फूलों की खेती से आएगी मुनाफे की महक, जानिए कैसे

फूलों की खेती से आएगी मुनाफे की महक, जानिए कैसे

बागवानी में फल-फूल, सब्ज़ी और मशरूम नगदी फसलें हैं। ये किसानों को ज़्यादा मुनाफा देती हैं। इनमें फूलों की खेती लोकप्रिय है।

10 February 2021

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  • फूलों का नाम सुनते ही हमें अनेक तरह की सुगंध महसूस होने लगती है। आजकल तो हर अवसर पर फूलों का उपयोग किया जाता है, इसलिए बाज़ार में फूलों (Flowers) की मांग भी बढ़ती जा रही है। खास तौर पर शादियों में फूलों की मांग बहुत ज़्यादा होती है। यही कारण है कि किसानों का रुख अब नकदी फसलों पर ज़्यादा है। उसमें भी फूलों की खेती (floriculture) सबसे आगे है।  यदि आप भी फूलों की खेती करना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके काम का है। 

     

    इसमें आप जानेंगे-

    • फूलों का वैश्विक बाज़ार
    • फूलों की खेती कैसे करें
    • खेती के लिए उपयोगी मौसम, जलवायु और मिट्टी
    • फूलों वाली फसलें
    • गुलाब की खेती
    • गेंदे की खेती
    • फूलों का बाज़ार
    • फूलों की खेती में लागत और कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    फूलों का वैश्विक बाज़ार

     

    विश्व में अमेरिका फूलों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। जहां प्रति वर्ष 10 बिलयन डॉलर से अधिक के फूलों की खपत होती है। इसके बाद उपभोग के मामले में जापान का स्थान है जहां प्रति वर्ष 7 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के फूलों की खपत होती है। 

     

    फूलों की खेती भारत में सदियों से की जा रही है, लेकिन इनका उत्पादन निजी उपयोग के लिए ही होता था। अब समय बदल गया है। अब फूलों की व्यावसायिक खेती भी की जाने लगी है। 

     

    भारत ने वर्ष 2019-20 के दौरान विश्वभर में 16,949.37 मीट्रिक टन फूलों के उत्पाद का निर्यात किया जिससे 541.61 करोड़ रुपए अर्जित किए। 

     

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    ऐसे करें फूलों की खेती

    • फूलों की खेती शुरू करने से पहले बाज़ार, जलवायु और मिट्टी की पूरी जानकारी लें।,   
    • जिस फूल की खेती करें, पहले बाज़ार में उसकी मांग के बारे में पता कर लें।  
    • नज़दीकी ज़िला उद्यान अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों या इस क्षेत्र के सफल किसानों से राय ज़रूर  लें।
    • फूलों की खेती शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लें ताकि  चुनौतियां कम हों । 
    • खेती की हर एक एक्टिविटी का रिकॉर्ड बनाकर रखें, जिससे हर ज़रूरत को समझा जा सकता है।

     

    फूलों की खेती के लिए मौसम, जलवायु, मिट्टी

     

    आपके इलाके में किस फूल के लिए कौन-सी जलवायु उपयुक्त है? इसके लिए ज़िला उद्यान अधिकारी या कृषि विभाग से संपर्क करें। ध्यान रहे कि फूलों का चयन सदैव जलवायु, मिट्टी और मौसम के आधार पर ही करें। 

     

    फूलों की खेती के लिए जल-निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। 

     

    फूलों वाली फसलें

    • गुलाब
    • गेंदा
    • जरबेरा
    • रजनीगन्धा
    • ग्लेडियोलस 
    • गुलदाउदी
    • एंथुरियम, 
    • एस्टर 
    • बेली चमेली
    • रजनीगंधा

     

    अब बात गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती की

     

    गुलाब की खेती गुलाब प्रकृति का एक अनमोल फूल है। इसकी आकर्षक बनावट, सुन्दर आकार, रंग और सुगंध की वजह से लोग इसे ज़्यादा पसंद करते हैं।  

     

    गुलाब ठंड और शुष्क जलवायु का पौधा है। हालांकि, साल भर गुलाब की खेती (Rose farming) की जा सकती है। 

     

    मिट्टी की बात करें तो इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी, जिसका पीएच मान 5.3 से 6.5 के बीच होना चाहिए।

     

    गुलाब की खेती के लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड और रात का तापमान 12 से 14 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक नहीं होनी चाहिए।

     

    गेंदे की खेती 

     

    गेंदे की खेती हमारे देश में सभी राज्यों में की जाती है। गेंदे की खेती (marigold farming) के लिए ठंडी और सम-शीतोष्ण जलवायु सही होती है।

     

    इसकी खेती सर्दी, गर्मी और बारिश तीनों मौसमों में की जा सकती है। इसकी खेती के लिए 14 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान उपयुक्त होता है।

     

    मिट्टी (Soil) की बात करें तो गेंदे की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। लेकिन, बलुई दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 7.0-7.5 हो, ऐसी  मिट्टी में पैदावार अच्छी होती है। 

     

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    फूलों के लिए संभावित बाज़ार

     

    फूलों की मांग लगातार बढ़ रही है। आज के दौर में यह ट्रेंडिंग कृषि व्यापार बन गया है। फूलों की खेती में अन्य फसलों की तुलना में ज़्यादा पैदावार देने की क्षमता है। भारतीय फूलों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादा है। संयुक्त राज्य अमरीका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात भारतीय फूलों के  प्रमुख आयातक देशों में शामिल हैं। 

     

    फूलों की खेती में लागत और कमाई

     

    किसान अब परंपरागत फसलों की खेती से हटकर फूलों की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक प्रताप बताते हैं कि एक हेक्टेयर में लगभग 25 हज़ार रु. का खर्च आता है। इसमें निराई-गुड़ाई और खाद-सिंचाई का खर्च शामिल है। इससे प्रतिवर्ष आपको करीब 75 हज़ार रु. की कमाई हो सकती है।

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता 

     



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