खेती के साथ करें पशुपालन, आय में होगी बढ़ोतरी

खेती के साथ करें पशुपालन, आय में होगी बढ़ोतरी

किसानों की आय बढ़ाने में के लिए अनेक विकल्प हैं, जिसमें पशुपालन का स्थान अग्रणी है। यह कृषि से होने वाली आय में योगदान प्रदान करता है। आइए विस्तार से जानें..

13 February 2021

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  • आज के दौर में किसानों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है आमदनी। कहा जाता है जब खेती से अपेक्षित आमदनी न मिले, तो पशुपालन से पैसा कमाना चाहिए। यह एक ऐसा व्यवसाय है, जिससे साल भर आमदनी हो सकती है। किसान खेती के साथ पशुपालन पर भी ध्यान दें, तो उनकी आमदनी में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। यह ऐसा रोज़गार है, जिसे छोटे और भूमिहीन किसान भी आसानी से कर सकते हैं। 

     

    पशुपालन (Animal husbandry) न केवल रोज़गार का एक मज़बूत ज़रिया है, बल्कि  गरीबी और कुपोषण पर काबू पाने में मदद करता है। यदि आप खेती के साथ पशुपालन करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके काम का है।

     

    यहां आप जानेंगे-

     

    • पशुपालन के फायदे
    • व्यावसायिक पशुपालन क्या है?
    • खेती के साथ कैसे करें पशुपालन?
    • अच्छी नस्लों का चुनाव कैसे करें?
    • पशुपालन में लागत और कमाई 
    • एक्सपर्ट की सलाह

     

    आइए सबसे पहले जानते हैं खेती के साथ पशुपालन के क्या-क्या फायदे हैं। 

     

    प्राचीन समय में खेती पशुओं की सहायता के बिना  संभव नहीं थी। खेती के अधिकांश कामों में जानवरों का सहारा लिया जाता था। आज भी खेती के साथ पशुपालन के कई लाभ हैं। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। यह एक प्रकार से समेकित खेती (Integrated farming) है, जिसमें फसलों और जानवरों दोनों को लाभ मिलता है। पशुओं से मिलने वाले  गोबर और मूत्र से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती  है। खेती से हमें वर्ष भर आमदनी नहीं हो पाती है, लेकिन पशुपालन से हमें वर्ष भर नियमित रूप से आय प्राप्त होती रहती है।

     

    व्यावसायिक पशुपालन क्या है?

     

    व्यावसायिक पशुपालन में पशुओं की संख्या अधिक होती है। इस प्रकार का पशुपालन बहुत ही व्यवस्थित और वैज्ञानिक तकनीकी से किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक आमदनी पाना होता है। जैसे- डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म। 

     

    खेती के साथ कैसे करें पशुपालन?

     

    इस विषय पर पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार रजक कहते हैं,  

     

    “भारत दुनिया में दुग्ध उत्पादन में नंबर एक पर है। पूरी दुनिया के आधे पशु भारत में पाए जाते हैं, लेकिन उनसे उत्पादन उतना नहीं। इसलिए ज़रूरी है कि किसान और पशुपालक परंपरागत ज्ञान के साथ विज्ञान का सहारा लें, खेती और पशुपालन में नई तकनीकों का इस्तेमाल करें।” 

     

    वे आगे कहते हैं कि किसान को सुविधानुसार पशुओं का पालन करना चाहिए, ताकि चारे का प्रबंध उनके खेत से ही हो सके। 

     

    पशुपालन में 5 बातों का ध्यान रखें-

     

    1. उन्नत नस्लों का चुनाव करें
    2. पशुओं को संतुलित मात्रा में आहार दें
    3. पशुओं को रखने वाले स्थान मानक के अनुरूप ही रखें
    4. रोग न लगे, इसके लिए पशुओं का टीकाकरण कराएं
    5. बाज़ार की उपलब्धता के अनुसार ही पशुओं का चुनाव करें

     

    अच्छी नस्लों का चुनाव कैसे करें?

     

    • जहां तक संभव हो पशुओं की खरीददारी विश्वसनीय स्रोतों से करें
    • पशुओं की खरीददारी के लिए अनुभवी गौपालकों से सलाह लें
    • खरीददारी से पहले थनों (Udder) की जांच कर लें, चारों बालियां समान और अलग-अगल होनी चाहिए
    • दो से तीन दांत वाले पशुओं की खरीददारी करें
    • हमेशा पहले या दूसरे ब्यांत के पशुओं का चुनाव करें
    • खरीदने से पहले पशु की वंशावली, उसकी दुग्ध उत्पादन क्षमता देख लें

     

    पशुपालन में लागत और कमाई

     

    खेती के साथ पशुपालन करना मुनाफे का सौदा है। इसमें लागत की बात करें तो कुल कमाई का लगभग 70 प्रतिशत चारे और रखरखाव में खर्च होता है, बाकी 30 प्रतिशत शुद्ध आय के रूप में प्राप्त होती है। अगर पशुओं की संख्या की बात करें तो 10 गाय से प्रतिवर्ष 4-5 लाख का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। इसके अलावा आप गोबर से भी कमाई कर सकते हैं। 

     

    पशुपालन का मतलब सिर्फ गाय-भैंस नहीं है, इसके अलावा आप बकरी, भेड़, ऊंट, मुर्गीपालन भी कर सकते हैं। दूध  से बने उत्पाद में ज़्यादा मुनाफा है। जब दूध हो तो उसे सीधे न बेचें बल्कि उससे प्रोडेक्ट बनाएं, जैसे खोया, पनीर और दूसरे प्रोडक्ट, जिनसे आप की अच्छी कमाई होगी। 

     

    पशुपालन में ध्यान रखने योग्य 10 बातें

     

    1. पशुओं के आवास हवादार और साफ रखें 
    2. आवास में मानक के अनुरूप ही पशु की संख्या हो
    3. पशुबाड़े की फर्श खुरदरी और नाली के तरफ ढलान हो
    4. पशुओं में गर्मी के लक्षण दिखने पर सजग रहें
    5. पशु को गर्मी में आने के 12 घंटे बाद ही गर्भाधान कराना चाहिए
    6. गाय की स्वदेशी नस्लों (साहीवाल, गिर, गंगातीरी, थारपारकर) और भैसों में मुर्रा या भदावरी नस्ल को पालना चाहिए
    7. बकरी पालन के लिए जमुनापारी या बरबरी प्रजाति का चुनाव करना चाहिए
    8. पशुओं को स्वस्थ्य रखने और दुग्ध उत्पादन के लिए संतुलित आहार और हरा चारा दें
    9. दूध देने वाले पशुओं को अच्छी गुणवत्ता का मिनरल मिक्सचर पाउडर खिलाना चाहिए
    10. बीमारी के होने से पहले पशुओं को टीका अवश्य लगवाएं 

     

    दोगुनी आय का साधन है  वैज्ञानिक विधि से पशुपालन

     

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    ✍️

    लेखक- दीपक गुप्ता



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