बेहतर मुनाफे के लिए करें बकरी पालन का बिज़नेस

बकरी पालन में है कितना मुनाफा, आइए जानें

बकरी पालन आपके जीवन में मुनाफे का स्वाद घोल सकता है। यदि आप कम लागत में अधिक कमाई करना चाहते हैं, तो ये बिज़नेस आइडिया आपको सफलता दिला सकता है।

02 February 2021

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  • भारत में सदियों से बकरियां पाली जाती रही हैं। लेकिन, बीते कुछ सालों में बकरी पालन (Goat Farming) का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ा है। हालिया पशु गणना के आंकड़े भी कुछ इसी ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2019 में की गई गणना के अनुसार, बकरियों की संख्या में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में बकरियों की संख्या करीब 15 करोड़ तक पहुंच चुकी है। हम इन आंकड़ों से आपको इसलिए अवगत करा रहे हैं, ताकि आप बकरी पालन के महत्व को समझ सकें। आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको इसी विषय पर विस्तार से जानकारी देंगे।

     

    “बिज़नेस और रोज़गार” की हमारी श्रृंखला में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे बकरी पालन का व्यवसाय (Goat Farming Business) शुरू कर अपनी आजीविका सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही ये भी बताएंगे कि बिज़नेस का ये विकल्प कितना व्यावहारिक है। तो चलिए, ब्लॉग के इस सफर को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि इस ब्लॉग में आपको बकरी पालन पर कौन सी जानकारियां दी जाएंगी।

     

    इस ब्लॉग में आपको बताया जाएगा- 

     

    • बकरी पालन का बिज़नेस क्या है?
    • इसमें स्कोप क्या है?
    • इसे कैसे शुरू किया जा सकता है?
    • कौन सी नस्लें पालनी चाहिए?
    • लागत कितनी आएगी?
    • मुनाफा कितना होगा? 
    • लोन और सब्सिडी का प्रावधान क्या है?
    • एक्सपर्ट की राय क्या है?

     

    बकरी पालन के बिज़नेस पर एक नज़र

     

    इस बिज़नेस में व्यावसायिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बकरियां पाली जाती हैं। इसके अतिरिक्त उनसे मिलने वाले उत्पाद जैसे कि दूध, मीट और फाइबर जैसी चीज़ें बेची जाती हैं। कमाई के लिहाज़ से भी ये एक अच्छा व्यावसायिक विकल्प है। आपको बता दें कि पुरुषों के अलावा महिलाएं भी इस बिज़नेस को आसानी से कर सकती हैं।

     

    स्कोप

    • अच्छी मांग
    • गाय-भैंस पालने की तुलना में आसान
    • कम लागत में ज़्यादा मुनाफा
    • मज़बूत स्थानीय बाज़ार

     

    उत्पाद

    • दूध- पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर
    • मीट- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग 
    • खाल- चमड़ा उद्योग में भारी डिमांड
    • खाद- विष्ठा (लींद/लेड़ी) से खाद का निर्माण 

     

    लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

     

    भले ही बकरी पालन कृषि के तहत आता हो, मगर यदि आप कमर्शियल प्रॉफिट के लिए ये काम करते हैं, तो आपका इसके लिए परमिशन लेना ज़रूरी है। आप इसके लिए स्थानीय पशु पालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

     

    लैंड और लोकेशन

     

    आप बकरी पालन के लिए अपने घर के आस-पास ही कोई जगह चुन सकते हैं। हां, मगर इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि जगह ऐसी हो, जहां उन्हें भरपूर खुली हवा और पीने का साफ पानी मिल सके। 

     

    वहीं, यदि उनके आवास की बात की जाए, तो इस पर आपको बमुश्किल एक बार ही खर्च करना पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक वयस्क बकरी को करीब 10 वर्ग फीट की जगह चाहिए होती है, तो बकरे को करीब 15 वर्ग फीट की जगह। वहीं, बकरी के बच्चे के लिए 5 से 6 वर्ग फीट की जगह पर्याप्त होती है। इस बात का ध्यान रखकर आप शेड आदि के निर्माण के लिए जगह निर्धारित कर सकते हैं।

