अमरूद की बागवानी है फायदेमंद, जानिए इसकी खेती करने के तरीके

अमरूद की बागवानी है किसानों के लिए फायदे का सौदा

अमरूद की बागवानी (Guava farming) यदि वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो किसान इससे कम लागत में लंबे समय तक मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानें कैसे...

25 January 2021

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  • अमरूद (Guava) भारत का लोकप्रिय फल है। अमरूद का बागवानी में एक महत्वपूर्ण स्थान है। पौष्टिक, सस्ता और हर जगह उपलब्ध होने के कारण इसे गरीबों का सेब भी कहते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन फॉस्फोरस और पेक्टिंग्स होते हैं। 

     

    यही कारण है कि इन दिनों अमरूद की बागवानी (guava farming) की ओर किसानों का रुख तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि आप भी अमरूद की उन्नत बागवानी करना चाहते हैं, तो हमारा यह ब्लॉग आपके लिए है।

     

    Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको अमरूद की बागवानी की पूरी जानकारी देंगे, जिससे अमरूद की खेती को आप बेहद सरल भाषा में जान सकेंगे। 

     

    इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे- 

    • अमरूद के लिए ज़रूरी जलवायु
    • अमरूद के लिए उपयोगी मिट्टी
    • अमरूद की खेती का सही समय
    • खेती की तैयारी कैसे करें
    • अमरूद की उन्नत किस्में
    • अमरूद की खेती में सिंचाई
    • अमरूद की फसल में लगने वाले रोग और इलाज
    • अमरूद की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    तो आइए सबसे पहले अमरूद के लिए सही जलवायु (Climate) के बारे में जानते हैं। 

     

    अमरूद के लिए जलवायु

     

    अमरूद की बागवानी गर्म और शुष्क (Dry) दोनों प्रकार की जलवायु में की जा सकती है। भारत में इसकी बागवानी जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी प्रदेशों में की जा सकती है। इसके पौधों में गर्मी और पाला दोनों सहन करने की क्षमता होती है। 

     

    अमरूद की बागवानी के लिए 15 से 30 सेंटीग्रेड का तापमान उपयुक्त होता है।

    ऐसे क्षेत्र जहां सालभर में 100 से 200 सेंटीमीटर बारिश होती है, वहां सफलता पूर्वक इसकी बागवानी की जा सकती है। 


     

    अमरूद के लिए उपयोगी मिट्टी

     

    इसकी बागवानी किसी भी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। 

    मिट्टी की पीएच वेल्यू 6.0 से 7.5 के बीच होनी चाहिए। अमरूद की बागवानी हल्के जलभराव वाली मिट्टी में भी की जा सकती है। 

     

    अमरूद की खेती का समय

     

    अमरूद की बागवानी के लिए जुलाई से सितंबर का महीना सबसे अच्छा होता है। बरसात के दिनों में अमरूद में अच्छी बढ़वार होती है। 

     

    सिंचाई की उचित व्यवस्था हो तो फरवरी-मार्च में भी अमरूद के पौधे लगा सकते हैं।

     

     

    कम लागत में अमरूद की खेती से कमाइए ज्यादा धन

     

     

    खेती की तैयारी कैसे करें

     

    जब निटर की टीम ने अमरूद की बागवानी विषय पर कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीपी शाही से बात की तो उन्होंने बताया कि

     

    “अमरूद की बागवानी से पहले गर्मियों के दिनों में खेत की गहरी जुताई कर लें। जून के महीने में ही अमरूद की नर्सरी तैयार कर लें। गड्ढे की खुदाई भी गर्मी के दिनों में करके खुला छोड़ दें, जिससे गड्ढे के कीट-पतंगे मर जाएं। कुछ दिनों बाद उसमें वर्मी कंपोस्ट, नमी की खली डालकर कर गड्ढे की भराई कर दें।” 

     

    अमरूद की उन्नत किस्में

     

    अमरूद की बागवानी के लिए किस्मों का चुनाव करना बेहद अहम होता है। किसान किस्मों का चुनाव सदैव जलवायु, मिट्टी, बाजार को ध्यान में रखकर ही करें।

