कड़क मुनाफे के लिए पालें कड़कनाथ मुर्गे

कड़कनाथ मुर्गा क्यों है पोल्ट्री बिज़नेस की जान, आइए जानें

पोल्ट्री बिज़नेस में कड़कनाथ मुर्गा मुनाफे की 100 प्रतिशत गारंटी बनकर उभर रहा है। देश के कुछ क्षेत्रों में इसकी भारी मांग है। आइए, इस बारे में जानें।

20 February 2021

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  • आपने ‘कड़क चाय’ के बारे में तो ज़रूर सुना होगा? लेकिन, क्या आपने ‘कड़कनाथ’ मुर्गे के बारे में सुना है? नहीं, तो ज़रा सुन लीजिए, क्योंकि जितनी जल्दी आप इसके बारे में जानेंगे, आपके लिए उतना ही ज़्यादा फायदेमंद होगा। कैसे? ये बताने के लिए हम हैं ना! 

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति से जुड़ी जानकारियां देंगे। “बिज़नेस और रोज़गार” की हमारी श्रृंखला में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे पोल्ट्री बिज़नेस (Poultry Business) में कड़कनाथ को पालकर अपनी ज़िंदगी की गाड़ी को रफ्तार दे सकते हैं? 

     

    तो चलिए, कड़कनाथ मुर्गे पर आपको बिल्कुल कड़क जानकारियां देते हैं। लेकिन, इससे पहले बता देते हैं कि इस दौरान आप क्या-क्या जानेंगे।

     

    आप जानेंगे-

     

    • कड़कनाथ क्या है?
    • ये दूसरी प्रजातियों से कैसे अलग है?
    • कड़कनाथ कहां पाया जाता है?
    • इसे कैसे पाला जाता है?
    • लागत कितनी आएगी?
    • मुनाफा कितना होगा?
    • प्रशिक्षण कहां से मिलेगा?
    • एक्सपर्ट की क्या राय है?

     

    कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति पर एक नज़र:

     

    कड़कनाथ मुर्गा इन दिनों पोल्ट्री बिज़नेस की शान बन चुका है। देश के कोने-कोने में इसकी डिमांड है। इसकी विशेषता और पहचान की बात करें, तो इसका रंग काला होता है। इसके पंख, मीट और खून सबकुछ काले रंग का होता है। यहां तक कि हड्डियां भी। 

     

    इसके मीट में कई गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में आपकी मदद करते हैं। वहीं, यदि हम कड़कनाथ मुर्गी के अंडों की बात करें, तो अपने गुणों के चलते ये बाज़ार में करीब 25 से 50 रुपये तक बिकते हैं।

     

    कड़कनाथ मुर्गा क्यों है पोल्ट्री बिज़नेस की जान, आइए जानें

     

     

    कड़कनाथ कहां पाया जाता है?

     

    कड़कनाथ मुख्यतः मध्य प्रदेश के झाबुआ ज़िले की नस्ल है। इसे अब जीआई टैग भी मिल चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीआई टैग एक तरह की विशेष पहचान होती है, जिसका निर्धारण भौगोलिक उत्पत्ति व विशेष गुणों के आधार पर किया जाता है। ये दर्शाता है कि इस जैसा कोई और नहीं। 

     

    यहां ये देखना भी दिलचस्प है कि कभी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तक सीमित रहने वाली ये नस्ल आज देश के कई राज्यों में पोल्ट्री बिज़नेस की जान बन चुकी है। पोल्ट्री प्रोडक्शन में नित नए कीर्तिमान हासिल करने वाले तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी अब कड़कनाथ लोकप्रियता हासिल कर चुका है। 

     

    इसकी खासियत:

     

    कड़कनाथ दूसरी प्रजातियों से बिल्कुल अलग है। रंग और रूप में भिन्नता के अलावा इसमें कई और भिन्नताएं भी हैं। इसके मीट में प्रोटीन की मात्रा 25 से 27 प्रतिशत तक होती है, जबकि अन्य प्रजातियों में यह महज़ 15-17 प्रतिशत तक ही होती है। वहीं, अन्य नस्लों के मुकाबले कॉलेस्ट्रोल भी काफी कम होता है। जानकार बताते हैं कि इसके मीट की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ग्रेवी में बनाना ही प्रिफर किया जाता है। इसका स्वाद भी काफी अलग होता है।

     

    कड़कनाथ में पाए जाने वाले पोषक तत्व

     

    • इसमें 25 से 27 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है
    • विटामिन B1, B2,B6, B12, E और C से भरपूर होता है
    • कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे मिनरल्स होते हैं
    • इसके अलावा 18 एमिनो ऐसिड्स भी पाए जाते हैं

     

    ऐसे पाल सकते हैं कड़कनाथ:

     

    कड़कनाथ को दो तरीके से पाला जा सकता है। पहला, शुद्ध रूप से पोल्ट्री फार्मिंग बिज़नेस के तौर पर और दूसरा अतिरिक्त आमदनी के साधन के रूप में।