     

    नस्लों का चयन

     

    भारत में बकरियों की 20 से भी ज़्यादा नस्लें पाई जाती हैं। अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इन्हें पाला जा सकता है। कुछ नस्लें अच्छा दूध देती हैं, तो कुछ मीट प्रोडक्शन के लिहाज़ से अच्छी होती हैं। लिहाज़ा, आप अपनी प्राथमिकता को ध्यान में रखकर इनका चुनाव कर सकते हैं।

     

    • दुधारू नस्लें: जखराना, सूरती, बरबरी, ऐंग्लो-न्यूबियन और जमुनापारी
    • ऊन देने वाली नस्लें: चेगू, ब्लैक बंगाल और कश्मीरी
    • मांस उत्पादन वाली नस्लें: मारवाड़ी, ओस्मानाबादी, सिरोही, सोजत

     

    आहार

     

    बकरी पालन में अच्छी खुराक बहुत मायने रखती है। सही खुराक से उन्हें सही पोषण प्राप्त होता है, जो इस बिज़नेस की सबसे बड़ी आवश्यकता भी है। बकरियां पत्ते और हरा चारा खाना पसंद करती हैं। इसके अतिरिक्त आप दाल के टुकड़े व छिलके, गेहूं का भूसा, मक्का, चना, मटर, चोकर, खली और थोड़ा सा नमक दे सकते हैं। आप चाहें, तो कुछ सप्लीमेंट्स भी दे सकते हैं।

     

     बेहतर मुनाफे के लिए करें बकरी पालन का बिज़नेस

     

    जानकारों का ये भी मानना है कि बकरियों को उनकी उम्र के अनुसार आहार दिया जाना चाहिए। 4 से 5 महीने की उम्र में हरी पत्तियां और दाने देने चाहिए। करीब 1 साल का होने पर 40:60 के अनुपात में दाना और चारा दिया जा सकता है। इसी तरह, दुधारू बकरी तथा ब्रीडिंग करने वाले बकरे को भी सही अनुपात में चारा और अनाज दिया जाना चाहिए।

     

    प्रजनन

     

    एक बकरी करीब 1.5 वर्ष में प्रजनन योग्य हो जाती है। लिहाज़ा बहुत कम समय में इनकी संख्या में वृद्धि होती है। खास बात ये है कि बकरियां 14 महीने में दो बार प्रजनन करती हैं। वहीं, यदि प्रजनन के दौरान बच्चों की संख्या की बात की जाए, तो एक बार में 2-3 बच्चे हो ही जाते हैं।

     

    लागत

     

    करीब 1.5 से 2 लाख रुपये की छोटी सी पूंजी के साथ आप ये बिज़नेस शुरू कर सकते हैं। यदि आप बड़े स्तर पर इस काम को शुरू करना चाहते हैं, तो आप 10 से 20 लाख का निवेश भी कर सकते हैं।

     

    मुनाफा

     

    जानकारों की मानें तो इस बिज़नेस में दोगुने से भी ज़्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। इस बिज़नेस में इससे अधिक की उम्मीद भी की जा सकती है।

     

    लोन और सब्सिडी

     

    बकरी पालन के बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार आर्थिक मदद भी प्रदान करती है। आप NABARD के ज़रिए लोन और सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। आपके प्रोजेक्ट का आकलन करने के बाद ही आपको इसका लाभ मिलता है। अधिक जानकारी के लिए आप नाबार्ड या स्थानीय पशु पालन विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।

     

     

     बेहतर मुनाफे के लिए करें बकरी पालन का बिज़नेस

     

    ध्यान देने योग्य बातें

     

    • बकरियों को बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर उनका टीकाकरण अवश्य कराएं।
    • हर 3 से 4 महीने के अंतराल में डीवर्मिंग ज़रूर कराएं।
    • कम से कम 6 फीट ऊंचा शेड बनाएं।
    • बकरियों को सूखी जगह पर ही रखें।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। Knitter पर आपको बिज़नेस के अलावा कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।  

     

    ✍️     

    लेखक- कुंदन भूत

      

     



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