केले की खेती भरेगी आपकी जेब, जानिए ये जरूरी टिप्स

केले की खेती से लाखों कमाएं, जानें क्या कहता है विज्ञान?

केला भारत में आम के बाद दूसरे नंबर का मशहूर फल है। केले की खेती रोज़गार का एक बेहतर विकल्प भी है। आइए, इस ब्लॉग में केले की खेती के बारे में विस्तार से जानें।

21 January 2021

  • 3085 Views
  • 8 Min Read

  • केला ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। इसे नकदी फसलों का राजा माना जाता है।  इसके स्वाद, पोषक तत्व और औषधीय गुणों के कारण इसकी डिमांड बाज़ार में साल भर रहती है। यह कार्बोहाइड्रेट और विटामिन (Vitamin), विशेष कर विटामिन बी का उच्च स्रोत है। 

     

    केले की खेती (banana farming) मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में की जाती है। लेकिन अब केले की खेती (kele ki kheti) का विस्तार उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भी हो रहा है। 

     

    यदि किसान केले की बागवानी वैज्ञानिक तकनीक से करें, तो इसकी फसल से अधिकतम उपज प्राप्त की जा सकती है। युवाओं के लिए केले की खेती रोज़गार का एक प्रमुख साधन बन सकती  है।

     

    जो किसान केले की खेती (kele ki kheti) करना चाहते हैं, उन्हें किन-किन बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत है। आज हम Knitter के इस ब्लॉग में केले की बागवानी (Banana farming) के विषय पर चर्चा करेंगे। 

     

    इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे- 

    • केले की खेती के लिए जलवायु
    • केले के लिए मिट्टी
    • केले की खेती का समय
    • केले की खेती की तैयारी
    • केले की उन्नत किस्में
    • केले की खेती में सिंचाई
    • केले में लगने वाले रोग और उसका निदान
    • केले की खेती से कमाई
    • एक्सपर्ट की सलाह

    जिससे आप केले की उन्नत खेती करके अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

     

    तो आइए सबसे पहले केले के लिए जलवायु (Climate) के बारे में जानते हैं। 

     

    केले के लिए जलवायु

     

    केला गर्म जलवायु का पौधा है। केले की फसल के लिए नम जलवायु की आवश्यकता होती है। अधिक पैदावार के लिए 20 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड की तापमान उपयुक्त होती है। 10 सेंटीग्रेड से कम और 45 सेंटीग्रेड से अधिक तापमान केले की फसल के लिए नुकसानदायक होती है। इससे उत्पादन में भी प्रभाव पड़ता है।  

     

    केले की खेती से जुड़ी हर जानकारी यहां पाएं

     

    केले की खेती के लिए मिट्टी

     

    केले की बागवानी के लिए उपजाऊ मिट्टी (fertile soil) की ज़रूरत होती है। केले की खेती के लिए मिट्टी की पीएच वैल्यू (ph) 5.5 से 8.5 होनी चाहिए, लेकिन केले की खेती से आप अच्छा उत्पादन और अच्छी क्वालिटी की उपज चाहते हैं तो मिट्टी का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए। इसके लिए किसानों को मिट्टी की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। 

     

    केले की खेती का समय

     

    दक्षिण भारत में इसकी खेती पूरे वर्ष की जा सकती है। लेकिन केले के पौधे की रोपाई के लिए जून-जुलाई का महीना उपयुक्त होता है। इसके अलावा अक्टूबर-नवंबर में भी केले के पौधे की रोपाई की जा सकती है। 

     

    केले की खेती की तैयारी

     

    केले के बागवनी विषेशज्ञ और कृषि विज्ञान केंद्र बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजीत सिंह बताते हैं,

    जो किसान केले की खेती करने जा रहे हैं, उन्हें इसकी खेती के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण (scientific approach) का ध्यान रखना चाहिए।

    • केले की किस्मों का चुनाव अपने क्षेत्र विशेष के अनुसार करें।
    • पौधा रोपण  से पहले कंद यानी पौधे की क्वालिटी (Quality) का जरूर ध्यान रखें
    • पौधा हमेशा विश्वसनीय जगह  या कृषि केंद्रों से ही लें।
    • पौधा रोपण के लिए पौधे की लंबाई 30 सेंटीमीटर, मोटाई 5 सेंटीमीटर और पत्तियों की संख्या 4-5 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
    • केले की खेती से पहले गर्मी के महीने में खेत को गहरी जुताई करके कुछ दिनों के लिए छोड़ दें। 
    • पौधा रोपण  से पहले ढेंचा, लोबिया जैसी हरी खाद की फसल उगाकर उसे मिट्टी में पलट दें। 
    • हरी खाद की जगह पर आप वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद का भी उपयोग कर सकते हैं। 
    • उपजाऊ मिट्टी होने से केले के साथ अन्य फसलें लेने में अच्छी पैदावार मिलती है।
    • केले की खेती के लिए सबसे पहले हमे मिट्टी की अच्छी तरह जुताई कर भूमि को भुरभुरा कर समतल कर लें। 

