Women: ग्रामीण क्षेत्रों में करियर बनाने के तरीके

Women: गांवों में है महिलाओं के लिए रोज़गार के अवसर

गांवों में रहते हुए भी महिलाएं (Women) करियर (Career) संवार सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोज़गार के अनेक अवसर मौजूद हैं। इस ब्लॉग में यही बात की गई है।

15 March 2021

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  • बीते कुछ दशकों में महिलाओं (Women) ने हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। यहां तक कि करियर ऑप्शन्स (Career Options) को लेकर भी वे काफी सजग रही हैं। हालांकि, शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Area) में विकल्पों की कमी ने महिलाओं के लिए थोड़ी परेशानियां ज़रूर खड़ी की हैं। लेकिन, कुछ करियर विकल्प अब भी मौजूद हैं, जिन पर संभवतः सबकी निगाह नहीं जाती।

     

    आज Knitter के इस ब्लॉग में हम उन्हीं करियर विकल्पों पर बात करेंगे। हम बताएंगे कि कैसे महिलाएं इन खास करियर विकल्पों को चुनकर अपने जीवन को नई दिशा दे सकती हैं। तो चलिए, जानकारियों का सिलसिला आगे बढ़ाते हैं। लेकिन, साथ ही साथ ये जान लेते हैं कि इस दौरान हम किन विकल्पों पर प्रकाश डालेंगे?

     

    आप जानेंगे-

     

    • आशा वर्कर कैसे बनते हैं?
    • एएनएम कैसे बनते हैं?
    • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बनते हैं?
    • आंगनबाड़ी सहायिका कैसे बनते हैं?
    • टीचर कैसे बनते हैं?
    • सिलाई और कढ़ाई-बुनाई में करियर कैसे तलाशा जा सकता है?

     

     

    आशा वर्कर (Anganwadi Worker):

     

    आशा वर्कर्स का स्वास्थ्य क्षेत्र (Health Sector) में विशेष योगदान होता है। इन पर स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की महती ज़िम्मेदारी होती है। पदों की बात की जाए, तो केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन चलने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत इनका चयन होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इन्हीं में से एक है।

     

    ज़िम्मेदारियां:

     

    • गांव और अंदरूनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना
    • स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना
    • गर्भावस्था में महिलाओं की काउंसलिंग करना
    • सुरक्षित प्रसव में उनकी मदद करना
    • आपात स्थिति में रेफरल देना
    • इम्यूनाइजेशन और कम्प्लीमेंट्री फीडिंग जैसे कार्यों को अंजाम देना  

     

    योग्यता:

     

    • 8वीं पास

     

    आयु सीमा:

    • 25 से 45 वर्ष

     

    चयन प्रक्रिया:

    • चयन का अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है

     

    *कुछ राज्यों में योग्यताओं और प्रक्रियाओं में अंतर संभव है।

     

    ANM वर्कर

     

    सामान्य शब्दों में कहें, तो ये आशा वर्कर्स की सुपरवाइज़र होती हैं। ये आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था का ध्यान रखती हैं। साथ ही आशा वर्कर्स की ज़िम्मेदारियां भी यही तय करती हैं। इसके अलावा समय-समय पर आशा वर्कर्स को ट्रेनिंग देना, उनकी सैलरी आदि का ध्यान रखना भी इन्हीं के ज़िम्मे होता है। ये केंद्र व राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों के तहत चलाए जा रहे मैटरनिटी सेंटर्स, अस्पतालों और उस जैसी अन्य परियोजनाओं का हिस्सा होती हैं।

     

    ज़िम्मेदारियां:

    • राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जाने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग
    • स्वास्थ्य और मातृत्व सुरक्षा पर काम
    • लोगों के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रचार-प्रसार करना
    • फील्ड विज़िट करना और लोगों को समझाना
    • स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना

     

    योग्यता:

     

    • साइंस में 12वीं पास
    • प्रतिष्ठित संस्थान से एएनएम का कोर्स
    • नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण

     

    आयु सीमा:

     

    •  21 से 32 वर्ष
    • हालांकि, अनुभव के आधार पर कई जगहों पर 40 वर्ष की उम्र भी मान्य है
    • आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को भी आयु सीमा में छूट मिलती है

     

    चयन की प्रक्रिया:

     

    • शैक्षणिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू के आधार पर चयन किया जाता है
    • कई बार संस्थान लिखित परीक्षा भी लेते हैं

     

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Worker):

     

    ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आंगनबाड़ी के कार्यों का संचालन करना इनकी जॉब प्रोफाइल का हिस्सा है। ये महिला (Women) और बच्चों (Children) के विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं।

     

    ज़िम्मेदारियां:

     

