व्यावसायिक रूप से करें आंवले की खेती, कमाइए ज़्यादा धन

आंवले की बागवानी है फायदेमंद, जानिए इसकी खेती करने के तरीके

आंवला पोषक तत्वों से भरपूर औषधीय फल है। आंवले की खेती से किसान कम लागत में लंबे समय तक मुनाफा कमा सकते है। ऐसे समझिए...

30 January 2021

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  • ‘एक अनार सौ बीमार’ यह कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी, लेकिन आंवला एक ऐसा फल है जो ‘सौ मर्ज की एक दवा’ है। आंवला कोई सामान्य  फल नहीं बल्कि  पोषक तत्वों से भरपूर एक औषधीय फल है। आंवला विटामिन-सी का प्रमुख स्रोत है। इसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन-ए, विटामिन-ई पाया जाता है। 

     

    आंवला एक ऐसा औषधीय गुण वाला फल है, जिसकी मांग आयुर्वेद में हमेशा से रही है। इसके सर्वोत्तम गुणकारी होने के कारण इसकी मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

     

     

    आंवले की बागवानी (amla farming) की ओर किसानों का रुख तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि आप भी आंवले की उन्नत बागवानी करना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है।

     

    तो आइए Knitter के इस ब्लॉग में आंवले की बागवानी को आसान भाषा में जानें।

     

    इस ब्लॉग में आप जानेंगे

     

    • आंवले के लिए ज़रूरी जलवायु
    • आंवले के लिए उपयोगी मिट्टी
    • आंवले की खेती का सही समय
    • खेती की तैयारी कैसे करें
    • आंवले की उन्नत किस्में
    • आंवले की खेती में सिंचाई
    • खेती में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
    • फसल में लगने वाले रोग और इलाज
    • आंवले से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

     

    सबसे पहले बात आंवले के लिए सही जलवायु (Climate) की। 

     

    जलवायु

     

    आंवला गर्म जलवायु का पौधा है। हमारे देश की जलवायु आंवले की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है। 

     

    आंवले की खेती के लिए अधिकतम तापमान

    बारिश

    बुआई के समय तापमान

    फलों की तुड़ाई के समय तापमान

    46-48°C

    630-800 mm

    22-30°C

    8-15°C


    आंवले के पौधे की खास बात यह है कि यह लू और पाले से भी ज़्यादा प्रभावित नहीं होता है। आपको बता दें कि, जहां बारिश कम होती है, वहां भी आंवले को आसानी से उगाया जा सकता है। 

     

    मिट्टी

     

    आंवले की खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए मिट्टी की पीएच वेल्यू (pH) 6.5 से 9.5 के बीच होनी चाहिए। 

     

    आंवला कंकरीली, पथरीली और अधिक चूने वाली क्षारीय भूमि में भी आसानी से उगाया जा सकता है। बढ़िया जल निकास वाली और उपजाऊ-दोमट मिट्टी हो तो आंवले की पैदावार में काफी बढ़ोतरी होती है। 


    खेती का सही समय

     

    आंवले की बागवानी के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सबसे अच्छा होता है। बरसात के दिनों में आंवले का पौधा लगाने से इसकी बढ़वार अच्छी होती है। सिंचाई की उचित व्यवस्था हो तो फरवरी-मार्च में भी आंवले के पौधे लगा सकते हैं।

     

    खेती की तैयारी ऐसे करें

     

    1. पौधे की रोपाई से पहले (जून में) एक मीटर गहरा गड्ढा खोद लें।
    2. गड्ढे की दूरी कम से कम 9-10 मीटर रखें।
    3. जब बारिश का मौसम आए तो खोदे गए गड्ढों में पानी भर दें।
    4. पानी भरने से पहले इन गड्ढों को पूरी तरह खाली कर दें।
    5. खोदे गए गड्ढे में 50 से 60 किलो  गोबर की खाद भर दें।
    6. 10 से 20 किलो बालू, 10 किलो जिप्सम और वर्मी कंपोस्ट खाद मिला लें।
    7. तैयार खाद के मिश्रण को हर गड्ढे में लगभग 5 किलो भर दें।
    8. खाद को भरने के 20 से 25 दिनों बाद पौधा रोपण करें।

     

    आंवले की उन्नत किस्में

     

    चकैया: इसके पौधे फैलावदार और अधिक फल देने वाले होते हैं। इस किस्म का औसत वजन 33 ग्राम होता है। यह अन्य किस्मों में परागण के लिए अच्छा है।

