जानें, ड्रिप इरिगेशन तकनीक क्यों बन चुकी है समय की मांग?

जानें, ड्रिप इरिगेशन तकनीक क्यों बन चुकी है समय की मांग?

टपक सिंचाई (Drip Irrigation) की तकनीक किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए, इसे समझने का प्रयास करें।

11 January 2021

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  • हम अक्सर लोगों से ये बात सुनते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं जो देश की कृषि व्यवस्था की वास्तविकता से परिचित हैं। भारतीय कृषि क्षेत्र को आज कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की सिंचाई संबंधी समस्या इन्हीं में से एक है। 

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम किसानों की सिंचाई संबंधी समस्या पर ही बात करेंगे और बताएंगे कि कैसे सिंचाई की टपक प्रणाली यानी ड्रिप इरिगेशन तकनीक किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। तो चलिए, जानकारियों के इस सफर को आगे बढ़ाते हैं आपको ड्रिप इरिगेशन के बारे में विस्तार से समझाते हैं।

     

    टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) क्या है?

     

    यह सिंचाई की एक उन्नत तकनीक है, जिसकी मदद से पानी की बचत की जाती है। इसके ज़रिए पेड़-पौधों को बूंद-बूंद करके पानी पहुंचाया जाता है। ये पानी सीधे उनकी जड़ों तक पहुंचता है और उन्हें संतुलित पोषण मिलता है। पौधे उतना ही पानी अब्ज़ॉर्ब करते हैं जितनी उन्हें आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त इस प्रणाली के माध्यम से पानी के साथ-साथ पेड़-पौधों की जड़ों तक फर्टिलाइज़र्स पहुंचाना भी आसान होता है।

     

     जानें, क्या है ड्रिप इरिगेशन?

     

    ड्रिप इरिगेशन के फायदे:

    • इससे पानी की बचत होती है।
    • उत्पादन में वृद्धि होती है।
    • मिट्टी का कटाव नहीं होता।
    • खेतों में समान रूप से पानी का वितरण हो पाता है।
    • खरपतवारों की समस्या होने की आशंका भी कम हो जाती है।
    • खेत की भूमि समतल न होने पर भी बेहतर सिंचाई हो पाती है।
    • सबसे बड़ी बात, यह हर तरह की खेती में उपयोगी है। फिर चाहे आप सामान्य तरीके से खेती कर रहे हों या फिर ग्रीन हाउस फार्मिंग या शेड नेट फार्मिंग।

     

    भारत में ड्रिप इरिगेशन की स्थिति

     

    भारत में 80 के दशक में ड्रिप इरिगेशन की तकनीक को अपनाना शुरू हो गया था। आज करीब 4 दशक बीत चुके हैं और ये तकनीक लाखों किसानों का जीवन बदल चुकी है। हालांकि आज भी किसानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो इस तकनीक से दूर है। लेकिन जिस तेज़ी से देश में पानी की समस्या बढ़ रही है, वक्त आ गया है कि हम इस तकनीक की असली ताकत को पहचानें और कृषि क्षेत्र को नई बुलंदियों पर ले जाएं।

     

    जैसा कि आपको पता है कि भारत सरकार ड्रिप इरिगेशन को लगातार बढ़ावा दे रही है। नेशनल मिशन ऑन माइक्रो इरिगेशन (NMMI) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी पहल इस बात का सबूत है कि देश में सिंचाई संबंधी समस्याओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

     

    यहां यह बताना ज़रूरी है कि इन योजनाओं के ज़रिए बीते कुछ वर्षों में देश में ड्रिप इरिगेशन को काफी बढ़ावा मिला है। 80 के दशक में जहां ड्रिप इरिगेशन के तहत महज़ 1500 हेक्टेयर भूमि आती थी, वर्ष 2017 में वह बढ़कर करीब 40 लाख हेक्टेयर से भी अधिक हो गई। हालांकि जिस तर्ज़ पर प्रयासों को अंजाम दिया गया, उसके अनुरूप ये आंकड़ा अब भी काफी कम है। इसलिए भारतीय किसानों को ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की ज़रूरत है।

     

    वैसे भी देश में पानी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI) की मानें, तो वर्ष 2025 तक विश्व की एक-तिहाई आबादी को पानी की समस्या से जूझना पड़ सकता है। वहीं, कुछ समय पूर्व नीति आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में देश के समक्ष आने वाले जल संकट की ओर इशारा किया था। इसलिए ज़रूरी है कि किसान समय रहते ड्रिप इरिगेशन जैसी प्रणाली को अपनाएं और देश को तरक्की की राह पर आगे बढ़ाएं।

     

    यह कौन सी फसलों के लिए उपयुक्त है?

