प्याज-लहसुन की फसल नहीं होगी खराब, इन बातों का रखें ख्याल

प्याज-लहसुन की फसल नहीं होगी खराब, इन बातों का रखें ख्याल

प्याज़ और लहसुन की खुदाई और भंडारण के समय कई सावधानियां अपनाकर फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है।

11 January 2021

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  • प्याज़ और लहसुन ऐसी फसलें हैं जो किसानों की आजीविका में सुधार ला सकती हैं। भारतीय भोजन में प्याज़ और लहसुन ज़रूरी सामग्री के तौर पर इस्तेमाल होता है इसलिए बाज़ार में इसकी मांग साल भर रहती है। किसानों को भी मंडियों में लहसुन और प्याज़ की अच्छी कीमतें मिलती हैं। व्यापारिक दृष्टि से लहसुन और प्याज़ की खेती करने वाले किसानों को इनकी बिजाई से लेकर बाज़ार पहुंचने तक कई सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। बाज़ार में सालभर इन फसलों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए इनका भंडारण करना भी ज़रूरी होता है। सही तरीके से फसल की खुदाई और भंडारण न होने पर कई बार किसानों की फसल खराब भी हो जाती है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। Knitter के इस ब्लॉग में प्याज़ और लहसुन की खुदाई और भंडारण संबंधी बातों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।

     

    प्याज़ और लहसुन की खुदाई करने का सही समय 

     

    प्याज और लहसुन के भंडारण के समय बरतें सावधानियां

     

    भारत में प्याज़ की खेती रबी और खरीफ दोनों फसलों के समय की जाती है। खरीफ की फसल की खुदाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है जबकि रबी के प्याज़ की खुदाई अप्रैल-मई में की जाती है। वहीं, लहसुन की खेती केवल रबी की फसल के समय में होती है। इसकी खुदाई का सही समय मार्च से अप्रैल के बीच होता है।

     

    प्याज़ और लहसुन के तैयार हो जाने पर उनकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधा सतह के पास से कमज़ोर हो जाता है। इस समय पर आप प्याज़ और लहसुन की फसल को खुदाई करके निकाल सकते हैं। वहीं, खरीफ के प्याज़ में नमी के कारण उसके पौधे में पीलापन नहीं आता और वो बढ़ता रहता है। इसलिए प्याज़ के तैयार होने पर उसकी पत्तियों को ज़मीन पर गिरा देना चाहिए और उसके 10-15 दिनों बाद खुदाई करनी चाहिए।

     

    खुदाई करने की सही विधि

     

    प्याज़ और लहसुन के तैयार होने पर आमतौर पर उसे कुदाल के साथ खोदकर पौधे समेत उखाड़ा जाता है। कई जगहों पर हल्की मिट्टी होने के चलते पौधे ऐसे ही उखड़ जाते हैं। हालांकि हमेशा कुदाल के इस्तेमाल की ही सलाह दी जाती है ताकि प्याज़ और लहसुन के कंद अच्छे से उखड़ सकें और नुकसान कम हो।

     

    प्याज़ और लहसुन को सुखाना

    प्याज़ की खुदाई के बाद कंदों को पत्तियों के साथ एक सप्ताह तक सुखाएं। इसके बाद पत्तियों को गांठ के 2-3 सेंटीमीटर ऊपर से काट दें और कंद को 1-2 हफ्ते तक और सूखने दें। 

     

    लहसुन की खुदाई के बाद उसे एक-दो दिन तक ही सुखाना चाहिए। ज्य़ादा सुखाने से लहसुन खराब हो सकता है। वहीं, अगर आपके पास स्टोर करने के लिए जगह है तो पत्तियों के साथ ही लहसुन को स्टोर करना बेहतर रहता है अन्यथा इसकी पत्तियों को भी गांठ के 2-3 सेंटींमीटर के पास से काट के निकाल लें।

     

    ध्यान रहे कि बहुत तेज धूप में प्याज़ और लहसुन को न सुखाएं। यदि आपके इलाके में बहुत तेज़ धूप पड़ती है तो आप इसे छाया में ही सुखाएं।

     

    भंडारण

     

    आमतौर पर प्याज़ और लहसुन का भंडारण मई से नवबंर माह के बीच लगभग चार से छह महीनों की अवधि तक किया जाता है। उसे सड़न से बचाने और दूसरे रोगों से मुक्त रखने के लिए उसकी सही देखभाल करना ज़रूरी है। इसके लिए स्टोर में पर्याप्त जगह और अच्छे वेंटिलेशन का खास ख्याल रखें इसके अलावा प्याज़ और लहसुन को स्टोर करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें-

     

    • स्टोर ऊंची जगह पर हो, जिससे सीलन का खतरा न रहे।
    • स्टोर में पर्याप्त जगह हो, ताकि कांट-छांट और पैकिंग जैसे काम आसानी से किए जा सकें।
    • स्टोर में अच्छे वेंटिलेशन हो ताकि प्याज में नमी पैदा ना हो, जिससे सड़न का खतरा रहता है।
    • प्याज़ को बैग के बजाए खुले में रखें ताकि दबाव पड़ने से वो खराब न हो।
    • महीने में एक बार कांट-छांट जरूर करें ताकि एक प्याज़ के सड़ जाने पर सभी खराब न हों।
    • स्टोर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रखें, जरूरत हो तो कूलर, एसी का इस्तेमाल करें।

     

    लहसुन और प्याज़ की खेती में ज्य़ादातर नुकसान भंडारण में होता है। प्याज़ और लहसुन की खुदाई से लेकर भंडारण तक आप इन सब बातों का ख्याल रखेंगे तो फसल खराब नहीं होगी और आप ज्य़ादा मुनाफा कमा पाएंगे। आप Knitter चैनल पर ऐसे और भी ब्लॉग पढ़ सकते हैं जिसमें आप किसानी से जुड़ी नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और अन्य कई जानकारियां ले पाएंगे।

     

    लेखक-कुंदन भूत   

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