डिटर्जेंट बिज़नेस: मोटी कमाई का बेजोड़ फॉर्मूला

जानें, डिटर्जेंट बिज़नेस कैसे है बेहतर विकल्प?

भारत में डिटर्जेंट पाउडर का मार्केट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में डिटर्जेंट का बिज़नेस (Detergent Business) करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

19 January 2021

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  • शंका, दुविधा और चुनौतियां...ये तीनों ही चीज़ें अक्सर इंसान को कुछ नया करने से रोकती हैं। लेकिन जो इनसे निपटना जानते हैं, वो अपनी राह खुद ही तलाश लेते हैं। ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज जैसे हालात हैं, आपको और हमें खुद ही अपने रोज़गार और आजीविका के साधनों को तलाशने की आवश्यकता है।  

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम इसी विषय पर बात करेंगे और आपको आजीविका के एक बेहतर विकल्प की जानकारी देंगे। बिज़नेस और रोज़गार की हमारी श्रृंखला में हम आपको डिटर्जेंट बनाने के बिज़नेस (Detergent Business) के बारे में बताएंगे। हम ये भी बताएंगे कि आप कैसे कम पूंजी में इस बिज़नेस की शुरुआत कर अपने और अपने परिवार को एक सुनहरा भविष्य दे सकते हैं। तो चलिए, ब्लॉग को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन पहले ये जान लेते हैं कि आपको इस ब्लॉग में डिटर्जेंट बिज़नेस (Detergent Business) से जुड़ी क्या-क्या जानकारियां मिलेंगी।

     

    ब्लॉग में हम आपको कई चीज़ें बताएंगे, जैसे-

    • डिटर्जेंट बिज़नेस क्या है?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस में स्कोप क्या है?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस कैसे शुरू किया जा सकता है?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस के लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या है?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस में कौन सी मशीनरी लगेगी?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस के लिए कितनी जगह चाहिए होगी?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस में कौन से रॉ मटेरियल की ज़रूरत पड़ेगी?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस में लागत कितनी आएगी?  
    • डिटर्जेंट बिज़नेस में मुनाफा कितना होगा?
    • डिटर्जेंट बिज़नेस पर एक्सपर्ट की राय क्या है?

     

    हम इन तमाम पहलुओं पर आपका मार्गदर्शन करने का प्रयास करेंगे। तो चलिए बिना देर किए जानकारियों का ये सफर शुरू करते हैं।

     

    डिटर्जेंट बिज़नेस (Detergent Business) को जानें:

     

    इस बिज़नेस के तहत मशीन की मदद से डिटर्जेंट पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद उसे बाज़ार में जाकर बेचा जाता है। ज़्यादातर मामलों में डिटर्जेंट को बनाने वाले खुद ही प्रोडक्शन, पैकेजिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसपोर्ट का काम संभालते हैं। हालांकि आप चाहें, तो सिर्फ प्रोडक्शन कर किसी अन्य डिस्ट्रीब्यूशन चैनल की मदद से अपने उत्पाद को बाज़ार में बेच सकते हैं।

     

    डिटर्जेंट बिज़नेस (Detergent Business) में स्कोप:

     

    • ये एक कंज़्यूमर बेस्ड बिज़नेस है।
    • हर घर में डिटर्जेंट का उपयोग किया जाता है।
    • देश भर में इसकी अच्छी डिमांड है।
    • कम निवेश में शुरू हो सकता है बिज़नेस। 
    • आने वाले सालों में भारतीय डिटर्जेंट बाज़ार करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है।

     

    डिटर्जेंट बिज़नेस दे सकता है मोटा मुनाफा

     

    डिटर्जेंट बिज़नेस (Detergent Business) ऐसे शुरू कर सकते हैं: 

     

    भारत में बिज़नेस शुरू करना पहले के मुकाबले बहुत आसान हो चुका है। लिहाज़ा डिटर्जेंट का बिज़नेस शुरू करना आपके लिए मुश्किल भरा काम नहीं होगा। आपको कुछ प्रक्रियाओं से गुज़रना होगा और कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होगा, जिसकी जानकारी हम आगे इस ब्लॉग में देंगे। तो चलिए, समझने का प्रयास करते हैं कि आप इस बिज़नेस का श्रीगणेश कैसे कर सकते हैं?

