नए लोगों के लिए भी खेती करना है आसान, जानें कृषि के विभिन्न

नए लोगों के लिए भी खेती करना है आसान, जानें कृषि के विभिन्न चरण

इस ब्लॉग के माध्यम से आप जानेंगे नए लोग खेती कैसे करें, साथ ही पाएं भूमि की तैयारी, बीजों का चयन, बुआई, सिंचाई आदि महत्वपूर्ण जानकारियाँ।

28 August 2020

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  • जैसा कि हम सभी जानते हैं, कृषि के बिना जीवन असंभव है। हमें अपने पेट भरने के लिए अनाज की आवश्यकता होती है। भोजन का कोई दूसरा विकल्प नहीं सकता। अतः भोजन प्राप्ति के लिए  कृषि एक महत्वपूर्ण विधा है। 

     

    आज ज्यादातर युवा भी गाँव की ओर रुख कर रहे हैं और खेती का व्यवसाय शुरू करके अपना जीवन बदलना चाहते हैं।

     

    जो किसान खेती में नए हैं उनके लिए खेती के विभिन्न चरणों को जानना बहुत महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग से नए किसान को खेती करने में काफी मदद मिलेगी। 

     

    इस ब्लॉग में हम लोग जानेंगे कि कृषि में कौन-कौन से चरण अपनाए जाते हैं। कृषि प्रणाली के मुख्य चरणों में सही फसल का चुनाव, मिट्टी की तैयारी, बुआई, खाद और उर्वरक एवं पोषण देना, सिंचाई, कटाई और भंडारण शामिल हैं।

     

    सबसे पहले, यह जानना बहुत जरूरी है कि किसान खेती करने के दौरान किन-किन चरणों से होकर गुजरते हैं।

     

    चरण :1

    सही फसल चुनना

    सबसे पहले, किसानों को यह फैसला  लेना होता है कि आप क्या उगाने वाले हैं। हालाँकि, यह प्रक्रिया आपको आसान लग रही हो, लेकिन यह सबसे जटिल फैसला होता है। जिस प्रकार की फसल अपने खेत के लिए चुनने जा रहे हैं वो शायद आपका सबसे महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है।

     

    नए किसान अक्सर यह गलती करते हैं कि वो इनमें से किसी भी चीज पर विचार किए बिना अपनी फसल लगाना शुरू कर देते हैं।

     

    यदि आपके उत्पाद की मांग बाजार में नहीं है तो आप शायद दिवालिया हो जायेंगे, भले ही आपने बहुत अच्छा उत्पाद क्यों न उगाया हो। इसलिए, आप अपनी फसल का चयन करते समय संभावित बाज़ारों का निरीक्षण जरूर करें क्योंकि ये निर्णय ही आपका भविष्य तय करेगी। 

     

    आपके पास उस बाज़ार की सामान्य समझ होनी चाहिए जहाँ आपका उत्पाद(फसल) को बाजार में उचित मूल्य मिल सके। 

     

    फसल चयन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    •  विभिन्न फसलों का तुलनात्मक मूल्यों की जानकारी हो।
    •  फसल के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी की पूरी जानकारी हो।
    •  अपने क्षेत्र की फसल के बारे में समझ हो।
    •  अपने आसपास के किसानों से अपने क्षेत्र के फसल के बारे में जानकारी एकत्र करें।
    •  बाजार की मांग और फसल की बिक्री क्षमता के बारे में जानकारी हासिल करें । 
    •  फसल की खेती के लिए आवश्यक बजट बना लें।
    •  एक अन्य विकल्प के रूप में दूसरी फसल की भी जानकारी रखें। 
    •  श्रम की उपलब्धता और लागत की जानकारी।

     

    चरण :2

    भूमि की तैयारी

    उगाई गई फसल से अच्छी उपज बढ़ाने के लिए भूमि की तैयारी अति महत्वपूर्ण है।भूमि के उपरी परत को चीरकर, पलटकर या जोतकर उसे बुवाई या पौध-रोपण के योग्य बनाना जुताई कहलाता है।

     

    भूमि तैयार करने का मुख्य उद्देश्य फसल की ज्यादा पैदावार के लिए मिट्टी को तैयार करना है। इसके लिए भूमि की जुताई व मिट्टी का समतलीकरण पूर्व निर्धारित समय पर किया जाता है। जिससे पौधे के जड़ को विकसित होने में मदद मिलता है।

     

