कॉमर्स के छात्रों के लिए भी है करियर ऑप्शन्स की भरमार

कॉमर्स के छात्रों के लिए भी है करियर ऑप्शन्स की भरमार

कॉमर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी अवसरों की भरमार है। ऐसे कई करियर ऑप्शन्स हैं जिन्हें चुनकर वे अपना सुनहरा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।

17 December 2020

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  • करियर को लेकर स्टूडेंट्स के बीच सुगबुगाहट आम बात है। वे अक्सर करियर ऑप्शन्स को लेकर असमंजस में रहते हैं। दोस्तों के बीच इस बात पर हमेशा चर्चा होती है कि साइंस की स्ट्रीम में ज़्यादा विकल्प हैं, आर्ट्स में ज़्यादा कुछ रखा नहीं और कॉमर्स में तो पता ही नहीं क्या करेंगे। लेकिन सच्चाई ये है कि हर क्षेत्र में विकल्पों की भरमार है, बस स्टूडेंट्स को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। वे समझ नहीं पाते कि किस दिशा में आगे बढ़ा जाए।

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम स्टूडेंट्स की इसी चिंता पर विराम लगाने का प्रयास करेंगे। करियर वेलफेयर की इस सीरीज़ में हम आज कॉमर्स के छात्रों की करियर संबंधी दुविधा दूर करेंगे। हम उन्हें बताएंगे कि कॉमर्स के क्षेत्र में करियर के क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं और वे किस तरह उस तक पहुंच सकते हैं।

     

    कॉमर्स की पढ़ाई भी खोलेगी अवसरों के द्वार

     

    तो चलिए, विकल्पों की तलाश का ये सफर शुरू करते हैं।

     

    1. चार्टर्ड अकाउंटेन्ट (CA):

     

    संभवतः कॉमर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच चार्टर्ड एकाउंटेंसी (CA) सबसे ज़्यादा प्रचलित करियर ऑप्शन है। नाम और शोहरत के साथ-साथ इस जॉब में कमाई भी अच्छी है। यही वजह है कि अक्सर स्टूडेंट्स सीए बनने के लिए आतुर नज़र आते हैं। भारत में द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) जैसी सांविधिक संस्था भी है, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रोफेशन को रेगुलेट करती है।

     

    कैसे बनते हैं चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA)?

    • चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने के लिए आपको तीन स्टेज पार करने होते हैं।
    • पहला होता है कॉमन प्रोफिश्येंसी टेस्ट (CPT)
    • दूसरा इंटरमीडिएट या इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल कॉम्पीटेंस कोर्स (IPCC)
    • तीसरा, फाइनल परीक्षा

     

    चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के काम

    • अकाउंटेन्सी का काम
    • ऑडिटिंग का काम
    • फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार करना
    • टैक्सेशन से जुड़े काम

     

    योग्यता:

    12वीं के बाद आप सीए बनने की ओर अपना पहला कदम बढ़ा सकते हैं। आप CPT की परीक्षा दे सकते हैं।

     

    2. कंपनी सेक्रेटरी (CS):

     

    कॉमर्स के क्षेत्र में कंपनी सेक्रेटरी (CS) का प्रोफेशन भी काफी लोकप्रिय है। किसी भी कंपनी या संगठन में इनका ओहदा काफी ऊपर होता है। वे कंपनी के बोर्ड और स्टेकहोल्डर्स के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। साथ ही वे कंपनी के लीगल व प्रशासनिक पहलुओं का भी पूरा खयाल रखते हैं। कमाई के मामले में भी ये एक अच्छा विकल्प है। भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI) कंपनी सेक्रेटरी (CS) के प्रोफेशन को रेगुलेट करती है।

     

    कैसे बनते हैं कंपनी सेक्रेटरी (CS)?

     

    कंपनी सेक्रेटरी (CS) बनने के लिए भी 3 चरणों से होकर गुज़रना होता है।

    • पहला, फाउंडेशन प्रोग्राम
    • दूसरा, एग्ज़ीक्यूटिव प्रोग्राम
    • तीसरा, प्रोफेशनल प्रोग्राम

     

    कक्षा बारहवीं के बाद आप फाउंडेशन प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं। यदि आप ग्रेजुएट हैं, तो आप सीधे एग्ज़ीक्यूटिव प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं। अंत में प्रोफेशनल प्रोग्राम कर आप कंपनी सेक्रेटरी (CS) के पद की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

     

    कंपनी सेक्रेटरी (CS) के काम?