     

    आपको बता दें, अमरूद की उन्नत किस्मों में ललित, श्वेता, इलाहाबादी सफेदा, अर्का मृदुला, अर्का अमूल्या, अर्का किरण प्रमुख हैं। 

     

    ललित- यह सेब के लाल रंग की प्रजाति है। इसका गुदे लाल रंग का होता है। इस प्रजाति से प्रति पौधा लगभग 100 किलोग्राम तक उत्पादन होता है।

     

    श्वेता- यह प्रजाति केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ द्वारा विकसित की गई है। इसके फल गोल, सफेद और हल्के पीले रंग के होते है। इस प्रजाति से प्रति पौधे लगभग 90 किलोग्राम का उत्पादन होता है।

     

    इलाहाबाद सफेदा- इस किस्म के फल का आकार मध्यम, गोलाकार, चमकदार और मीठा होता है। इस प्रजाति की खास बात है कि इसे कई दिनों तक भंडारित किया जा सकता है। 


     

    लखनऊ- 49 (सरदार)- इस प्रजाति की फल मध्यम, गोल, खुरदुरी सतह और पीले रंग की होती है। इसमें उकठा रोग का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है। इस प्रजाति से उपज प्रति पौधे 50 से 60 किलोग्राम तक होती है। 


     

    खाद एवं उर्वरक की मात्रा

     

     

    कम लागत में अमरूद की खेती से कमाइए ज्यादा धन

     

     

    अमरूद की खेती में सिंचाई

     

    अमरूद में कम सिंचाई की ज़रूरत होती है। परन्तु पौधे और फलों की वृद्धि और विकास के समय उचित नमी को होना आवश्यक है।

    गर्मियों के मौसम में 10 दिन जबकि सर्दियों में 20 दिन के अंतराल पर अमरूद के पौधों में सिंचाई करनी चाहिए। ज़रूरी हो तो बारिश के दिनों में भी सिंचाई की जा सकती है।

     

    फसल में लगने वाले रोग और इलाज

     

    अमरूद में रोगों का प्रकोप कम होता है। अमरूद की खेती में लगने वाले प्रमुख रोग में उकठा, छाल भक्षक इल्ली प्रमुख है। 

     

    उकठा- यह अमरूद का सबसे विनाशकारी रोग है। इसमें पत्तियां भूरे रंग की हो जाती है। इस रोग से ग्रसित पौधों में एक ग्राम बेनलेट अथवा कार्बेन्डाजिम एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से उकठा रोग से बचा जा सकता है। 

     

    छाल भक्षक इल्ली कीट का प्रकोप-

     

    अमरूद में छाल भक्षक इल्ली नामक कीट पौधों की छाल को खाकर नष्ट कर देती है। इस कीट से बचने के लिए मिट्टी के तेल या पेट्रोल से भीगी हुई रूई छेद में डालकर उपर से गीली मिट्टी से बंद कर देना चाहिए। 

     

    अमरूद की खेती से कमाई

    आपको बता दें, सघन बागवानी (Intensive gardening) से 20 वर्षों तक अमरूद के पौधों से प्रति हेक्टेयर 30 से 40 टन तक फसल ली जा सकती है। इसकी खेती से किसानों को प्रति हेक्टेयर 8 टन से लेकर 15 टन तक उत्पादन मिलता है। बाजार में अमरूद की बिक्री में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती है। किसान को प्रति हेक्टेयर अमरूद की बागवानी से 2-3 लाख तक की कमाई इंकम हो सकती है। 

     

    एक्सपर्ट की सलाह 

     

    कम लागत में अमरूद की खेती से कमाइए ज्यादा धन

     

     

    अंत में हम किसान भाइयों से यही कहना चाहते हैं कि अमरूद की खेती(Amrud ki kheti) करके आप कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। बस ज़रूरत है किसान इसकी बागवानी वैज्ञानिक तरीके से करने की। 

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता 

     



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