ऐसे शुरू करें मोती की खेती (Pearl Farming)

जानिए मोती की खेती शुरू करने के आसान तरीके

मोती की खेती एक निश्चित प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसके बारे में जानना आवश्यक है। आइए, जानते हैं कैसे होती है मोती की खेती।

27 January 2021

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  • देश हो विदेश हो, हर बाज़ार में मोती (Pearl) का खासा महत्व रहा है। पुरुष हो या महिलाएं, आभूषण में मोती हर किसी की पसंद रहे हैं। पुराने समय में राजा-महाराजा, रानी-महारानी हो या आज के दौर में नेता-अभिनेता या प्रोफेशनल्स हों।

     

    यही वजह है कि भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार के मोती की मांग बढ़ रही है। किसानों (Farmers) के साथ-साथ सरकारें भी मोती की खेती (Farming) पर ज़ोर दे रही हैं। हालांकि, मोती का उत्पादन चरणबद्ध तरीके से होता है।

     

    जिसकी चर्चा हम इस ब्लॉग में करेंगे। चलिए, सबसे पहले जानते हैं, मोती के प्रकार।

     

    मोती के प्रकार, उनकी विशेषताएं

     

    कृत्रिम मोतीः

    • प्राकृतिक मोती जैसा दिखता है
    • जिलेटिन के उपयोग से बनता है
    • बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है
    • हर बाज़ार में इनकी कीमत कम है

     

    प्राकृतिक मोतीः

    • सीप में मौजूद मृत कोशिकाएं खुद मोती बन जाती है
    • यह मुश्किल से समुद्र में मिलते हैं, कीमत लाखों रु.
    • इनके बनने में इंसान की कोई भूमिका नहीं होती है


     

    संवर्धित मोतीः

    • यह प्राकृतिक मोती जैसे ही तैयार होता है
    • इसके उत्पादन में इंसान की भूमिका शामिल
    • इसकी उत्पादन प्रक्रिया खेती का ही एक अंग
    • इससे ज्यादा मोती का उत्पादन कर सकते हैं

     

    अब बात उन तरीकों की, जिनसे मोती की खेती शुरू की जा सकती है।

     

    1.  सबसे पहले ट्रेनिंग लें

     

    मोती की खेती शुरू करने से पहले उसकी ट्रेनिंग ज़रूरी है। इसके लिए आप पास के प्रशिक्षण केंद्र पर जा सकते हैं। बिना ट्रेनिंग मोती की खेती नहीं की जा सकती है। इस बिज़नेस से जुड़े कुछ लोग इसकी ट्रेनिंग देते हैं। आप उनकी मदद ले सकते हैं।

     

    2.  स्थान का चयन करें

     

    मतलब सबसे पहले खेती करने की जगह चुन लें। आपको ऐसी जगह चुनना चाहिए, जहां पर्याप्त मात्रा में पानी हो। जो स्थाई हो। वजह यह है कि एक बार मोती की खेती शुरू करने के बाद आप जगह नहीं बदल सकते हैं।

     

    3.  फार्म तैयार कर लें

     

    फार्म तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले तालाब बनाने की ज़रूरत होगी। यहां पानी को बाहर निकालने की भी उचित व्यवस्था करनी होगी। वहीं, फार्म के ऊपर अस्थाई छत या शेड लगाना भी ज़रूरी होता है।

     

    4.  सीप को इकट्ठा करें

     

    झीलों, तालाबों या नदियों से सीप इकट्ठा किए जा सकते हैं। या फिर किसी फार्म या बाज़ार से इन्हें खरीदा जा सकता है। भारत में पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा सीप की बिक्री की जाती है।

     

    5.  अक्टूबर से दिसंबर का समय उत्तम

     

    मोती की खेती के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक का समय उत्तम माना जाता है। 10X10 फीट के या इससे बड़े तालाब में मोती की खेती की जा सकती है। 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25 हजार सीप से मोती का उत्पादन किया जा सकता है।

     

    6.  इम्प्लांटेशन और उसके प्रकार

     

    इस प्रक्रिया से पहले सीप को 2-3 दिन के लिए पानी में रखा जाता है। इसकी तीन प्रमुख विधियां हैं। इनमें मैंटल कैविटी इम्प्लांटेशन, मैंटल टिश्यू इम्प्लांटेशन, गॉनैडल इम्प्लांटेशन शामिल हैं। इन प्रक्रियाओं की विधि आपके बजट और लोकेशन पर निर्भर होती है।

     

    7.  सीप की सेहत को जांचें

     

    सीप में इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया के बाद उन्हें 10 से 15 दिन के लिए बांस की मदद से नायलॉन के बैग में रखा जाता है। इस दौरान ध्यान रखा जाता है कि कोई सीप खराब तो नहीं हुआ। अगर हां, तो सीप को अलग किया जाता है।

     

    8.  सही समय पर हार्वेस्ट करें

     

    यह मोती की खेती का अंतिम चरण होता है। इसमें मोती को सीप से बाहर निकाला जाता है। मोतियों को निकालने के बाद उनको सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। इस दौरान तालाब की साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखा जाता है।

     


     

    ऐसे शुरू की जा सकती है मोती की खेती


     

     मोती की खेती का अनुमानित खर्च

     

    मान लीजिए कि आप आधे एकड़ ज़मीन में मोती की खेती करना चाहते हैं तो आप इस जानकारी के बूते यह जान सकते हैं कि आपको कितना खर्च आएगा। वैसे भी मोती की खेती आपके बजट के अनुसार की जा सकती है।  

     

    सीपों की संख्या- आधे एकड़ ज़मीन में करीब 5 से 8 हज़ार तक सीप रखे जा सकते हैं। 

     

    मोती तैयार होने की समयसीमा- मोती तैयार होने में करीब 12 से 15 महीनों का समय लग जाता है। 

     

    उत्पादन प्रक्रिया: डबल इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया से मोती का उत्पादन।

     

    मोती की खेती के बाद आमदनी

     

    अब मान लीजिए कि हार्वेस्टिंग के बाद आपको 8000 मोती मिले तो आपका मुनाफा कुछ ऐसा हो सकता है। मार्केट में एक मोती की कीमत करीब 150 से 200 रुपए है। यदि एक मोती 150 रुपए के हिसाब से भी बिकता है, तो 8000 मोतियों की कीमत करीब 12,00,000 रुपए होगी। अब इसमें से कुल लागत 3,46,500 रुपए को घटा भी दिया जाए, तो आपको 8,53,500 रुपए का मुनाफा होगा। मतलब हर महीने की कमाई 71,125 रुपए होगी।

     

    तालाब में सीपियों के खराब होने का डर नहीं

     

    मोती की खेती में एक्टिव रहकर काम करने पर 50 फीसदी तक सीपियों से मोती निकाले जा सकते हैं। कारण कि कभी एक सीप मर गई। वह अगर टैंक में चार दिन रह गई तो उसके इंफेक्शन से बाकी की सीपियों के खराब होने का डर रहता है। यही वजह है कि सीपियों को लगातार देखना पड़ता है। तालाब में सीपियां मर भी जाए तो पानी खराब होने का डर नहीं रहता। डिजाइनर मोती एक सीपी में 2 निकलते हैं। यह मोती 200 रुपए से 450 रुपए में बिक जाता है।

     

     

    ऐसे शुरू की जा सकती है मोती की खेती

     

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    लेखक- हिमांशु दुबे

     

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