जानें, क्यों करना चाहिए आपको बांस के फर्नीचर का बिज़नेस?

बांस के फर्नीचर बिज़नेस से हो सकती है मोटी कमाई

बांस के फर्नीचर (Bamboo Furniture) का बिज़नेस कमाई की दृष्टि से एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। आइए, इस बिज़नेस को समझने का प्रयास करें।

26 January 2021

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  • आपने कभी हरे सोने (Green Gold) के बारे में सुना है? संभवतः इस पल आपके ज़हन में यही सवाल आ रहा होगा कि सोना तो पीले या सुनहरे रंग का होता है, भला ये हरा सोना किस चिड़िया का नाम है? तो जनाब आपको बता दें कि भारत में बांस को हरा सोना कहा जाता है। आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको बांस से जुड़े एक बिज़नेस आइडिया की जानकारी देंगे, जिसे जानने के बाद संभवतः आप भी इस हरे सोने (Green Gold)” के पीछे भागने लगेंगे। 

     

    बिज़नेस और रोज़गार की हमारी इस श्रृंखला में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे छोटी सी पूंजी के साथ बांस के फर्नीचर (Bamboo Furniture) का बिज़नेस शुरू कर सकते हैं और अपना आने वाला कल संवार सकते हैं।  

     

    इस ब्लॉग में हम आपको इस बिज़नेस से जुड़ी कई अहम बातें बताएंगे, जैसे-

     

    · बांस के फर्नीचर (Bamboo Furniture) का बिज़नेस क्या है?

    · इस बिज़नेस में स्कोप क्या है?

    · ग्लोबल मार्केट की स्थिति क्या है?

    · ये बिज़नेस कैसे शुरू किया जा सकता है?

    · लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या है?

    · किन उपकरणों की ज़रूरत पड़ेगी?

    · कौन से रॉ मटेरियल चाहिए होंगे?

    · मैनपावर कितना लगेगा?

    · लागत क्या आएगी और मुनाफा कितना होगा?

    · फर्नीचर बनाने की ट्रेनिंग कहां से मिलेगी?

    · इस बिज़नेस पर Expert की क्या राय है?

     

    बांस के फर्नीचर (Bamboo Furniture) बिज़नेस पर एक नज़र:

     

    इस बिज़नेस के तहत बांस की कुर्सियां, टेबल , स्टूल , पलंग , सोफा और उसके जैसे दूसरे फर्नीचर तैयार किये जाते हैं और उन्हें बाज़ार में बेचा जाता है। इन दिनों घरेलू और विदेशी बाज़ारों में इनकी अच्छी डिमांड है और लोग इसे टिंबर फर्नीचर (Timber Furniture) यानी लकड़ी के फर्नीचर के विकल्प के तौर पर भी देख रहे हैं। घरों के अलावा कमर्शियल स्पेस में भी बांस से बने फर्नीचर का उपयोग चलन में है।

     

    बांबू फर्नीचर के बिज़नेस से सुलझेगी मुनाफे की गुत्थी

     

     

    स्कोप

    · घर, होटल, रेस्टोरेंट और दफ्तरों में अच्छी डिमांड 

    · लागत की तुलना में मुनाफा अधिक

    · सरकार भी बांस से बने उत्पादों को बढ़ावा दे रही

    · ये एक इको-फ्रेंडली विकल्प  

     

    ऐसे शुरू करें ये बिज़नेस:

     

    आपको बता दें कि इस बिज़नेस को शुरू करना बहुत ही आसान है। भले ही कुछ साल पहले ये बिज़नेस इतना आकर्षक नहीं था, लेकिन बीते कुछ समय में बांस से बने फर्नीचर (Bamboo Furniture) की डिमांड बढ़ी है। साथ ही इस बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भी नियमों में कुछ ढील दी है। लिहाज़ा, कुछ आसान प्रक्रियाओं से गुज़र कर आप इस काम को शुरू कर सकते हैं। आइए, इसे समझने का प्रयास करते हैं।

     

    लाइसेंस/ रजिस्ट्रेशन:

     

    इस बिज़नेस को शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले एक ट्रेड लाइसेंस की ज़रूरत होगी। आप नगर निगम और नगर पालिका जैसे स्थानीय निकायों से ये लाइसेंस हासिल कर सकते हैं। वहीं आपको MSME की वेबसाइट पर उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। इसके अतिरिक्त यदि आप इस काम के लिए कुछ कर्मचारियों को नियुक्त करते हैं तो आपको EPF रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा।

