बेहतर मुनाफे के लिए करें बकरी पालन, यहां जानें तरीका

बेहतर मुनाफे के लिए करें बकरी पालन, यहां जानें तरीका

मुर्गी के बाद बकरी पालन किसानों का सबसे पसंदीदा व्यवसाय है। गाय-भैंस की तुलना में इसमें लागत कम होती है। आइए, इसे जानें।

16 March 2021

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  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से कौन परिचित नहीं है? वह रोजाना दूध पीते थे, लेकिन गाय या भैंस का नहीं, बल्कि बकरी का। बकरी के दूध में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और फिट रखने में काफी मददगार होते हैं। 

     

    वैसे बाज़ार में बकरी का दूध ही नहीं बल्कि उसके मांस की मांग भी अधिक है। यदि खेती के साथ बकरी पालन भी किया जाए, तो किसानों को इससे अच्छा मुनाफा होगा। गाय-भैंस की तुलना में बकरी पालन आसान और सस्ता होता है। यही कारण है कि इसे ‘गरीबों की गाय’ भी कहते हैं। 

     

    तो आइए, Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको आसान और सरल भाषा में बकरी पालन (Goat Farming) समझाएंगे। 

     

    हम आपको बताएंगे-

     

    • बकरी के लिए आवश्यक जलवायु
    • बकरी के आवास की जानकारी
    • बकरी के लिए आहार और खानपान
    • बकरी की प्रमुख नस्लें
    • बकरी में लगने वाले रोग और इलाज़
    • बकरी पालन की लागत और कमाई
    • बकरी पालन के लिए ट्रेनिंग कहां से लें?
    • बकरी पालन से जुड़े  ज़रूरी टिप्स
    • एक्सपर्ट की राय

     

    वैज्ञानिक विधि से करें बकरी पालन, पाएं दोगुना मुनाफा

     

    आवश्यक जलवायु 

     

    हमारे देश की जलवायु बकरी पालन के लिए बहुत अनुकूल है। बकरी पालन ठंडी और गर्म जलवायु में किया जा सकता है। अधिक बारिश वाले इलाके में बकरी  पालन कठिन है। पर्वतीय इलाकों में बकरी  पालन आसान होता है। 

     

    आवास की जानकारी

     

    • बकरियों के विकास और अधिक उत्पादन के लिए साफ और आरामदेह आवास की ज़रूरत होती है। 
    • आवास के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करें, जहां हवा और रोशनी आसानी से शेड के अंदर आ सके। 
    • बाड़े की फर्श ज़मीन से 2-3 फीट की ऊंचाई पर बनाएं।
    • गाभिन बकरियों और मेमनों के लिए अलग से बाड़े का निर्माण कराएं। 

     

    आहार और खानपान

     

    बकरी एक बार में न खाकर, हर समय थोड़ा-थोड़ा खाना पसंद करती है। बकरियों को हरी पत्तियां, घास, चोकर भी चारे के रूप में दिया जा सकता है। बकरियों को 7 से 8 घंटे खुले स्थान में चराना चाहिए, जिससे उनका विकास अच्छा होता है। बकरियों को दिन में 3 बार भोजन ज़रूर दें। इन्हें जंगलों में चराकर भी आसानी से पाला जा सकता है। 

     

    नस्लें 

     

    बकरी पालन के लिए बेहद ज़रूरी है कि अच्छी  नस्लों का चुनाव करें। कुछ नस्लें अधिक दूध देती हैं,  तो कुछ मीट प्रोडक्शन के लिहाज़ से अच्छी होती हैं। लिहाज़ा, अपनी प्राथमिकता को ध्यान में रखकर इनका चुनाव करें।  

     

    जैसे-

     

    1. दुधारू नस्लें- जमुनापारी, जखराना, सूरती, बरबरी और बीटल 
    2. मांस उत्पादक नस्लें- ब्लैक बंगाल, उस्मानाबादी, मारवाड़ी, मेहसाणा, संगमनेरी, कच्छी और सिरोही 
    3. ऊन उत्पादक नस्लें- कश्मीरी, चांगथांग, गद्दी, चेगू 