     

    लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन:

     

    सबसे पहले आपको एक ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता होगी। आप नगर निगम या नगर पालिका जैसे स्थानीय निकाय में इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आपको अपने उत्पाद के लिए ट्रेडमार्क भी लेना होगा ताकि बाज़ार में आपके उत्पाद की अलग पहचान बनाई जा सके। साथ ही MSME की वेबसाइट पर जाकर उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन कराना भी आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। चूंकि डिटर्जेंट के बिज़नेस में केमिकल्स का प्रयोग होता है, संभवतः आपको पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ सकती है।

     

    मशीनरी (Machinery):

     

    डिटर्जेंट यूनिट में कम से कम 3-4 मशीनों की ज़रूरत पड़ती है। रिबन मिक्सचर मशीन, केज मिल और बैंड सीलर मशीन इसमें सबसे अहम हैं। इसके अतिरिक्त आपको तराजू और स्टोरेज ड्रम जैसे अन्य उपकरणों (Equipment) की ज़रूरत पड़ेगी।   

     

    लैंड और लोकेशन:

     

    इस बिज़नेस के लिए आपको कम से कम 1000 स्क्वायर फीट की जगह चाहिए होगी। लेकिन इस दौरान ये बात ज़रूर ध्यान में रखें कि वहां बिजली और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी कोई समस्या न हो।

     

    रॉ मटेरियल:

     

    ऐसिड स्लरी, सोडा ऐश, ट्राइसोडियम फॉस्फेट, सोडियम ट्राइपॉली फॉस्फेट कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोज़, गॉबर्स सॉल्ट, कलर, पर्फ्यूम, ऑप्टिकल ब्राइटनर

     

    मैनपावर:

     

    आप चाहें तो अकेले इस बिज़नेस को संभाल सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं, तो 1-2 लोगों को अपने साथ जोड़ सकते हैं। इससे आपका काम आसान हो जाएगा। इस तरह आपको मशीन ऑपरेट करने से लेकर प्रॉडक्ट के डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे काम में भी मदद मिल जाएगी।

     

    लागत कितनी आएगी?

     

    इस बिज़नेस को महज़ 50-60 हज़ार रुपये के छोटे से निवेश के साथ शुरू किया जा सकता है। लेकिन अगर आपको क्वालिटी, प्रोडक्शन और मुनाफे के लिहाज़ से बेहतर नतीजे चाहिए, तो आपको मशीनरी और रॉ मटेरियल में कम से कम 2 से 2.5 लाख रुपये निवेश करने होंगे। इस तरह आप एक अच्छी डिटर्जेंट मेकिंग यूनिट लगा पाएंगे और डिमांड पर भी खरे उतर पाएंगे।

     

    प्रॉफिट कितना होगा?  

     

    इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मानें तो प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसपोर्ट और रीटेलर मार्जिन को अलग करके भी आप इस बिज़नेस में 25-30 प्रतिशत का नेट प्रॉफिट आसानी से कमा सकते हैं।

     

    प्रॉफिट ब्रेकअप पर एक नज़र-

     

    जानकार बताते हैं कि एक अच्छी क्वालिटी का डिटर्जेंट पाउडर तैयार करने में करीब 25-26 रुपये प्रति किलो की लागत आती है। इसके अतिरिक्त यदि आप पैकेजिंग, लेबर कॉस्ट, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसपोर्ट और रीटेल मार्जिन को भी जोड़ लें, तो भी ये लागत 35-38 रुपये से ऊपर नहीं जाती। वहीं यदि हम डिटर्जेंट के बाज़ार भाव की बात करें, तो ये 50-55 रुपये प्रति किलो की दर से आसानी से बिकता है। इस लिहाज़ से देखें तो आपको एक अच्छा प्रॉफिट मार्जिन मिल जाता है।

     

     

    लोन और सब्सिडी:

     

    अपने बिज़नेस की शुरुआत के लिए आप किसी नेशनल बैंक या प्राइवेट बैंक से लोन के लिए संपर्क कर सकते हैं। वहीं, MSME  द्वारा भी नये बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं। आप MSME की वेबसाइट https://msme.gov.in/ पर रजिस्टर करके या फिर  011-23063288  या 011-23063643 नंबर पर कॉल करके इस संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको बिज़नेस के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 



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