डेयरी फार्मिंग क्यों है फायदे का सौदा? आइए जानें

डेयरी फार्मिंग करना चाहते हैं, तो ये ब्लॉग अवश्य पढ़ें

भारत में डेयरी बिज़नेस की ओर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। बीते कुछ समय में बड़ी संख्या में डेयरी फार्म खोले गए हैं। आइए, इस बिज़नेस पर एक नजर डालें।

09 January 2021

  • 1493 Views
  • 8 Min Read

  • दूध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का नंबर-1 देश है। बीते कई दशकों में भारत ने इस क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयां हासिल की है। चूंकि देश में दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बहुत अधिक है, डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के लिए एक अच्छा स्कोप है।

     

    ये बिज़नेस कितना इम्पोर्टेंट है, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हमारे दिन की शुरुआत भी चाय या कॉफी से होती है और बिना दूध के ये दोनों ही चीज़ें भारतीयों को नागवार हैं। संक्षेप में कहें तो देश के हर घर में दूध या दूध से बने उत्पादों का उपयोग होता है।

     

    अच्छी बात ये है कि सरकार भी डेयरी फार्मिंग को लगातार बढ़ावा दे रही है। वहीं, यदि ग्रामीण भारत के नज़रिए से देखें, तो डेयरी फार्मिंग का महत्व और भी बढ़ जाता है। इससे छोटे व सीमांत किसानों को साल भर आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिल जाता है।

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम आपको डेयरी फार्मिंग बिज़नेस के बारे में ही बताएंगे। हम आपको बताएंगे कि इस क्षेत्र में क्या स्कोप है और आप कैसे इस बिज़नेस की शुरुआत कर सकते हैं। तो चलिए, डेयरी फार्मिंग बिज़नेस को समझने का प्रयास करते हैं। लेकिन पहले ये जान लेते हैं कि आखिर डेयरी फार्मिंग है क्या?

     

    डेयरी फार्मिंग क्या है?

     

    डेयरी फार्मिंग कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसके तहत दूध और दूध से बने उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए गाय, भैंस और बकरी जैसे पशुओं को पाला जाता है। साधारण शब्दों में कहें तो ये एक एग्री बिज़नेस है, जिसके तहत दूध उत्पादन किया जाता है।

     

    डेयरी फार्मिंग

     

    डेयरी फार्मिंग शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

     

    बाज़ार को समझें

     

    डेयरी फार्मिंग शुरू करने से पहले आपको बाज़ार को जानने की ज़रूरत पड़ेगी। आपको लोगों के कंज़म्पशन पैटर्न को समझना होगा। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि आप किन्हें सर्व करना चाह रहे हैं। आपको अपने ग्राहकों की भौगोलिक स्थिति, उनकी आय और परिवार आदि की जानकारी भी रखनी होगी। साथ ही इस बात का ख्याल भी रखना होगा कि लोग गाय का दूध खरीदना चाहते हैं या भैंस का, क्योंकि दोनों की दूध की क्वालिटी अलग होती है। भैंस के दूध में फैट ज्यादा होता है तो गाय के दूध में फैट की मात्रा कम होती है। यदि आप इन बातों को नज़रअंदाज करेंगे तो संभवतः आप सही बिज़नेस प्लान तैयार नहीं कर सकेंगे।

     

    इसके अतिरिक्त आपको भारतीय घरों की नब्ज़ भी जाननी पड़ेगी। जैसा कि आपको पता है कि भारतीय सिर्फ दूध नहीं खरीदते हैं, वे उसके साथ जुड़े अन्य लाभ को भी ध्यान में रखते हैं। जैसे कि कई घरों में लोग खुद ही घी बनाते हैं। इसलिए वे चाहेंगे कि उन्हें अच्छी क्वालिटी का दूध मिले, जिससे तगड़ी मलाई निकाली जा सके और घी बनाया जा सके। वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग फैट-फ्री दूध पीना पसंद करते हैं। तो ऐसी स्थिति में वे संभवतः गाय का दूध पसंद करेंगे क्योंकि उसमें फैट कम होता है। लिहाज़ा आपको इसके हर पहलू को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला लेना होगा।

     

    डेयरी के लिए उपयुक्त स्थान का निर्धारण करें:

     

    स्थान का निर्धारण करते समय आपको कई बातों पर विचार करना होगा। सबसे पहले तो ये कि क्या उस जगह पर गाय या भैंसों को सारी सुविधाएं मिल पाएंगी। बता दें कि गाय और भैंस बहुत अधिक पानी पीते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि उनके लिए साफ पानी उपलब्ध हो। इसके अतिरिक्त गर्मी के मौसम में इन जानवरों को विशेष देखभाल की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए आपको उस स्थान पर पंखे आदि लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए ऐसे स्थान का चयन करें, जहां बिजली उपलब्ध हो। आप एक या दो एकड़ की अच्छी भूमि का चयन कर डेयरी फार्मिंग की शुरुआत कर सकते हैं।

