Medicinal plants: औषधीय पौधों की खेती कर हो सकते हैं मालामाल

किसानों को औषधीय पौधे (Medicinal plants) कर सकते हैं मालामाल

भारत में इन दिनों लोगों का आयुर्वेद (Ayurveda) की ओर काफी रुझान बढ़ रहा है। किसान भी औषधीय पौधे (Medicinal plants) उगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।

13 January 2021

  • 791 Views
  • 5 Min Read

  • भारत में आयुर्वेद (Ayurveda) की तरफ लोगों के बढ़ते रुझान से आयुर्वेदिक दवाइयों (Ayurvedic medicines) और दूसरे प्रोडक्ट्स की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इससे बाज़ार में औषधीय पौधों (Medicinal plants) की मांग भी बढ़ रही है। किसानों के लिए अपनी आय बढ़ाने का ये एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है। जागरूक किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती से हटकर औषधीय फसल (Medicinal crop) उगा रहे हैं। इससे कम लागत और कम जगह में अच्छा मुनाफा कमाकर कई किसान मालामाल हुए हैं। इस ब्लॉग में हम मेडिसिनल प्लांट्स के फायदों और उनके उत्पादन को लेकर विस्तार से चर्चा करेंगे। ताकि आप भी अपने खेतों में औषधीय पौधे उगा सकें।

     

    औषधीय पौधे (medicinal plants)

     

    दवाएं या स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद बनाने में जिनका इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे पौधों को औषधीय पौधे (Medicinal Plants) कहा जाता है। इन्हें खेतों के साथ-साथ गमलों में भी उगाया जा सकता है। इनका घरेलू उपचार (Home remedies) में तो इस्तेमाल किया ही जाता है साथ ही बाज़ार में भी अच्छी खासी कीमत मिलती है। भारत (India) में उगाए जाने वाले कुछ औषधीय पौधे हैं- एलोवेरा, ईसबगोल, ब्राह्मी, अश्वगंधा, कलौंजी आदि।

     

    औषधीय पौधों की खेती के लाभ (Benefits of medicinal plant cultivation)

    • लंबे-चौड़े खेतों की ज़रूरत नहीं
    • बाजार में भारी मांग
    • कम लागत में ज़्यादा मुनाफा
    • जल्दी तैयार हो जाती है फसल
    • घरेलू उपचार (Home remedies) में इस्तेमाल
    • कम मेहनत लगती है
    • बंजर या कम उपजाऊ ज़मीन पर उग जाते हैं
    • पर्यावरण संरक्षण (Environment protection) में योगदान

     

    इन औषधीय पौधों की बाजार में है मांग

     

    औषधीय फसलें उगाकर कमाई करना चाहते हैं तो इन बातों का ख्याल रखें

     

    परंपरागत खेती (Traditional farming) कर रहे किसानों या कृषि की ओर रुख कर रहे युवाओं के लिए औषधीय फसलें (Medicinal crop) मुनाफा कमाने का एक अच्छा विकल्प बन सकती हैं। लेकिन खेती शुरू करने से पहले आपको कुछ बातें ज़रूर ध्यान में रखना चाहिए।

     

    ट्रेनिंग

    यदि आप व्यापारिक दृष्टि से औषधीय पौधों का उत्पादन करना चाहते हैं तो इसके लिए औषधीय पौधों (Medicinal plants) को उगाने से लेकर उनकी देखभाल और हार्वेस्टिंग (Harvesting) के बारे में ट्रेंनिंग लेना ज़रूरी है। इसके लिए केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) से एक विकल्प है। आप निजी संस्थानों की भी तलाश कर सकते हैं।

     

    ज़मीन के हिसाब से फसल का चयन

    अपनी ज़मीन की जलवायु और मिट्टी (Soil) को ध्यान में रखते हुए उगाई जाने वाली औषधीय फसल का चयन करें। इसके लिए आप मिट्टी की जांच करवा कर एक्सपर्ट से राय भी ले सकते हैं।

     

    सरकारी अनुदान

    आयुर्वेद (Ayurveda) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई औषधीय पौधों की खेती के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अनुदान भी दिया जाता है। फसल उगाने से पहले सरकारी वेबसाइट्स पर या कार्यालयों में जाकर अनुदान संबंधी जानकारी जरूर लें।

     

    बाज़ार की जानकारी

    औषधीय फसल उगाने से पहले बाजार का ध्यान जरूर रखें क्योंकि सामान्य मंडी में आपको औषधीय फसलों के खरीदार नहीं मिलेंगे। इसके लिए आपको सीधा किसी कंपनी या खरीदार से सीधे संपर्क करना होगा। इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और ई-चरक एप अच्छा विकल्प हो सकते हैं।

     

    कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

    फसलों को बाजार में बेचने के बजाए औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक अच्छा विकल्प है। दवाइयों और आयुर्वेद से जुड़ी कई कंपनियां औषधियों के उत्पादन के लिए किसानों को कॉन्ट्रैक्ट देती हैं। किसान अपने खेत में फसल उगाता है और तैयार फसल कंपनी द्वारा पहले से तय दाम पर उठा ली जाती है।

     

    ई-चरक एप

    ये एप सरकार के आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) द्वारा तैयार की गई है। ये औषधीय पौधों के खरीदारों और उत्पादकों के बीच में एक वर्चुअल बाज़ार की तरह काम करता है। यहां पर किसान अपनी फसल की जानकारी अपलोड करता है और खरीदार दाम तय करता है।

     

    उम्मीद है कि इस ब्लॉग में आपको औषधीय पौधों के उत्पादन संबंधी सभी जानकारियां मिल पाएंगी। तो सोच क्या रहे हैं, आज ही अपना पहला कदम बढ़ाएं और अपने खेतों में औषधीय फसल उगाकर ढेर सारा मुनाफा कमाएं। हमारे चैनल पर ऐसे और भी ब्लॉग पढ़कर आप उनका फायदा ले सकते हैं।

    कृषि की अन्य ब्लॉग