     

    जानकारों की मानें, तो करीब 80 से भी ज़्यादा फसलें ऐसी हैं जिनके लिए ड्रिप इरिगेशन बिल्कुल उपयुक्त है। ज़्यादातर किसानों को ये लगता है कि ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीक कमर्शियल फसलों के लिए ज़्यादा उपयुक्त है, लेकिन सच्चाई ये है कि आप तिलहन, दलहन और कपास जैसी फसलों के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि किसी को ये लगता है कि गेहूं और धान के लिए ये तकनीक कारगर नहीं होगी, तो वे गलत सोचते हैं क्योंकि ड्रिप इरिगेशन अमूमन सारी फसलों के लिए लाभकारी है। 

    जैसे-

    सब्ज़ियां- आप टमाटर, फूल गोभी, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, भिंडी, बैंगन, पालक, मटर आदि जैसी सब्ज़ियां उगा सकते हैं।

    फल- आप सेब, अनार, अमरूद, अनानास, संतरा, आम, तरबूज़, पपीता और लिची आदि की फसल उगा सकते हैं।

    फूल- आप गुलाब, मोगरा, गेंदा, दहिलिया आदि जैसे फूल उगा सकते हैं। ड्रिप इरिगेशन आपकी बागवानी को आसान बनाती है।

    कैश क्रॉप्स- नकदी फसल यानी कैश क्रॉप्स में भी ड्रिप इरिगेशन मददगार है। आप कपास और स्ट्रॉबेरी जैसी फसल ले सकते हैं।

    इसके अतिरिक्त कॉफी और रबर प्लैंटेशन आदि के लिए भी ये प्रणाली उपयुक्त है।

    यहां तक आपने ड्रिप इरिगेशन को तो समझ लिया। लेकिन क्या आपको पता है कि बीते कुछ समय में सोलर ड्रिप इरिगेशन भी चर्चा में है? आइए, संक्षेप में इसे भी समझने का प्रयास करते हैं।

     

    सोलर ड्रिप इरिगेशन क्या है?

     

    यह ड्रिप इरिगेशन की एक तकनीक है, जिसे सौर ऊर्जा के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसमें सोलर पैनल्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूर्य की रोशनी इन सोलर पैनल्स पर पड़ती है और ये पैनल्स उसे इलेक्ट्रिकल एनर्जी में तब्दील कर देते हैं। इस एनर्जी से मोटर संचालित होती है और पम्प से पानी बाहर निकलता है। सबसे अच्छी बात ये है कि सोलर ड्रिप इरिगेशन बहुत ही लो-मेंटेनेंस है, जिसके चलते सीमांत किसानों को खर्च भी कम आता है।

     

    यहां बताना ज़रूरी है कि बीते कुछ सालों में इस तकनीक ने किसानों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। ग्रामीण इलाकों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सोलर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम काफी मददगार साबित हुए हैं।        

                   

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। इस ब्लॉग में हमने सिंचाई की टपक प्रणाली यानी ड्रिप इरिगेशन के बारे में बताने की कोशिश की है। हमने आपको बताया कि ड्रिप इरिगेशन कैसे किसानों की मदद कर सकता है? साथ ही हमने ये भी बताया कि कैसे ये तकनीक भविष्य में आने वाले जल संकट और ऊर्जा संकट को दूर करने में मदद कर सकती है? ये ब्लॉग किसान भाइयों को भारतीय कृषि क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन की महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराएगा।

     

    हम यही आशा करते हैं कि आप इसी तरह Knitter के साथ बने रहेंगे और हमारे इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स पढ़ते रहेंगे।   

     

    आपको बता दें कि Knitter पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण के अलावा सरकारी योजनाओं, ग्रामीण विकास, एजुकेशन और करियर जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

     

     

    लेखक-कुंदन भूत



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