     

    देसी नस्लों के मुकाबले संकर नस्लों का चुनाव करना चाहिए। संकर नस्ल की बकरियां अच्छा मुनाफा देती है। 

     

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    रोग और इलाज़

     

    बकरियों में अन्य पशुओं की तुलना में रोग कम लगते हैं। इनको 4 बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। 

    1. पीपीआर (PPR)
    2. गोट पॉक्स (Goat Pox)
    3. खुरपका और मुंहपका रोग 
    4. एंथ्रेक्स और ब्रुसेलोसिस

     

    इन रोगों से बचाव का सबसे सरल और तरीका है समय पर टीकाकरण। इसका टीका सरकारी अस्पताल में सस्ती दर पर आसानी से मिल जाएगा।  

     

    लागत और कमाई

     

    व्यावसायिक रूप से बकरी पालन शुरू करने के लिए 2-3 लाख रु. की ज़रूरत होती है। लेकिन, आप छोटे या सीमांत किसान हैं तो इसकी शुरुआत आप 10 बकरियों और एक बकरे से भी कर सकते हैं। 

     

    100 बकरियों की लागत की बात करें तो शुरुआती दिनों में आपको 4-5 लाख रु. की जरूरत पड़ेगी। इससे आप बकरियों के लिए शेड, आहार और उनकी देखभाल की ज़िम्मेदारी आसानी से उठा पाएंगे। 

     

    एक बार इतने रुपये खर्च करने पर आपको दूसरे साल 2-3 लाख रु. की आमदनी होगी, जो समय के साथ बढ़ती जाएगी। 

     

    बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण 

     

    बकरी पालन के लिए सरकारी योजना और ट्रेनिंग की जानकारी नज़दीकी पशु अस्पताल या कृषि विज्ञान केंद्र से ले सकते हैं। इसके लिए समय-समय पर सरकार की ओर से ट्रेनिंग कराई जाती है। 

     

    इसके अलावा भारत में बकरियों पर अनुसंधान और ट्रेनिंग के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा में केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई है, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र है। 

     

    अधिक जानकारी के लिए आप इस संस्थान के फोन नंबर  0565- 2763320 पर कॉल कर सकते हैं। 

     

    संस्थान का पूरा पता है- केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, पोस्ट- फरह- 281122, जिला- मथुरा (उ.प्र.) 

     

    बकरी पालन के लिए ज़रूरी टिप्स

    1. गांव के आस-पास ही बकरी पालन शुरू करें 

     

    2. शेड को ज़मीन से 2-3 फीट की ऊंचाई पर बनाएं 

     

    3. आवास को साफ-सुथरा और हवादार रखें

     

    4. बकरी फार्म, पशु अस्पताल के नज़दीक खोलें

     

    5. 20 बकरियों के बीच 1 बकरा ज़रूर रखें

     

    6. मेमनों का 8-10 माह बाद ही प्रजनन कराएं

     

    7. गाभिन बकरियों को अतिरिक्त आहार दें

     

    8. बकरियों को नियमित रूप से कृमि नाशक दवा दें

     

    9. बीमार बकरी का उपचार डॉक्टर की सलाह पर ही करें

     

    10. बीमारियों से बचने के लिए समय पर टीकाकरण कराएं

     

    वैज्ञानिक विधि से करें बकरी पालन, पाएं दोगुना मुनाफा

     

    संक्षेप में कहें तो बकरी पालन एक लाभदायक व्यवसाय है। इस व्यवसाय से छोटे और सीमांत किसान आसानी से अपनी आय को दोगुनी कर सकते हैं। बशर्ते, किसान बकरी पालन को वैज्ञानिक तरीके से करें।

     

    यदि आप इस तरह की और जानकारियां जानना चाहते हैं तो Knitter पर हमारे अन्य ब्लॉग ज़रूर पढ़ें। साथ ही ब्लॉग को शेयर करना न भूलें। 

     

    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता



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