भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत मिलेगा 50 हजार तक का बीमा कवर

भामाशाह पशु बीमा योजना : पशुओं का बीमा करवाने के लिए सरकार देगी अनुदान

पशुपालकों को पशु पालने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा भामाशाह पशु बीमा योजना शुरू की गई है।


 

इस योजना के अंतर्गत भेड़, बकरी, गाय, भैंस, ऊंट, घोड़ा, गधा, खच्चर आदि जानवरों का बीमा किया जाता है और सरकार द्वारा बीमे की प्रीमियम राशि पर अनुदान दिया जाता है। Knitter के इस ब्लॉग में राजस्थान की भामाशाह पशु बीमा योजना से जुड़े सभी सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है। पशु बीमा योजना के लिए आवेदन कैसे किया जाता है? इसके लिए योग्यता क्या होनी चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए इस ब्लॉग को ध्यान से पढ़िए।

 

क्या है योजना ?

भामाशाह पशु बीमा योजना के तहत पशुपालक घर बैठे अपने पशुओं का बीमा करवा सकते हैं। योजना के तहत बीमा करवाने के लिए पशुपालकों के पास भामाशाह कार्ड होना चाहिए। बीमे की प्रीमियम राशि पर सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है और प्रति पशु अधिकतम 50 हजार तक का बीमा कवर प्रदान किया जाता है। 

 

भामाशाह पशु बीमा योजना का उद्देश्य

 योजना का उद्देश्य है कि किसी भी पशु की मौत हो जाने पर उनके पालकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। वहीं, किसान ज्यादा से ज्यादा पशु रखकर अपनी आय भी बढ़ा सकें।

 

योजना के फायदे

  • भैंस और भार ढोने वाले पशु जैसे ऊंट, घोड़े, गधे आदि का बीमा करवाने पर अधिकतम 50,000 रुपये का बीमा कवर मिलेगा।
  • गाय का बीमा करवाने पर 40,000 रुपये का इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाएगा।
  • सूअर, भेड़, बकरी इत्यादि का बीमा करवाने पर 50,000 रुपये प्रति 10 पशु का बीमा कवर दिया जाएगा। (10 पशुओं को 1 कैटल युनिट माना जाएगा।)
  • बीमे की प्रीमियम राशि पर सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को 50 प्रतिशत अनुदान सरकार द्वारा दिया जाएगा।
  • योजना के तहत एससी/एसटी और बीपीएल कार्ड धारकों के पशुपालकों को बीमे की प्रीमियम राशि पर 70 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।
  • एक किसान अधिकतम 5 कैटल यूनिट का बीमा अनुदानित प्रीमियम दरों पर करवा सकेगा।

 

 

 

योजना के पात्र होने की शर्तें 

  • पशुपालक राजस्थान का स्थाई निवासी होना चाहिए।
  • पशुपालक के पास भामाशाह कार्ड होना आवश्यक है।
  • परिवार महात्मा गांधी नेशनल रूरल रोजगार गारंटी एक्ट 2005 में रजिस्टर्ड होना चाहिए।

 

इन स्थितियों में दिया जाएगा क्लेम

  • दुर्घटना (आग, बिजली, बाढ़ भूकंप आदि) से पशु की मृत्यु होने पर
  • किसी बीमारी से पशु की मृत्यु होने पर
  • ऑपरेशन के दौरान पशु की मृत्यु होने पर
  • दंगे या फसाद में पशु की मृत्यु होने पर

 

जरूरी दस्तावेज़

  • आवेदन पत्र
  • पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
  • पशुपालक का पशु के साथ (कान में लगे टैग सहित) फोटो
  • भामाशाह कार्ड की कॉपी
  • बीपीएल कार्ड/एससी या एसटी प्रमाण पत्र
  • आधार कार्ड की कॉपी
  • बैंक खाता संख्या व आईएफएससी कोड

 

योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया

  • योजना संबंधी फॉर्म को ऑफिशियल वेबसाइट  http://ibs.rajasthan.gov.in/ पर जाकर डॉउनलोड करें या लोकमित्र केंद्र से योजना का फॉर्म खरीदें।
  • फॉर्म में पूछी गई जानकारी को सही से भरें और जरूरी दस्तावेजों को साथ में संलग्न करें।
  • योजना के फॉर्म को सभी दस्तावेजों के साथ नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी के पास जमा करवा दें।
  • सरकार द्वारा निर्धारित की गई बीमा कंपनी के पास अपने हिस्से की बीमा प्रीमियम की राशि को जमा करवाएं।
  • बीमित पशु की पहचान के लिए उस पर टैग लगाया जाएगा और मालिक के साथ फोटो ली जाएगी।
  • बीमा एक या तीन साल की अवधि के लिए होगा। पशुपालक बीमा प्लान का अवधि चुन सकेंगे।
  • पशुपालकों को अपने हिस्से की प्रीमियम राशि जमा करवानी होगी, अनुदान की राशि सरकार द्वारा सीधी बीमा कंपनी को भेजी जाएगी।

 

बीमा राशि क्लेम करने की प्रक्रिया :

बीमित पशु की मृत्यु होने पर आपको बीमा कंपनी से तय किया क्लेम मिलेगा जिसके लिए आपको ये प्रक्रिया अपनानी होंगी: 

  • पशु की मृत्यु 6 घंटों के अंदर बीमा कंपनी को फोन पर या एसएमएस के माध्यम से सूचना देनी होगी।
  • इसके बाद पशु चिकित्सक द्वारा मृत पशु का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
  • मृत पशु के साथ पशुपालक की फोटो खींची जाएगी जिसमें पशु के कान में लगा टैग भी दिखना जरूरी है।
  • बीमा पॉलिसी के कागज़, पोस्टमोर्टम रिपोर्ट और खींची गई फोटो को क्लेम फॉर्म के साथ बीमा कंपनी में जमा करवाना होगा।
  • सभी दस्तावेज जमा करवाने के 15 दिनों के अंदर कंपनी द्वारा बीमा राशि पशुपालक के खाते में भेज दी जाएगी।

 

इन स्थितियों में नहीं मिलेगा क्लेम

  • पशु की मृत्यु के समय कान में टैग ना मिलने की स्थिति में।
  • पशुपालक द्वारा पशु की मृत्यु के 6 घंटे के अंदर सूचित ना करने की स्थिति में।
  • पशु की चोरी होने या पशु को बिना जानकारी के बेच देने पर।
  • जानबूझ कर पशु को नुकसान पहुंचाने पर।

 राजस्थान सरकार की इस योजना से पशुपालक ज्यादा पशु पालने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। अब पशुपालकों को पशुओं की बीमारी या दुर्घटना में मर जाने पर होने वाले नुकसान की चिंता नहीं है। उम्मीद है आप इस योजना से जुड़ी सभी बातों को इस ब्लॉग में आसानी से समझ पाए होंगे। ऐसी अन्य कई लाभकारी योजनाओं की जानकारी Knitter पर आसान भाषा में उपलब्ध है।

 

 

राज्य सरकार की योजनाएं की अन्य ब्लॉग