     

    बिज़नेस के तौर पर-

     

    यदि आप बिज़नेस करने के उद्देश्य से कड़कनाथ को पालना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको पोल्ट्री बिज़नेस की ट्रेनिंग लेनी होगी। आप किसी सरकारी या निजी इंस्टीट्यूट से इसकी ट्रेनिंग ले सकते हैं। इस तरह आप इस नस्ल को पालने से जुड़ी सारी जानकारियां हासिल कर सकेंगे। 

     

    आप बहुत सी चीज़ें जान पाएंगे। जैसे- इनका आवास कैसा होना चाहिए? कैसा वातावरण मिलना चाहिए? इन्हें क्या खिलाना चाहिए? कैसे रखा जाना चाहिए? किस तरह से देखभाल की जानी चाहिए? इन तमाम बातों को जानकर आप अपने बिज़नेस को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकेंगे।

     

    अतिरिक्त आमदनी के साधन के तौर पर-

     

    यदि कोई कड़कनाथ को अतिरिक्त आमदनी के साधन के रूप में भी पालता है, तो भी ये नस्ल उसके लिए फायदेमंद साबित होगी। खासकर, छोटे व सीमांत किसानों के लिए, जिनके पास फसल आदि काटने के बाद ज़्यादा कुछ करने को नहीं होता है। या तो वे खाली बैठे होते हैं, या फिर वे शहरों की ओर पलायन करते हैं। 

     

    दोनों ही स्थिति में उनके हाथ ज़्यादा कुछ नहीं आता। वहीं, यदि वे कम संख्या में भी अपने घर के आंगन में कड़कनाथ नस्ल को पालते हैं, तो उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हो सकता है। किसान, कड़कनाथ मुर्गे को पालने की ट्रेनिंग नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से ले सकते हैं। महज़ 1 से 2 दिन की ट्रेनिंग के साथ वे ये काम कर सकते हैं।

     

    चूज़ों का बंदोबस्त:

     

    आपको बता दें कि जिस तेज़ी से पोल्ट्री बिज़नेस पैर पसार रहा है, सरकार भी इसे गंभीरता से ले रही है। इसलिए आपको चूज़ों के लिए यहां-वहां भटकने की ज़रूरत नहीं है। जैसा कि आपको पता है कि तकरीबन हर ज़िले में कृषि विज्ञान केंद्र होते हैं। 

     

    लिहाज़ा, आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से इस संबंध में मदद ले सकते हैं। वहां आपको चूज़े आसानी से मिल जाएंगे। यदि किसी कारण आपको इसमें कठिनाई आती है, तो आप कड़कनाथ पालने वाले पोल्ट्री फार्म से भी संपर्क कर सकते हैं।

     

    कड़कनाथ पालने की लागत:

     

    आप 50 हज़ार रुपये से भी कम में इस काम को शुरू कर सकते हैं। हालांकि,जानकारों का मानना है कि इस बिज़नेस को कम से कम 100 चूज़ों के साथ शुरू करना एक बेहतर विकल्प रहेगा। इसमें करीब 1.5 लाख रुपये का खर्च आएगा।

     

    मुनाफा

     

    जहां मुर्गों की अन्य नस्लों में 20 से 30 प्रतिशत तक का मुनाफा होता है, कड़कनाथ में आपको 60 से 70 प्रतिशत तक का मुनाफा मिल जाता है। कई मामलों में आप दोगुने से भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

     

    बाज़ार भाव:

     

    भाव के मामले में ये सभी का बाप है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ये अलग-अलग दामों में बिकता है। इसकी औसतन कीमत पर गौर करें, तो कड़कनाथ मुर्गा 500 से लेकर 1200 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है।

     

    सरकारी मदद:

     

    देश में पोल्ट्री बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार आर्थिक मदद प्रदान करती है। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन और नाबार्ड के पोल्ट्री वेंचर कैपिटल फंड (PVCF) के तहत आप लोन और सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। सामान्य वर्ग को 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है। 

     

    वहीं, बीपीएल और SC/ST और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों के लिए करीब 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इसके अलावा कई राज्यों में आपको प्रशिक्षण जैसी कुछ अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। आप स्थानीय मुर्गी पालन विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर इस संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

     

    कड़कनाथ मुर्गा क्यों है पोल्ट्री बिज़नेस की जान, आइए जानें

     

    ध्यान देने योग्य बातें:

    • पोल्ट्री फार्म गांव या शहर से थोड़ी दूरी पर ही खोलें
    • फार्म को थोड़ी ऊंचाई पर बनाएं, ताकि पानी का जमाव न हो
    • 100 कड़कनाथ मुर्गे पालने के लिए करीब 150 से 200 वर्ग फीट की जगह पर्याप्त होगी
    • फार्म में रोशनी और पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको बिज़नेस के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

     

     

    लेखक- कुंदन भूत

     

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