     

    पशुओं के आवास की व्यवस्था करें:

     

    जगह निर्धारित करने के बाद आपको इन पशुओं के रहने के लिए उचित व्यवस्था करनी होगी। ध्यान रहे कि प्रत्येक पशु को पर्याप्त जगह मिले और उन्हें अच्छी वेन्टिलेशन वाली जगह में रखा जाए। हर जानवर के लिए करीब 40 से 80 स्क्वायर फीट जगह उपयोग में लाई जा सकती है। साथ ही आपको उनके लिए शेड या अलग कमरे भी बनाने पड़ेंगे ताकि ठंड आदि में उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त इस बात का ध्यान भी रखें कि वो जगह सड़क से थोड़ी दूर हो ताकि पशुओं को गाड़ी आदि के शोर से भी बचाया जा सके। ऐसे शोर कभी-कभी उन्हें परेशान भी कर देते हैं। साथ ही ये भी याद रखें कि जिस जगह उन्हें रखा जा रहा है, वहां चारा देने की सुविधा हो। वहीं आपके पास पशुओं के खाने का सामान रखने और दूध आदि के बर्तन के लिए भी कमरे निर्धारित होने चाहिए।

     

    सही नस्ल का चुनाव करें:

     

    इस बिज़नेस में आपके द्वारा पाले जाने वाले पशु की नस्ल बहुत ज़्यादा मायने रखती है। यदि आप अपने डेयरी बिज़नेस के लिए भैंसों का चयन करना चाहते हैं, तो आपको मुर्रा, ज़ाफराबादी और सुरती जैसी नस्लें मिल जाएंगी। वहीं, यदि आप गाय पालने के बारे में सोच रहे हैं तो गिर, साहिवाल, लाल सिंधी, देवनी और थारपरकार जैसी नस्लें उपलब्ध हैं। आप सभी बातों का ध्यान रखकर इनमें से किसी भी नस्ल का चुनाव कर सकते हैं।

     

    दूध देने की क्षमता और क्वालिटी पर गौर करें:

     

    आप जब भी गाय या भैंस जैसे पालतू जानवर खरीदें, इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि उनसे प्रतिदिन कितना दूध निकाला जा सकेगा और उसकी क्वालिटी कैसी होगी। जानकारों का मानना है कि आपको इन पशुओं को खरीदने के पूर्व कम से कम 3 बार दूध निकालकर देखना चाहिए। यदि आप गाय ले रहे हैं तो ध्यान रहे कि दिन में औसतन कम से कम 16-17 लीटर दूध मिल पाए। वहीं, भैंस के मामले में 12-13 लीटर दूध काफी होगा। इस बीच सबसे ज़रूरी बात ये कि आपको इन्हें खरीदते वक्त जल्दबाज़ी नहीं करनी है। पहले कुछ जानवर खरीदें, उन्हें पालें और फिर जब आपको लगे कि सब कुछ ठीक है, तब आप उन जानवरों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।

     

    सही पशु आहार का चयन करें:

     

    इंसानों की तरह जानवरों को भी सही पोषण की आवश्यकता होती है। इसलिए ज़रूरी है कि उनके आहार का उत्तम प्रबंध किया जाए। सबसे पहली ज़रूरत होगी साफ पानी की, जिसके बिना इन पशुओं का गुज़ारा नहीं है। ये जानवर दिन में 5-7 लीटर पानी आराम से पी लेते हैं। वहीं इन्हें भोजन के रूप में चारा और दूसरे कैटल फीड की ज़रूरत भी पड़ेगी। पशुओं को जितना अच्छा पोषण मिलेगा, दूध का उत्पादन भी उतना ही बेहतर होगा। बाज़ार में पशुओं के पोषण को पूरा करने वाले सप्लीमेंट्स भी मिलते हैं। जानकारों की सलाह लेकर इस पर भी विचार किया जा सकता है।

     

    पशुओं को बीमारियों से बचाएं:

     

    डेयरी फार्मिंग बिज़नेस तभी तरक्की कर सकता है, जब आपके पशु स्वस्थ हों। इसलिए ज़रूरी है कि उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए और समय-समय पर पशु चिकित्सकों से उनकी जांच भी कराई जाए। इसके अतिरिक्त इन पशुओं का टीकाकरण भी किया जाना चाहिए।

     