    • महिलाओं को परामर्श देना
    • बच्चों को शिक्षा प्रदान करना
    • महिलाओं और बच्चों में पोषण को बढ़ावा देना
    • टीकाकरण के काम में मदद करना
    • आंगनबाड़ी सहायिकाओं को गाइड करना
    • छोटे बच्चों के लिए स्कूल से पहले की गतिविधियों को अंजाम देना
    • परिवार नियोजन पर सही परामर्श देना

     

    योग्यता:

     

    • 10वीं पास  
    • स्थानीय निवासी होना ज़रूरी
    • महिला का विवाहित होना भी ज़रूरी है

     

    आयु सीमा:

     

    • 21 से 45 वर्ष

     

    चयन की प्रक्रिया:

     

    • राज्य द्वारा चयनित एजेंसियों पर इनकी भर्ती का ज़िम्मा होता है। बड़ी तादाद में भर्तियां निकलती हैं।

     

    *कुछ राज्यों में योग्यताओं और प्रक्रियाओं में अंतर संभव है।

     

    आंगनवाड़ी सहायिका (Anganwadi Helper):

     

    ये आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बिठाकर काम करती हैं। ये मुख्य रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद करती हैं और बच्चों और महिलाओं के विकास में अपना योगदान देती हैं। यहां तक कि बच्चों को घर से लाकर पढ़ाना, उन्हें वापस घर पहुंचाना और इसके जैसे दूसरे अन्य काम भी करती हैं।

     

    योग्यता:

     

    • 8वीं पास
    • महिला का विवाहित होना अनिवार्य

     

    आयु सीमा:

     

    • 21 से 45 वर्ष

     

    *कुछ राज्यों में योग्यताओं और प्रक्रियाओं में अंतर संभव है।

     

    टीचर:

     

    ये संभवतः दुनिया की सबसे रिस्पेक्टबल जॉब्स में से एक है। एक टीचर न सिर्फ बच्चों को पढ़ाता है, बल्कि उनके भविष्य की नींव भी रखता है। लिहाज़ा, ये प्रोफेशन आपके कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी डालता है। आप पीआरटी, टीजीटी और पीजीटी टीचर बन सकते हैं। टीचर बनकर आप किसी भी सरकारी व प्राइवेट स्कूल में अपनी सेवाएं दे सकते हैं। आप चाहें, तो बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ा सकते हैं।

     

    • पीआरटी (PRT)- प्राइमरी टीचर
    • टीजीटी (TGT)- ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर
    • पीजीटी (PGT)- पोस्ट ग्रेजुएट टीचर

     

    ज़िम्मेदारियां:

     

    • बच्चों को पढ़ाना
    • उनकी परीक्षाएं लेना
    • स्कूल में अच्छा वातावरण निर्मित करना
    •  बच्चों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना
    • उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना
    • शैक्षणिक गतिविधियों का नेतृत्व करना

     

    योग्यता:

     

    • 12वीं पास
    • एनटीटी
    • डिप्लोमा इन एलेमेंट्री एजुकेशन

     

    * इन योग्यताओं के साथ आप छोटी क्लास के बच्चों को तो पढ़ा सकते हैं। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत अब शिक्षक बनने के लिए बीएड अनिवार्य कर दिया गया है।

     

    आयु सीमा:

     

    • 21 से 42 वर्ष

     

    *अलग-अलग राज्यों में योग्यता और आयु सीमा में अंतर संभव है।

     

    सिलाई-कढ़ाई और बुनाई एक्सपर्ट

     

    ग्रामीण अंचलों में ये करियर के रूप में एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कपड़ा क्षेत्र में इस काम की काफी डिमांड है। यहां तक कि खुद सरकार भी इन कामों को बढ़ावा दे रही है। ‘समर्थ योजना’ इसी का एक उदाहरण है। 

     

    कुछ समय पहले आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, कपड़ा क्षेत्र में करीब 16 लाख कुशल कामगारों की कमी है। साथ ही ये बात भी सामने आई कि इस क्षेत्र में करीब 75 प्रतिशत एक्सपर्ट महिलाएं हैं। लिहाज़ा, ये काम महिलाओं के लिए एक अच्छा स्कोप प्रदान करता है।

     

    ज़िम्मेदारियां:

     

    • कपड़े की सिलाई करना
    • एम्ब्रॉयडरी से जुड़े काम करना
    • कपड़ों की डिज़ाइनिंग करना
    • नए-नए डिज़ाइन तैयार करना

     

    योग्यता:

    • कटिंग, सिलाई और टेलरिंग की नॉलेज
    • कढ़ाई-बुनाई का अच्छा ज्ञान

     

    आयु सीमा:

     

    • किसी भी उम्र की महिला ये काम कर सकती हैं

     

    हमें उम्मीद है कि आपको Knitter का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यहां आपको ट्रेंडिंग टॉपिक्स के अलावा बिज़नेस, कृषि एवं मशीनीकरण, एजुकेशन और करियर, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे। आप इनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

     

     

    लेखक- कुंदन भूत

     



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