    भूमि की तैयारी के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    •  बुआई के पहले किसानों को मिट्टी का स्वास्थ्य परीक्षण करा लेनी चाहिए।
    • भूमि की तैयारी के लिए नवीनतम तकनीक, जुताई उपकरणों का ज्ञान होनी चाहिए।
    •  जुताई के बाद मिट्टी भुरभुरी हो जाए जिससे उसमें जल, वायु, ताप और प्रकाश का आवागमन और संचालन सफलतापूर्वक हो सके।
    •  जुताई से लाभदायक जीवाणु भली-भाँति अपना कार्य कर सकें।
    •  जुताई से हानिकारक कीड़ों के अंडे, और खरपतवार नष्ट हो जानी चाहिए।
    •  पिछली फसल और इस्तेमाल की गई खाद और उर्वरक की जानकारी।
    •  कुशल सिंचाई के लिए फसल के संबंध में क्षेत्र का लेआउट और डिजाइन।
    •  संबंधित उपकरणों के साथ भूमि की तैयारी की लागत।
    •  सिंचाई जल की उपलब्धता और गुणवत्ता।
    •  श्रम की आवश्यकता, वित्तीय आवश्यकता और समय की जानकारी।

     

    चरण :3

    बीज चयन

    किसानों को अच्छे व खराब बीज की पहचान होना जरुरी है। फसल का अधिकतम लाभ अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का प्रयोग करके ही लिया जा सकता है।  उत्तम बीज फसल की उत्पादकता 20-30% बढ़ा देते हैं। क्योंकि यदि हम अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन नहीं करते हैं तो फसलें स्वस्थ नहीं होगी, इसलिए बीज का चयन महत्वपूर्ण है।

     

    बीज चयन का उद्देश्य मुख्य रूप से स्वस्थ बीज प्राप्त करना है, इसका उपयोग फसल की किस्म की गुणवत्ता को बनाए रखने और सुधारने के लिए भी किया जा सकता है।

     

    बीजों का चयन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    •  मूल्य और गुणवत्ता प्रति एकड़ बीजों की मात्रा।
    •  बीजों की प्रमाणिकता की जानकारी।
    •  बीजों की रोग प्रतिरोध क्षमता की जानकारी।
    •  बीजों के लिए वितरण कार्यालयों का स्थान की जानकारी।
    •  बीजों के लिए सरकारी पहलों के बारे में समझना।

     

    चरण :4

    बीजों की बुआई/रोपाई

    कृषि प्रणाली में बीजों की बुआई एवं रोपाई एक महत्वपूर्ण क्रिया है। किसानों को इस दौरान फसल के अनुसार बीजों की बुआई एवं रोपाई की जानकारी होनी चाहिए। बुआई से पहले जमाव प्रतिशत अवश्य देख लें। यदि बीज अंकुरण क्षमता कम हो तो उसी के अनुसार बीज दर बढ़ा लेनी चाहिए। यदि बीज प्रमाणित न हो तो उसका शोधन अवश्य करना चाहिए।

     

    रोपाई के समय स्वस्थ और मजबूत पौधों को प्राथमिकता देनी चाहिए। किसानों को किसी भी बीमारी का लक्षण दिखाने वाले पौधों को खुद चुनकर  हटा देना चाहिए।

     

    बुआई के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    • शुद्ध एवं प्रमाणित बीज की बुआई बीज शोधन के बाद ही की जानी चाहिए।
    • बीज बोने का उपयुक्त समय का ध्यान रखें। 
    • बुआई के लिए उपयुक्त मौसम की जानकारी।
    • बीज बोने की सर्वोत्तम विधि अपनाएं।
    • बुआई उपकरण की समझ।
    • बीज की बुआई, गहराई और दूरी का ध्यान रखें।

     

    चरण :5

    सिंचाई

    फसलों के उचित विकास के लिए पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है। सिंचाई एक ऐसी तकनीक है जिसे बारिश नहीं होने पर की जाती है, अर्थात सिंचाई को सूखी जमीन के वर्षा जल के पूरक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

     

    सिंचाई प्रणाली किसानों को कृषि के उद्देश्य से वर्षा जल पर निर्भरता कम करने में मदद करती है। सिंचाई अकाल से बचाता है। यह फसलों की आवश्यकता के अनुसार पानी की आपूर्ति के साथ बेहतर फसलों की खेती करने में मदद करता है। जो अंतत: आर्थिक विकास में मदद करता है।

     

    सिंचाई के लिए पानी के विभिन्न स्रोत कुएँ, तालाब, झीलें, नहरें, नलकूप और बाँध हैं। जिसका उपयोग सुविधानुसार किसान सिंचाई के लिए उपयोग में ला सकते हैं। 

