जानें क्या हैं भारतीय महिला के मूलभूत अधिकार

हर महिला को होनी चाहिए इन 10 अधिकारों की जानकारी

महिलाओं को अपने मूलभूत अधिकारों और सुरक्षा कानूनों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे समाज में उनके साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा सकें।

04 February 2021

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  • महिलाओं को भारतीय संविधान में कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं, ताकि वे भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकें। अक्सर महिलाएं इन अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक नहीं होती और अपने खिलाफ हो रहे भेदभाव और अत्याचारों को सहती रहती हैं। आज हम महिलाओं से जुड़े 10 मूलभूत अधिकारों और कानूनों (Rights for women) की बात करेंगे, ताकि महिलाएं समाज में होने वाले भेदभाव और शोषण से अपना बचाव कर पाएं।

     

    इस ब्लॉग में आप इन कानूनों और अधिकारों के बारे में जानेंगे-

     

    • घरेलू हिंसा से सुरक्षा
    • समान वेतन का अधिकार
    • दहेज उत्पीड़न से सुरक्षा
    • पैतृक संपत्ति पर अधिकार
    • गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले अधिकार
    • गिरफ्तारी संबंधी अधिकार
    • छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न से सुरक्षा
    • मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार
    • कन्या भ्रूण हत्या से सुरक्षा


     

    जानें कौन से हैं भारतीय महिला के मूलभूत अधिकार

     

     

    1.घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार

     

    महिलाओं के साथ उनके पति, लिव इन पार्टनर या अन्य रिश्तेदार द्वारा किया गया  शारीरिक, मौखिक, मानसिक व भावनात्मक उत्पीड़न घरेलू हिंसा में आता है। घरेलू हिंसा से महिलाओं के बचाव के लिए भारतीय दंड संहिता में कुछ कानून और धाराएं हैं। इनमें घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 मुख्य है। यदि कोई महिला घरेलू हिंंसा की शिकार है तो वो इस अधिनियम के तहत महिला हेल्पलाइन या थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवा सकती है। इसमें महिला को कानूनी संरक्षण मिलता है और अपराधी को 3 साल तक की सजा हो सकती है।

     

    2.समान वेतन का अधिकार

     

    संविधान के कुछ अनुच्छेद लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ महिलाओं की सुरक्षा करते हैं। जबकि  समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 कामकाजी महिलाओं के साथ वेतन को लेकर होने वाले भेदभाव के लिए बनाया गया है। यदि किसी महिला को समान कार्य और समान पद पर पुरुष से कम वेतन दिया जाता है तो ये कानूनन अपराध है। यदि आप ऐसे भेदभाव का सामना करती हैं, तो इसके खिलाफ बेझिझक आवाज़ उठाएं। इसके लिए आप महिला आयोग की भी मदद ले सकती हैं।

     

    3.दहेज उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार

     

    हमारे समाज ने महिलाओं के खिलाफ प्रचलित कई कुरीतियों को बीते दशकों में खत्म किया है, लेकिन दहेज प्रथा को अभी तक नहीं रोक पाए हैं। इसके लिए सख्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में या कई बार दबाव में पीड़ित इसका लाभ नहीं उठा पाते।

    यदि किसी महिला को ससुराल पक्ष द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, तो वो खुद या उसका कोई रिश्तेदार भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत शिकायत दर्ज करवा सकता है। इसके तहत अपराधी को 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दहेज प्रथा के खिलाफ कानूनों के बारे में ज़्यादा जानने के लिए आप यहां (https://blog.knitter.co.in/laws-against-dowry-system) पढ़ सकते हैं।

     

    4.पैतृक संपत्ति पर अधिकार

     

    हमारे समाज में महिलाओं का उनके पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं समझा जाता। लेकिन, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 में पिता की संपत्ति पर बेटियों का भी बेटों के बराबर अधिकार है। यही कानून बौद्ध, सिख, जैन, आर्य समाज और ब्रह्म समाज समुदायों पर भी लागू है। व्यक्ति को अपनी प्रॉपर्टी को किसी के भी नाम करने का अधिकार होता है, लेकिन यदि किसी ने अपनी वसीयत नहीं बनाई है, तो उसकी संपत्ति में बेटों और बेटियों का बराबर का हक है।

     

    5.गर्भवती महिलाओं के अधिकार

     

    भारत में गर्भवती महिलाओं को कुछ सुविधाएं और अधिकार मिलते हैं। बस, ट्रेन में गर्भवती महिलाओं की सीटें आरक्षित होती हैं। वहीं, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच और सलाह दी जाती है। कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत अधिकतम 26 हफ्तों की सवेतन छुट्टियों (Paid Leave) का प्रावधान है। यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

     

    6.गिरफ्तारी संबंधी अधिकार

     

    किसी भी महिला को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम में महिला कॉन्स्टेबल का होना ज़रूरी हैं। वहीं, आईपीसी की धारा 46(4) सामान्य अपराधों की स्थिति में किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। गंभीर अपराध की स्थिति में भी महिला को रात में गिरफ्तार करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश ज़रूरी है। वहीं, किसी पूछताछ के लिए भी महिला को रात में पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया जा सकता। साथ ही किसी भी आरोपी महिला की मेडिकल जांच महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।

     

    7.नाम न छपने का अधिकार

     

    किसी भी तरह के यौन अपराध की शिकार महिला का नाम सार्वजनिक करना अपराध है। भारतीय संविधान महिला को उसकी गोपनीयता की रक्षा करने का अधिकार देता है। इसके लिए यौन उत्पीड़न की शिकार महिला के बयान अकेले में किसी महिला अधिकारी या जिला अधिकारी के सामने दर्ज करवाए जाते हैं। किसी मीडिया संस्थान या पुलिसकर्मी द्वारा महिला का नाम सार्वजनिक किए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।

     

    8.छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार

     

    महिलाओं को कई स्थानों पर यौन अपराधों का सामना करना पड़ता है। सेक्शन 354 के तहत छेड़छाड़ संबंधी अपराधों के लिए अलग-अलग सब-सेक्शन शामिल किए गए हैं। जिनमें सामान्य से गंभीर अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 377 में कड़ी सजा का प्रावधान है। वहीं, कार्य स्थल (Work Place) पर छेड़छाड़ जैसे अपराधों के लिए कंपनी द्वारा कमेटी भी गठित की जाना अनिवार्य है। 

     

    9.मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार

     

    यौन उत्पीड़न अपराध की पीड़ित महिला को भारतीय संविधान में मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार दिया जाता है। इसके लिए पुलिस अधिकारी द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित किया जाता है। 

     

    10.कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कानून

     

    कई इलाकों में आज भी बेटा-बेटी में भेदभाव किया जाता है और बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। इसके खिलाफ सबसे पहले तो भ्रूण लिंग चयन अधिनियम 1994 के तहत भ्रूण की लिंग जांच अपराध की श्रेणी में आता है। वहीं, गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971 के तहत अबॉर्शन को अपराध माना गया है और इसके लिए सजा का प्रावधान है। अबॉर्शन किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी में मान्यता प्राप्त अस्पताल द्वारा ही करवाया जा सकता है।


     

    जानें कौन से हैं भारतीय महिला के मूलभूत अधिकार

     

    ये कुछ मूलभूत अधिकार हैं, जिनकी जानकारी सभी महिलाओं को ज़रूर होनी चाहिए। तो इस ब्लॉग को दूसरों के साथ साझा ज़रूर करें और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में Knitter की मदद करें।

     

    ✍️लेखक- मोहित वर्मा        

     

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