     

    कंचन: इसके फल छोटे होते हैं। इसका औसत वजन 30.2 ग्राम होता है। यह किस्म अचार के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

     

    कृष्णा: इसके फल मध्यम और बड़े आकार के होते हैं। यह कम रेशे वाले और पारदर्शी होते हैं। यह मुरब्बा बनाने के लिए उपयुक्त हैं।

     

    नरेंद्र आंवला-6: फलों का आकार मध्यम गोल, चमकदार और गूदा कम रेशायुक्त होता है। इसका औसत वजन 39 ग्राम होता है। यह मुरब्बे के लिए उपयुक्त है।

     

    नरेंद्र आंवला-7: शुष्क क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त है। इस किस्म में फल ज़्यादा और  जल्दी आते हैं।

     

    नरेंद्र आंवला-10: इसके फल आकर्षक, मध्यम से बड़े होते हैं। औसत वजन 42 ग्राम होता है। इसके गूदे में रेशे अधिक होते हैं।

     

    खेती में सिंचाई

     

    आंवले में कम सिंचाई की ज़रूरत होती है। परन्तु पौधे और फलों की वृद्धि और विकास के समय उचित नमी  होना आवश्यक है।

    गर्मियों के मौसम में 10-15 दिन जबकि सर्दियों में 20-25 दिन के अंतराल पर आंवले के पौधों में सिंचाई करनी चाहिए। ज़रूरी हो तो बारिश के दिनों में भी सिंचाई की जा सकती है।

     

    खाद और उर्वरक प्रबंधन

     

    आंवले की पोषण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पौधों को खाद और उर्वरकों की संतुलित मात्रा देना  आवश्यक  है। कृषि विशेषज्ञों की राय लेकर ही खाद और उर्वरक पौधों को दें। खाद की मात्रा मुख्य रूप से मिट्टी की उर्वरकता, पौधों की आयु और उत्पादन पर निर्भर करती है। 

     

    पौधे की आयु 

    (वर्ष)

    नाइट्रोजन (ग्राम)

    फास्फोरस

     (ग्राम)

    पोटाश

     (ग्राम)

    गोबर की खाद

    (किलोग्राम)

    1

    100

    50

    100

    5

    2

    200

    100

    200

    10

    3

    300

    150

    300

    15

    4

    400

    200

    400

    20

    5

    500

    250

    500

    25

    6

    600

    300

    600

    30

    7

    700

    350

    700

    35

    8

    800

    400

    800

    40

    9

    900

    450

    900

    45

    10

    1000

    500

    1000

    50

     

    फसल में लगने वाले रोग 

     

    यह एक ऐसी फसल है, जिसमें रोगों का प्रकोप कम होता है। आंवले की फसल में रस्ट रोग, उकठा रोग, काली फफूंद, नीली फफूंद, एन्थ्रेकनोज, मृदू सड़न, फल सड़न रोग प्रमुख हैं।

     

    जब Knitter की टीम ने आंवले की खेती विषय पर कृषि विज्ञान केंद्र, बहराइच के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीपी शाही से बात की तो उन्होंने बताया कि

    “आंवले के पौधों में रोग न लगे इसके लिए किसानों को खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसानों को चाहिए कि वे समय-समय पर आंवले के पौधों की कटाई-छंटाई करते रहें। जब भी किसी प्रकार का रोग आंवले  के पौधों में लगे, आप तुरंत कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों या आंवले के सफल किसान से ज़रूर संपर्क करें।” 

     

     

    खेती से कमाई

     

    आंवले की खेती किसानों के लिए गेहूं-धान का बढ़िया विकल्प साबित हो सकती है। यदि किसान आंवले की वैज्ञानिक विधि से खेती करे तो प्रति पौधे 120 किलो से लेकर 130 किलोग्राम तक फल प्राप्त कर सकते हैं। 

    आपको बता दें, एक एकड़ में लगभग 50 क्विंटल आंवला पैदा होता है। किसानों को एक एकड़ से एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। जबकि एक एकड़ में पूरे वर्ष में लगभग 25 से 30 हजार रुपये की लागत आती है।

     

     

    अंत में हम किसान भाइयों से यही कहना चाहते हैं कि आंवले की खेती से आप कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। बस ज़रूरत है किसान इसकी बागवानी वैज्ञानिक तरीके से करें। 

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता

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