिए। कीवी के लिए औसतन तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए।  35 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक तापमान वाले स्थानों पर इसकी खेती नहीं होती है। 

     

    यहां यह भी बताना ज़रूरी है कि इसके फल बनने के दौरान 200 से 300 घंटों तक 5 से 7 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान ज़रूरी होता है।

     

    मिट्टी

     

    कीवी के लिए उपजाऊ दोमट, जिसमें प्रचुर मात्रा में जीवांश हो, सबसे अच्छी होती है। जलभराव वाली मिट्टी में कीवी का बाग नहीं लगाना चाहिए। 6.0 से 7.0 के बीच पीएच मान वाली मिट्टी सबसे ज़्यादा  उपयुक्त होती है। 

     

    ऐसे करें खेत की तैयारी

     

    खेत की तैयारी से पहले ज़रूरी है, उन्नत किस्मों का चुनाव करना। जब भी इसका  बाग लगाएं, नर और मादा दोनों पौधों का चुनाव करें। सबसे पहले जनवरी  में इसकी नर्सरी तैयार कर लें। इसके लिए बीज और कलम दोनों प्रकार से पौधे की रोपाई कर सकते हैं।

     

    पौधों की रोपाई से पहले किसान गड्ढे की खुदाई 6 x3 मीटर यानी लाइन से लाइन की दूरी 3 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 6 मीटर रखें। जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां मल्चिंग (पलवार) विधि से पौधे लगाना फायदेमंद होता है। पौधों को लगाने के बाद तुरंत उनकी सिंचाई करें। पौधे लगाने के बाद पाले से बचाने के लिए पौधों को सूखे घास या खरपतवार से ढक दें और सिंचाई का विशेष ध्यान रखें।  

     

    कीवी की उन्नत किस्में

     

    भारत में कीवी की मादा किस्मों में एलीसन, मोन्टी ब्रूनो, हेवर्ड, ऐबाट और नर किस्मों में एलीसन और तोमुरी मुख्य हैं। 

     

    महंगे फल कीवी की बागवानी ऐसे कीजिए

     

    सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

     

    कीवी के पौधों में सिंचाई का विशेष ध्यान रखना  आवश्यक होता है। पौधों की पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए। गर्मियों के मौसम में 3 से 4 दिन के अंतराल में और सर्दियों में 8 से 10 दिन के अंतराल में सिंचाई करनी चाहिए।

     

    आपको बता दें, कीवी के पौधे को एक साल में कम से कम 18 बार सिंचाई की ज़रूरत होती है। 

     

    कीवी में अधिक पैदावार तथा बेलों की बढ़वार के लिए समुचित खाद की ज़रूरत होती है। प्रति पौधे 20 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद,1 किलोआर्गेनिक खाद, 1 किलो माइक्रो नीम, 1 किलो नाइट्रोजन, पोटैशियम और फास्फोरस की खाद हर साल  देना चाहिए।

     

     

    महंगे फल कीवी की बागवानी ऐसे कीजिए

     

    रोग और उसका इलाज़

     

    फलों की ऊपरी सतह रोयेंदार होने के कारण इसमें रोग और कीट की समस्या कम होती है। अधिक गर्मी और पाला इसकी खेती के लिए नुकसानदायक होता है।  शुरू के 3-4 वर्षो में जड़ और तना गलन का प्रकोप होता है। इससे बचने के लिए पौधा लगाने के पहले जड़ों को फंफूदनाशक या नीम के तेल के घोल में डुबो कर उपचारित कर लेना चहिए। 

     

    कटाई-छंटाई और खरपतवार प्रबंधन

     

    कीवी का पौधा बेलवर्गीय होता है। इसकी बेलों को अंगूर की तरह तारों के सहारे की ज़रूरत होती है। अधिक उपज के लिए समय-समय पर कटाई-छंटाई करते रहना चाहिए। सहारे के लिए परगोला, टी-बार विधियों से सधाई की जा सकती है।

     

    आपको बता दें, रोपाई के बाद पहले साल पौधों को ज़मीन की सतह से 30 सेंटीमीटर की ऊंचाई से कटाई कर देनी चाहिए। मुख्य तने पर सभी तरफ निकलने वाली टहनियों को छंटाई करते रहना चाहिए।  

     

    लागत और कमाई

     

    बागवानी के शुरुआती दिनों में लागत अधिक लगती है। बागान लगाने के एक साल बाद लागत में कमी आ जाती है। 3 साल बाद फलों का उत्पादन शुरू हो जाता है, जो 15-20 साल तक चलता है। यदि बागान की कटाई-छंटाई का सही  ख्याल रखा जाए तो किसानों को 30 सालों तक इसका लाभ मिलता है। 

     

    पैदावार की बात करें तो एक पेड़ से 8-10 साल बाद 1 क्विंटल तक कीवी की पैदावार होती है। कीवी की बाज़ार  में कीमत तकरीबन 160 रुपए होती है, जो अन्य फलों की तुलना में ज़्यादा है। ऐसे में औसतन एक पेड़ से 9 हजार से ज़्यादा रुपए के फल मिल जाते हैं। प्रति हेक्टेयर की बात करें तो कीवी की बागवानी से किसानों को 7-8 लाख रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी हो सकती है। 

     

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता

     

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