बायोकेमिकल इंजीनियरिंग- कोर्स, करियर और सैलरी

बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में करियर की संभावनाएं

बायोकेमिकल इंजीनियर्स बायोलॉजी और केमिस्ट्री की नॉलेज से बायो-मटेरियल का निर्माण करते हैं। आइए जानते हैं इसमें करियर की क्या संभावनाएं हैं।

01 March 2021

  • 93 Views
  • 3 Min Read

  • भारत में जनसंख्या के मुकाबले रोज़गार के काफी कम मौके हैं। अच्छी नौकरी पाने के लिए व्यक्ति को अपनी फील्ड में बेहतर  होना बेहद ज़रूरी है। इन दिनों प्रोफेशनल कोर्स के प्रति छात्रों का रुझान काफी ज़्यादा देखने को मिल रहा है। क्योंकि, इसके बाद नौकरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। प्रोफेशनल कोर्सेज में इंजीनियरिंग साइंस स्टूडेंट्स का पसंदीदा पेशा है। लाखों छात्र हर साल इसकी अलग-अलग ब्रांच में एडमिशन लेते हैं। 

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग (Biochemical Engineering) भी इंजीनियरिंग की एक फील्ड ही है,  जिसमें डिग्री पाने के बाद आपको बड़ी-बड़ी प्रयोगशालाओं में नए प्रोडक्ट्स बनाने और शोध करने का मौका मिलता है। और आप जैव (Bio) और रासायनिक (Chemical) विज्ञान में रिसर्च और नई तकनीक विकसित करके आधुनिक उत्पाद और दवाइयां तैयार करते हैं। 

     

    इस फील्ड में रुचि रखने वाले छात्रों के कई सवाल होंगे कि आखिर बायोकेमिकल इंजीनियरिंग है क्या? इस फील्ड में पढ़ाई के लिए क्या ऑप्शन्स हैं? कहां नौकरी मिलती है?  सबसे ज़रूरी बात कि पैसा कितना कमा सकते हैं? तो चलिए आज आपकी इन्हीं उलझनों को दूर कर देते हैं।

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग बायो यानी जीव और केमिकल यानी रसायन विज्ञान के अध्ययन से जुड़ी एक फील्ड है। इंजीनियरिंग की इस ब्रांच में जीव, एंजाइम सिस्टम, वायरस आदि के जैविक और केमिकल प्रोसेस से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है। 

     

    बायोकेमिकल इंजीनियर्स बायोलॉजी और केमिस्ट्री की नॉलेज का इस्तेमाल नए बायो-मटेरियल (Bio Material) को डिज़ाइन करने में इस्तेमाल करते हैं। इसमें नए मॉलिक्यूल, माइक्रो ऑर्गेनिज्म, दवाएं, वैक्सीन आदि शामिल हैं। 

     

    आपको बता दें कि दुनिया में उथल-पुथल मचा देने वाले  कोरोना वायरस के बारे में रिसर्च और उसके लिए वैक्सीन के निर्माण में बायोकेमिकल इंजीनियर्स की अहम भूमिका रही है।

     

    बायोकेमिकल इंजीनियर कौन-कौन बन सकता है?

     

    सभी इंजीनियरिंग कोर्सेस की तरह बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के लिए भी फिजिक्स केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ 12वीं की पढ़ाई करना ज़रूरी है। सामान्य वर्ग के छात्र को 12वीं में कम से कम 55 प्रतिशत अंक लाना ज़रूरी हैं।

     

    पढ़ाई के विकल्प

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र ग्रेजुएशन लेवल पर बी.टेक. (B.Tech) या बी.ई. (B.E.) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। बी.टेक. कोर्स की अवधि चार साल और बी.ई. कोर्स की अवधि तीन से चार साल की हो सकती है। 

     

    जो छात्र मास्टर लेवल की डिग्री लेना चाहें, वो ग्रेजुएशन के बाद दो साल के एम.टेक. (M.Tech) कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। शोध करने और प्रोफेसर बनने की इच्छा रखने वाले स्टूडेंट्स इसके बाद इस क्षेत्र में पीएचडी (PhD) की पढ़ाई करते हैं।

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के लिए टॉप कॉलेज

     