    • लीगल परामर्श
    • ऑडिटिंग
    • प्रशासनिक कार्य
    • कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जड़े काम

     

    योग्यता:

    12वीं के बाद आप कंपनी सेक्रेटरी (CS) की तैयारी में जुट सकते हैं।

     

    3. कॉस्ट अकाउंटेंट

    ये भी एक महत्वपूर्ण प्रोफेशनल ऑप्शन है जिसे कॉमर्स के स्टूडेंट्स चुन सकते हैं। किसी भी कंपनी के मुनाफे में इनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है। बजट बनाने से लेकर नफे और नुकसान के सारे गणित इन्हें पता होते हैं। यही इनकी विशेषता भी होती है। प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में इनकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता होती है। द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकांटेन्ट्स ऑफ इंडिया इससे जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था है।

     

    कैसे बनते हैं कॉस्ट अकाउंटेंट

     

    इसके लिए भी तीन चरणों को पार करना होता है।

    • पहला, फाउंडेशन
    • दूसरा इंटर
    • तीसरा फाइनल

     

    कॉस्ट अकाउंटेन्ट के काम

    • मैन्युफैक्चरिंग लागत का निर्धारण करना
    • प्रोडक्शन रिपोर्ट तैयार करना
    • कंपनी की फाइनेंशियल प्लानिंग में मदद करना
    • उत्पादों या सेवाओं के दाम का निर्धारण करना
    • दरों में आने वाले बदलावों को मॉनिटर करना

     

    योग्यता:

    कक्षा 12वीं के बाद आप ICWA के कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

     

    4. इंवेस्टमेंट बैंकर

     

    इंवेस्टमेंट एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें लोगों की सबसे ज़्यादा दिलचस्पी रहती है। यही वजह है कि इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की पूछ-परख भी काफी ज़्यादा होती है। ये कंपनियों और लोगों को फाइनेंशियल अड्वाइस देने के साथ-साथ उनकी वित्तीय स्थिति को भी मज़बूती प्रदान करते हैं। ये मुख्यतः वित्तीय संस्थानों में काम करते हैं। साथ ही कैपिटल मार्केट आदि में भी इनकी धमक होती है।

     

    कैसे बनते हैं इंवेस्टमेंट बैंकर

     

    आप किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन के बाद इस क्षेत्र में दाखिल हो सकते हैं। लेकिन गणित और फाइनेंशियल एजुकेशन एक इंवेस्टमेंट बैंकर के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। इसलिए कॉमर्स या फाइनेंस स्ट्रीम से आने वालों लोगों के लिए इंवेस्टमेंट बैंकिंग एक अच्छा विकल्प है। इसके लिए कई इंस्टीट्यूट्स सर्टिफिकेट कोर्स भी करवाते हैं। एसोसिएशन ऑफ इंटरनैशनल वेल्थ मैनेजमेंट ऑफ इंडिया (AIWMI) ऐसी ही एक जानी-मानी संस्था है।

     

    इंवेस्टमेंट बैंकर के काम

    • फाइनेंसियल एडवाइस
    • कंपनियों का मर्जर
    • कैपिटल मार्केट के काम
    • वित्तीय रणनीतियां

     

    योग्यता:

    कक्षा 12वीं के बाद आप किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग में कदम रख सकते हैं। हालांकि वित्तीय ज्ञान और गणित में आपकी अच्छी पकड़ होनी चाहिए।

     

    5. बजट ऐनलिस्ट:

     

    बजट ऐनलिस्ट का काम भी काफी दिलचस्प होता है। ये कंपनी के बजट और फाइनेंस का खयाल रखते हैं। बजट के निर्धारण से लेकर उसके आवंटन तक ये सारी छोटी-बड़ी चीज़ों पर नज़र रखते हैं। फाइनेंशियल रिपोर्ट्स तैयार करने में इनकी महारथ होती है। फंडिंग आदि के क्षेत्र में भी इनकी अच्छी पकड़ होती है। किसी कंपनी का वित्तीय भविष्य सुनिश्चित करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

     

    कैसे बनते हैं बजट ऐनलिस्ट?

     

    फाइनेंस, अर्थशास्त्र, मैनेजमेंट, सांख्यिकी या फिर बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री लेने के बाद आप इस क्षेत्र में कदम रख सकते हैं। इसके अतिरिक्त चार्टर्ड इंवेस्टमेंट मैनेजर (CIM), चार्टर्ड फाइनेंशियल ऐनलिस्ट (CFA) और सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) जैसी फाइनेंशियल डिग्रियां भी आपको बजट ऐनलिस्ट बनने में मदद करेंगी।

     

    बजट ऐनलिस्ट के काम

    • कंपनी का बजट तैयार करना
    •  फंड की समीक्षा करना
    • कंपनी के खर्चों पर नज़र रखना
    • भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं का निर्धारण करना

     

    योग्यता:

    कक्षा 12वीं के बाद आप फाइनेंस या बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री हासिल कर सकते हैं। इसके बाद आप इस क्षेत्र में कदम रख रख सकते हैं

     

    6. ऑडिटर

     

    यदि किसी छात्र की फाइनेंस में दिलचस्पी है, तो वो ऑडिटर के रूप में अपना भविष्य देख सकते हैं। ऑडिटर्स वो होते हैं जो वित्तीय रिकॉर्ड्स की समीक्षा करते हैं। वे कंपनियों और संस्थानों की वित्तीय स्थिति का जायज़ा लेते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि वित्तीय गतिविधियों में कोई चूक या गड़बड़ी ना हो।

     

    कैसे बनते हैं ऑडिटर?