     

    सिंचाई के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    • क्षेत्र में पानी का स्रोत की जानकारी।
    • सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण समय।
    • फसल को दिए जाने वाले पानी की मात्रा।
    • सिंचाई की आवृत्ति एवं पानी की आवश्यकता की जानकारी।
    • सिंचाई विधि की जानकारी।
    • सिंचाई के लिए सरकारी योजनाएं और अनुदान की जानकारी।

     

    चरण :6

    उर्वरक एवं पोषण

    पौधों के सही विकास के लिए उन्हें पोषक तत्व देना अत्यंत जरूरी होता है। इन पोषक तत्वों में खाद, उर्वरक एवं दवाईयाँ शामिल होती है। ये पोषक तत्व पौधों की वृद्धि और उत्पादकता में सुधार करते हैं। 

     

    अतः इस चरण में किसानों को पौधों का उचित देखभाल की जानकारी आवश्यक हो जाता है। अतः इस चरण में किसानों को फसल में खाद एवं दवा डालने का रिकॉर्ड रखना चाहिए क्योंकि अक्सर किसान भूल जाते हैं कि फसल में उन्होंने कौन सी खाद या दवा डाली थी।

     

    उर्वरक एवं दवा देने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    • फसलों में लगने वाले रोग एवं लक्षण की जानकारी।
    • कीटों और विषाणुओं को मारने के लिए कीटनाशकों की जानकारी।
    • कीटनाशक स्प्रे से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी।
    • खाद का उचित प्रयोग।
    • उर्वरक के बारे में समझ।
    • उर्वरक छिड़काव के प्रमुख उपकरणों की जानकारी।
    • उर्वरक कैसे प्राप्त करें।
    • उर्वरक की लागत।
    • उर्वरक के लिए सरकार की पहल एवं योजनाओं की जानकारी।

     

    चरण :7

    फसल की कटाई

    किसान अपनी मेहनत से आई फसलों को देखकर खुश होते हैं। अच्छी फसल होने पर किसान इन मौकों पर खुशियाँ मनाते हैं। लेकिन कटाई और भंडारण में सावधानियाँ भी जरूरी है।

     

    कटाई या 'कटनी' वह कृषि कार्य है जिसमें तैयार फसल को खेतों से काटकर एकत्रित किया जाता है। इसके बाद उसकी मड़ाई, ओसनी एवं भंडारण किया जाता है।

     

    इस दौरान किसानों को फसल कटाने के बाद भंडारण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है क्योंकि भंडारण के रख-रखाव के अभाव में किसानों की कड़ी मेहनत पर पानी फिर सकता है। 

     

    फसल की कटाई के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    • कटाई के लिए उचित समय और तरीका।
    • फसल के हिसाब से कटाई के उपकरण के बारे में समझना।
    • थ्रेसिंग विधि की जानकारी।
    • उचित फसल भंडारण।
    • सरकारी फसल भंडारण सुविधाओं के बारे में समझ।

     

    चरण :8

    फसल का विपणन(मार्केटिंग)

    कृषि विपणन शब्द से तात्पर्य उन समस्त विपणन कार्य और सेवाओं से है जिनके द्वारा कृषि वस्तुएं उत्पादक से अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचती हैं। इस प्रक्रिया में कृषि मंडी एक ऐसा स्थान है जहाँ पर किसान अपना पूरा उत्पाद बेचता है।

     

    आधुनिक कृषि विपणन प्रणाली से ही किसानों को उनके उपज का सही दाम मिल सकता है। किसानों को इस चरण के लिए बाजार भाव और मंडियों की जानकारी होना आवश्यक  है। 

     

    विपणन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें एवं जानकारियां

    •  कृषि बाजार के बारे में समझ।
    •  बाजार में फसल की वर्तमान कीमत।
    •  फसल की गुणवत्ता एवं ग्रेडिंग की जानकारी।
    •  परिवहन की लागत।
    •  तुलनात्मक बाजार दर की जानकारी। 
    •  कृषि बाजार के लिए सरकारी पहल।
    •  तीसरे पक्ष या बिचौलियों पर विश्वास नहीं करें।
    •  कृषि विपणन समस्या और समाधान के बारे में जागरूकता।

     

    अंत में किसानों से यही कहना चाहते हैं कि किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को निरंतर  शिक्षा और प्रशिक्षण लेते रहना उनके लिए हितकारी है, क्योंकि कृषि पद्धति की पूरी जानकारी से ही किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है।



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