    इन बातों का ध्यान रखकर आप डेयरी बिज़नेस की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। लेकिन, इस बीच आपको इसके बिज़नेस मॉडल को भी समझना होगा। तो आइए, एक नजर डेयरी बिज़नेस मॉडल पर भी डाल लेते हैं।

     

    बिज़नेस मॉडल-

     

    बिज़नेस करने का तरीका

     

    इस बिज़नेस को करने के तीन तरीके हो सकते हैं। पहला तो ये कि आप दूध उत्पादन से जुड़ी किसी कंपनी को दूध बेच सकते हैं। हमारे देश में कई ऐसी कंपनियां हैं जो किसानों से और डेयरी फार्मर्स से दूध खरीदती हैं। वहीं दूसरा तरीका ये कि आप सीधे बाज़ार में जाकर दूध बेच सकते हैं। तीसरा तरीका ये कि आप खुद ही एक कंपनी की शुरुआत कर लें। कंपनी खोलकर आप दूध के साथ-साथ दूध से बने उत्पाद भी बेच सकेंगे।

     

    रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया:

     

    डेयरी फार्मिंग की रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बजट, स्केल और जगह के हिसाब से तय होती है। भारत में अलग-अलग राज्यों में इसके नियमों में थोड़े-बहुत अंतर हो सकते हैं। यदि आपके क्षेत्र में कोई वेटेरिनरी और डेयरी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट है, तो आप वहां अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त आपको स्थानीय स्तर पर नगर निगम या पंचायत से इसकी अनुमति लेनी होगी। अगर आप बड़े पैमाने पर इस बिज़नेस को शुरू करना चाहते हैं तो आपको पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की मंज़ूरी भी चाहिए होगी। यदि आपका सालाना टर्न ओवर 12 लाख से अधिक होगा तो आपको FSSAI का लाइसेंस भी चाहिए होगा।

     

    पैकेजिंग और लेबलिंग-

     

    यदि आप पैकेट्स में दूध बेचना चाहते हैं तो आपको पैकेजिंग और लेबलिंग का ध्यान भी रखना होगा। इसके लिए आपको अपने उत्पाद का नाम भी तय करना होगा। आपको उस पर अपने उत्पाद से जुड़ी जानकारी भी प्रदान करनी होगी। जैसे कि दूध कब पैक किया गया है और कब तक इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। आप किसी पैकेजिंग कंपनी से संपर्क कर अपने उत्पाद के लिए पैकेज तैयार करवा सकते हैं।

     

    सही मार्केटिंग रणनीति अपनाएं:

     

    ये बात हम सभी जान चुके हैं कि इस बिज़नेस में ग्रो करने का अच्छा स्कोप है। वहीं, कहीं न कहीं ये बात भी उतनी ही सही है कि धीरे-धीरे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। इसलिए आपको लोगों तक पहुंचने के लिए एक मार्केटिंग रणनीति की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए सबसे पहले आपको ये जानना होगा कि मार्केट में कंज़म्पशन का तरीका क्या है? लोगों की ज़रूरत क्या है? और आप उस ज़रूरत को कैसे पूरा कर सकते हैं? इन सवालों के इर्द-गिर्द आप अपनी मार्केटिंग रणनीति तैयार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप किसी यूनिक सेलिंग पॉइन्ट (USP) का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

     

    मुनाफा कितना होता है?

     

    भारत में दूध और दूध उत्पादों का एक बड़ा बाज़ार है। दूध के अलावा, घी, दही, चीज़ (Cheese) जैसे उत्पाद भी बिकते हैं। इसके अतिरिक्त डेयरी फार्म्स का वेस्ट भी बिकता है। जैसे कि गोबर और उससे बनने वाले उपले। यदि आप मुनाफे की दृष्टि से इसे देखें, तो भारतीय नस्लों को पालकर आप 40 प्रतिशत तक मुनाफा कमा सकते हैं। यदि आप इससे जुड़े प्रोडक्ट बेचते हैं तो मुनाफे का यह अनुपात और भी अधिक हो सकता है।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। इस ब्लॉग में हमने डेयरी फार्मिंग से जुड़ी जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है। हमने आपको बताया कि आप कैसे डेयरी फार्मिंग बिज़नेस शुरू कर सकते हैं? ये आपके लिए कितना फायदेमंद होगा और आप इसे शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रख सकते हैं? ये ब्लॉग आपको डेयरी फार्मिंग के तमाम पहलुओं से अवगत कराएगा।

     

    हम आशा करते हैं कि आप इसी तरह Knitter के साथ बने रहेंगे और हमारे इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स पढ़ते रहेंगे।  

     

    आपको बता दें कि Knitter पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण के अलावा एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    स्मार्ट बिज़नेस की अन्य ब्लॉग