     

    ऑडिटर बनने के लिए आपको अकाउंटिंग में बैचलर की डिग्री लेनी होगी। यदि इसके बाद आप पोस्ट ग्रेजुएशन करते हैं, तो आपको और भी अच्छे अवसर मिलेंगे। कुछ डिप्लोमा कोर्स भी हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं। भारत में इस पेशे में ऐसे लोगों को ज़्यादा तरजीह दी जाती है जो CA, CS या ICWA जैसे सर्टिफिकेशन हासिल करते हैं। देश में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल ऑडिटर्स (IIA) और इंफॉर्मेशन सिस्टम्स ऑडिट एंड कंट्रोल एसोसिएशन (ISACA) जैसी कुछ संस्थाएं भी हैं, जो ऑडिटिंग से जुड़े सर्टिफिकेशन प्रदान करते हैं।   

     

    ऑडिटर के काम

    • ऑडिटिंग
    • टैक्स रिटर्न से जुड़े काम
    • वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा
    • रेवेन्यू जनरेशन

     

    योग्यता:

    कक्षा 12वीं के बाद आप अकाउंटिंग में डिग्री लेकर इस पेशे की तरफ बढ़ सकते हैं।

     

    7. अकाउंटेंट

     

    ये ऐसा प्रोफेशन है जिसकी ओर कॉमर्स के छात्र आंख गढ़ाए बैठे रहते हैं। अकाउंटेन्ट्स टैक्स, अकाउंटिंग और फाइनेंशियल रिपोर्ट से जुड़े काम करते हैं। अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर्स पर इनकी अच्छी पकड़ होती है। ये किसी कंपनी, संस्था या फिर किसी व्यक्ति को अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। मुख्यतः ये किसी अकाउंटिंग फर्म से जुड़े होते हैं। खास बात ये है कि प्रोफेशनल अकाउंटेन्ट्स की कमाई और तनख्वाह भी अच्छी होती है।

     

    कैसे बनते हैं अकाउंटेंट 

     

    बीकॉम करने के बाद आप किसी सीए फर्म में इंटर्नशिप या काम कर इसका एक्सपीरिएंस ले सकते हैं। देश में कई इंस्टीट्यूट्स भी हैं जो बीकॉम ग्रेजुएट्स के अकाउंटिंग स्किल्स को बढ़ाने में मदद करते हैं। आप इन इंस्टीट्यूट्स से बिज़नेस अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, ई-फाइलिंग और वैट जैसी चीज़ों में अच्छा खासा ज्ञान हासिल कर सकते हैं। यदि आप पोस्ट ग्रेजुएशन करते हैं, तो आपके लिए अवसरों के और भी दरवाज़े खुल जाते हैं।

     

    अकाउंटेन्ट के काम

    • अकाउंटिंग
    • आय और व्यय का ब्यौरा रखना
    • ट्रांन्जैक्शन्स पर ध्यान रखना
    • टैक्स रिटर्न से जुड़े काम को देखना

     

    योग्यता:

    कक्षा 12वीं के बाद आप बीकॉम की डिग्री लेकर इस प्रोफेशन में कदम रख सकते हैं।

     

    ये तो बस कुछ ही प्रोफेशन हैं, जिनके बारे में हमने विस्तार से चर्चा की है। इसके अलावा सेल्स मैनेजर, फाइनेंस मैनेजर, स्टॉक ब्रोकर, फाइनेंशियल एडवाइजर, बिज़नेस कंसल्टेंट और रिलेशनशिप मैनेजर जैसे ढेरों और प्रोफेशन हैं जहां आप अपना करियर बना सकते हैं।

     

    तो अबकी बार कोई कहे कि कॉमर्स के छात्रों के लिए स्कोप नहीं है, तो उन्हें ये ब्लॉग ज़रूर दिखाना।

     

    हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। इस ब्लॉग में हमने हर संभव प्रयास किया है कि कॉमर्स स्टूडेंट्स के मन में करियर को लेकर जो चिंताएं हैं, हम उन्हें दूर कर सकें। हमने इस ब्लॉग के माध्यम से उन्हें संभावित करियर विकल्पों का ब्यौरा देने की कोशिश भी की है, ताकि उन्हें भविष्य में अपने करियर को लेकर कोई चिंता ना सताए।

     

    हम आशा करते हैं कि आप Knitter के साथ बने रहेंगे और ऐसे इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स पढ़ते रहेंगे। यदि आप अन्य विषयों पर हमारे ब्लॉग्स पढ़ना चाहते हैं, तो आप इस (Link) पर जाकर उन्हें पढ़ सकते हैं।  

     

    आपको बता दें कि Knitter पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिल जाएंगे। आप इन ब्लॉग्स को पढ़कर अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं।

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