बदल-बदल के फसल उगाने से बदल सकती है आपकी तकदीर, जानें कैसे

बदल-बदल के फसल उगाने से बदल सकती है आपकी तकदीर, जानें कैसे

किसान परंपरागत फसलों के अलावा कैसे नकदी फसलें उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इस ब्लॉग में पढ़ें।

06 January 2021

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  • भारत में कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं। इनमें मुख्यत: गेहूं, चावल, मक्का, गन्ना, बाजरा, तिलहन, दालें इत्यादि शामिल हैं। इनमें से ज़्यादातर फसलों में बहुत ज्यादा कमाई नहीं हो पाती। वहीं, एक ही तरह की फसल लेने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर भी असर पड़ता है। इसलिए किसानों को परंपरागत फसलों के साथ-साथ अपनी ज़मीन पर अन्य फसलें ज़रूर लेनी चाहिए। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी तो होगी ही साथ ही मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ती है। इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि कैसे किसान गेहूं और चावल के अलावा अन्य फसलें उगाकर अपनी तकदीर बदल सकते हैं।

     

    फसलें बदल कर देखो बदल सकती है आपकी तकदीर

     

    आय बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं नई फसलें

     

    जहां गेहूं और धान की फसल उगाकर किसान प्रति एक एकड़ में अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कमाई कर सकता है, वहीं दूसरी कई फसलों से लाखों में कमाई हो जाती है। इसलिए किसानों को गेहूं धान के अलावा अपनी जगह की क्षमता के हिसाब से दूसरी फसलों को उगाने की भी कोशिश करनी चाहिए, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है। 

     

    परंपरागत फसलों के अलावा उगा सकते हैं ये फसलें

     

    खेतों में परंपरागत फसलें जैसे मक्का, गेहूं, धान इत्यादि के अलावा भी कई फसलें उगाई जा सकती हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है।

     

    नकदी फसलें-

     

    नकदी फसलों में उन फसलों को शामिल किया जाता है, जिन्हें व्यापारिक सोच के साथ ही पैदा किया जाता है। भारत में मुख्यतः गन्ना, कपास, चाय, कॉफी, जूट आदि फसलें उगाई जा सकती हैं और बड़े पैमाने पर उगाई भी जा रही हैं। इन फसलों से बड़े उद्योगों को कच्चा माल मिलता है। इससे किसानों को अच्छी आमदनी भी मिलती है। परंपरागत फसलें उगा रहे किसानों को एक बार इन फसलों को उगाने पर विचार जरूर करना चाहिए।

     

    औषधीय फसलें-

     

    भारत में बीते कुछ समय से आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी उन्नति देखने को मिली है, जिससे बाज़ार में जड़ी-बूटियों की मांग बढ़ती जा रही है। इन औषधीय फसलों के उत्पादन में किसानों की रुचि भी बढ़ी है। इसके अच्छे उत्पादन के लिए फसल की बेहतर जानकारी होना जरूरी है। इससे किसान प्रति एकड़ लाखों रुपयों की कमाई कर सकते हैं। पारंपरिक फसलों से हट कर औषधीय फसलें उगाना किसानों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। इसमें अश्वगंधा, मुलेठी, शतावरी आदि जड़ी बूटियां शामिल हैं।

     

    फल और फूलों की खेती-

     

    फल और सब्ज़ियों के साथ फूलों की खेती भी बढ़िया आमदनी पाने का एक अच्छा साधन हो सकता है। इससे कम जगह पर ज़्यादा मुनाफा कमाने की ज़्यादा संभावना होती है। जहां सही जलवायु वाले क्षेत्रों में मौजूद खेतों में इनका उत्पादन किया जा सकता है वहीं, विपरीत जलवायु वाले क्षेत्रों में पॉली हाउस लगाकर फूलों और सब्ज़ियों का उत्पादन किया जा सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि घरेलू बाज़ार में ही इसके अच्छे दाम मिल जाते हैं।

     

    नई फसलों को उगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

     

    यदि आप परंपरागत फसलों को छोड़कर या फिर साथ में नकदी फसलें उगाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना होगा।

     

    मिट्टी का परीक्षण ज़रूर करवाएं- खेतों में नई फसलों को उगाने से पहले मिट्टी की जांच करवाना ज़रूरी है। इससे पता चलता है कि आपके खेत की मिट्टी में फसल के हिसाब से किन पोषक तत्वों की कमी है और किसकी अधिकता। 

     

    बाज़ार का रखें ख्याल- नई फसलों को उगाने से पहले बाजार के बारे में भी जानकारी होना ज़रूरी है। यानी उगाई जाने वाली फसल को बेचने के लिए आपको बाज़ार कितना दूर या पास पड़ेगा फिर बाज़ार की मांग के हिसाब से भी फसल उगाई जा सकती है।

     

    भंडारण या ट्रांसपोर्ट- कई फसलों को पकने या प्रोसेस करने के बाद बेचा जाता है, जिसके लिए आपके पास उसे स्टोर करने के लिए जगह का होना बहुत ज़रूरी होता है। वहीं कई फलों, सब्ज़ियों और फूलों को तैयार होते ही जल्द से जल्द बाज़ार पहुंचाना होता है, जिसके लिए ट्रांसपोर्ट सुविधा का होना ज़रूरी है।

     

    तकनीकी जानकारी और मशीनें- कई फसलें जैसे मशरूम या फिर बेमौसमी सब्ज़ियां उगाने के लिए किसानों को उचित तकनीक की जानकारी होना ज़रूरी है। इसके लिए सरकारी या निजी संस्थानों द्वारा ट्रेनिंग भी मुहैया कराई जाती है। वहीं कई फसलों में पैकेजिंग और हार्वेस्टिंग के लिए मशीनों का इस्तेमाल भी है, जिसके बारे में किसानों को फसल उगाने से पहले ज़रूर जानकारी ले लेनी चाहिए।

     

    उम्मीद है इस ब्लॉग से आपको बेहतर जानकारियां मिल पाई होंगी और आप भी अपने खेतों में नकदी फसलें उगाकर आय में बढ़ोतरी कर पाएंगे। आप Knitter चैनल पर खेती और ग्रामीण विकास से संबंधित कई ब्लॉग आसान भाषा में पढ़ सकते हैं। 

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