    किसी भी फील्ड में अच्छी नौकरी पाने के लिए ज़रूरी है कि आप किसी भी अच्छे संस्थान से पढ़ाई करें। भारत में कई सरकारी और निजी संस्थान बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा करवाते हैं, लेकिन अच्छी प्लेसमेंट के लिए इन पांच कॉलेजों को आप अपनी टॉप लिस्ट में रखें।

     

    • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT), खड़गपुर
    • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT), दिल्ली
    • जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता
    • नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NSIT), दिल्ली
    • हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर

     

    प्रवेश परीक्षाएं

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के लिए टॉप कॉलेजों से बीटेक (B.Tech) कोर्स में दाखिला लेने के लिए आपको 12वीं के बाद प्रवेश परीक्षाएं पास करनी पड़ती हैं, जिसके लिए अच्छे स्तर की तैयारी बहुत ज़रूरी है, आप इसके लिए सेल्फ स्टडी या फिर कोचिंग की भी मदद ले सकते हैं।

     

    जॉइंट एंट्रेंस एग्ज़ाम (JEE)- इंजीनियरिंग के सभी पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए ये परीक्षा हर साल आयोजित करवाई जाती है। इसके आधार पर आईआईटी (IIT), सरकारी कॉलेजों और कई निजी  विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है।

     

    स्टेट और यूनिवर्सिटी लेवल टेस्ट- कई निजी और राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा अपने स्तर पर भी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती हैं। जिनमें से कुछ हैं- 

     

    • महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MHT CET)
    • कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET)
    • आंध्र प्रदेश इंजीनियरिंग एग्रीकल्चर मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (AP EAM-CET)
    • तेलंगाना इंजीनियरिंग एग्रीकल्चर मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (TS EAM-CET)
    • केरल इंजीनियरिंग एग्रीकल्चर मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (K EAM-CET)

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में क्या सीखते हैं?

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में स्टूडेंट्स बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सिद्धांतों और तकनीकों के प्रयोग से नए उत्पाद जैसे दवाइयां, मटेरियल, फ्यूल जैसी कुछ  ज़रूरत की चीज़ें तैयार करते हैं। ऐसे तो कोर्स में कई सारे टॉपिक्स पढ़ाए जाते हैं, जिनमें कुछ ज़रूरी हैं-

     

    • बायोकेमिस्ट्री
    • इम्यूनोलॉजी
    • फर्टिलाइज़र टेक्नोलॉजी
    • और्गॆनिक केमिस्ट्री
    • पॉलीमर इंडस्ट्री
    • मेटाबोलिक रेगुलेशन और इंजीनियरिंग
    • बायोकेमिस्ट्री
    • एनवायरमेंटल बायोटेक्नोलॉजी
    • माइक्रोबायोलॉजी
    • एंजाइम इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग की कोर्स फीस 

     

    भारत के विभिन्न कॉलेजों में बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में बी़टेक(B.Tech) कोर्स की अनुमानित फीस 50 हज़ार से 2 लाख रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। 

     

    नौकरी के मौके

     

    बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लगातार हो रही प्रगति से इस क्षेत्र में देश और विदेश में रोज़गार की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। इस क्षेत्र के प्रोफेशनल को सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी के कई मौके मिलते हैं। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ दवाइयों, रंग, जैव-ईंधन, स्टेरॉयड, एंजाइम, बायो-उर्वरक, जैव-विश्लेषकों का उत्पादन करते हैं।

     


     

    अनुमानित सैलरी

     

    भारत में बायोकेमिकल इंजीनियर को सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में सामान्य सैलरी 5 से 10 लाख रुपये सालाना तक मिल जाती है। वहीं, यदि आप इस फील्ड में रिसर्च करने के बाद खुद कोई नया उत्पाद, नई दवाई या फिर कोई फॉर्मूला इजाद कर लेते हैं, तो फिर मिलने वाली राशि का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

     

     

    इस फील्ड में रुचि रखने वालों के लिए एक सुनहरा भविष्य इंतजार कर रहा है। बशर्ते आप इसके लिए मेहनत करें और अच्छे कॉलेज में एडमिशन के लिए तैयारी अभी से शुरू कर लें।

     

     

    लेखक- मोहित वर्मा

     

    करियर गाइड की अन्य ब्लॉग