     

    उपकरण (Equipment) :

     

    इस काम के लिए लगभग वही उपकरण उपयोग में लाए जाते हैं जिनसे लकड़ी के फर्नीचर बनते हैं। लिहाज़ा आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। आप बाज़ार से लकड़ी के फर्नीचर बनाने वाले उपकरणों जैसे- आरी, हथौड़ी, रंदा, ड्रिलिंग मशीन, मार्किंग गेज, कटर्स जैसे औज़ारों को खरीद कर अपना काम शुरू कर सकते हैं।

     

    रॉ मटेरियल (Raw Material) :

     

    जैसा कि हम सभी जान चुके हैं कि बांस ही इस बिज़नेस की जान है। इसलिए रॉ मटेरियल के तौर पर आपको बांस चाहिए होगा। इसके अतिरिक्त आपको बेंत की आवश्यकता भी पड़ेगी। 

     

    मैनपावर (Manpower):

     

    यदि आप इस काम को जानते हैं तो आप अकेले ही इस बिज़नेस को शुरू कर सकते हैं। हालांकि जो बिना ट्रेनिंग के इस बिज़नेस को शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए किसी कुशल कारीगर को काम पर रखना बेहतर रहेगा। छोटे स्तर पर 1-2 लोग इस बिज़नेस के लिए काफी हैं।

     

    लागत: 

     

    महज़ 25-30 हज़ार रुपये के छोटे से निवेश के साथ आप इस काम को शुरू कर सकते हैं। हालांकि बेहतर प्रोडक्शन और मुनाफे के लिए 4-5 लाख रुपये तक का निवेश करना एक बेहतर विकल्प साबित होगा।  

     

    मुनाफा:

     

    जानकारों की मानें तो इस बिज़नेस में 20-25 प्रतिशत तक का मुनाफा आराम से कमाया जा सकता है। वहीं, यदि आपके बनाए फर्नीचर बाज़ार में बिकने वाले अन्य फर्नीचर से कुछ अलग हैं, तो संभवतः आपका प्रॉफिट मार्जिन और भी ज़्यादा हो सकता है।  

     

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    प्रशिक्षण (Training):

     

    आपको बता दें कि सरकार की स्किल डेवलपमेंट स्कीम के तहत आप इसकी ट्रेनिंग हासिल कर सकते हैं। स्कीम के तहत बांबू वर्क्स नाम का एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी चलाया जाता है, जिसके तहत बांस के फर्नीचर बनाने के अलावा दूसरे उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। वहीं, राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के तहत स्थानीय स्तर पर कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFC) के माध्यम से ट्रेनिंग मुहैया कराई जाती है, जो कि बिल्कुल फ्री है। अच्छी बात ये है कि सरकार इस दौरान आपको आपके काम के लिए पैसे भी देती है। 

     

    सरकारी प्रयास (Government Initiatives):

     

    हालिया कुछ समय में सरकार ने बांस से जुड़े बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए नियमों में काफी बदलाव किए हैं। 2017 में सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act 1927) में संशोधन कर बांस को पेड़ों की श्रेणी से अलग कर दिया, जिसके बाद बांबू कल्टिवेशन और इससे जुड़ा बिज़नेस काफी आसान हुआ है। वहीं, घरेलू इंडस्ट्री की बेहतरी के लिए आयात नीति में भी कुछ बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा फायदा बांस से जुड़े व्यवसाय को मिलता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के तहत बांस शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है और कई बड़ी संस्थाओं के साथ करार भी किए जा रहे हैं, ताकि बाज़ार के अनुरूप शिल्पियों के हुनर को निखारा जा सके।

     

    कुछ चुनौतियां (Challenges) :

     

    · चीन में बने उत्पादों से प्रतिस्पर्धा

    · टेक्नोलॉजी का अभाव

    · बाज़ार से दूरी

    · हाई लेबर कॉस्ट

     

    बांबू फर्नीचर के बिज़नेस से सुलझेगी मुनाफे की गुत्थी

     

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको बिज़नेस के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।  

     

    लेखक- कुंदन भूत

     



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