     

    केले की उन्नत किस्में

     

    भारत में G-9 प्रजाति का सबसे अधिक उत्पादन किया जाता है। यह देखने में सुंदर और उत्पादन में सबसे अच्छी प्रजाति है। इसके अलावा रसभाती, महालक्ष्मी, रोबस्टा, नेन्द्रन, मोन्थन, करी बनाना, कर्पूरावली, इवार्फ कैवेन्डिश, लाल केला, पूवन, मट्टी, उदयम इत्यादि केले की उन्नत प्रजातियां हैं।

     

    केले की खेती में सिंचाई

     

    केला पानी की फसल है, इसमें वर्षभर नमी की ज़रूरत होती है। अत: इसमें सिंचाई (Irrigation) का खास ध्यान रखना होता है। पानी की बचत के लिए किसानों को ड्रिप इरिगेशन (Drip irrigation) से सिंचाई करना फायदेमंद होता है। 

     

    केले के रोग और उपचार 

     

    केले की फसल भी कीट और रोगों से प्रभावित होती है, अगर केले की फसल में सही समय पर कीट और रोग प्रबंधन नहीं की जाए तो किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। 

     

    केले की खेती में मुख्य रूप से तना बेधक, फल छेदक और सूत्र कृमि कीटों का प्रकोप होता है। 

    केले की खेती में लगने वाले रोगों में पनामा, बांची टॉप, ऐन्थ्रेक्रोज और हार्टराट रोग प्रमुख हैं।  

     

    बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अजीत सिंह बताते हैं,

    केले की खेती के लिए पौधा रोपण  के समय ही कंदों का उपचार बेहद जरूरी है। यदि हम स्वस्थ कंद और पौधों का उपयोग करते हैं तो हम केले में लगने वाले रोगों से बच सकते हैं।

    वे आगे कहते हैं कि बचाव ही उपचार है, इसलिए

    • सदैव संक्रमण मुक्त पौधे का ही चुनाव करें। 
    • रोग प्रतिरोधी प्रजातियों को ही उगाएं।
    • जिस बाग में रोग लग गया हो, तो उस खेत में 4 से 5 वर्षों तक केले की खेती नहीं करें।
    • प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दें।
    • पौधों के दूरी 1.5 मीटर से कम नहीं रखें।

     

    केले की खेती से कमाई (banana farming profit)

     

    केले की खेती अच्छी आमदनी वाली फसल है। बाज़ार में फल के अलावा सब्जी के रूप में भी काफी मांग रहती है। यदि किसान अच्छी क्वालिटी  केले का उत्पादन करें तो इससे लाखों की कमाई कर सकते हैं। 

     

    आपको बता दें, केले पर प्रति एकड़ एक लाख रु. की लागत आती है और ढाई लाख रु. तक शुद्ध मुनाफा होता है।

     

    केले की बागवानी के लिए ज़रूरी टिप्स

     

    बागवनी विशेषज्ञ और कृषि विज्ञान केंद्र बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) के वैज्ञानिक डॉ. अजीत सिंह  का कहना है कि 

    • खेत को खरपतवारों से मुक्त रखें और समय-समय पर खराब पत्तों  को पौधे से हटा दें  
    • हरी खाद का प्रयोग करें, इसके लिए आप फसल चक्र अपना कर लोबिया, ढेंचा जैसी हरी खाद को उगा सकते हैं।
    • पानी की बचत और खरपतवार प्रबंधन के लिए प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग करें। 
    • केले के पौधों को तेज हवा और लू से बचाने के लिए खेत के चारों तरफ वायुरोधी पौधे का रोपण करें। 

     

    केले की बागवानी

     

    संक्षेप में कहें तो केले की खेती किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी करने में काफी कारगर साबित हो सकती है। आज यह कई लोगों के लिए रोजगार का हिस्सा बन चुकी है। केले की खेती कमाई के साथ-साथ युवाओं के लिए रोज़गार का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। 

     

    केले की खेती से जुड़ा यह ब्लॉग आपको कैसा लगा? कमेंट करके जरूर बताएं। खेती से जुड़ी और भी जानकारियां हम आपको देते रहेंगे। इसके लिए आप हमारे फेसबुक, ट्विटर और लिंकडिन पेज से भी जुड़ सकते हैं। 

     

    यदि आप इस तरह के ज्ञानवर्धक ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं, तो आप हमारे अन्य ब्लॉग ज़रूर पढ़ें। अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो ब्लॉग को शेयर करना बिल्कुल भी न भूलें।  

    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता



    यह भी पढ़ें



    कृषि की अन्य ब्लॉग