अनार की बागवानी से करें कमाई

अनार की बागवानी कैसे करें, आइए जानें

अगर आप बागवानी करना चाहते हैं, तो अनार की बागवानी आपके लिए रोज़गार का एक बेहतर विकल्प है। अनार की खेती से आप लाखों रुपये कमा सकते हैं। आइए विस्तार से जानें...

19 January 2021

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  • अनार पौष्टिक गुणों से भरपूर, स्वादिष्ट और रसीला फल है। इसमें फाइबर, विटामिन्स, फोलिक एसिड, एंटी ऑक्सीडेंट और औषधीय गुण मौजूद होते हैं। स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण डॉक्टर्स भी बीमारियों और शरीर में खून की कमी होने पर अनार(Anar) का सेवन करने की सलाह देते हैं।

     

    बागवानी फसलों में अनार (Pomegranate) का महत्वपूर्ण स्थान है। अन्य फलों की तरह अनार की बागवानी (Pomegranate Farming) में ढ़ेरों संभावनाएं हैं। घरेलू और विदेशी बाजार में अनार की भारी डिमांड को देखते हुए किसानों का रुझान अनार की खेती (Anar ki kheti) की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

     

    अनार की खेती से किसान कम समय में अधिक लाभ कमा सकते हैं। इसे एक बार लगा देने के बाद 18 से 20 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। 

     

    आज हम Knitter के इस ब्लॉग में अनार की बागवानी (Pomegranate Farming)  विषय पर चर्चा करेंगे। इस ब्लॉग में हम आपको अनार की बागवानी की पूरी जानकारी देंगे। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे- 

     

    • अनार के लिए जलवायु
    • अनार के लिए मिट्टी
    • अनार की पौध लगाने का समय
    • अनार की उन्नत किस्में
    • अनार की सिंचाई
    • अनार की फसल में लगने वाले रोग और उसका निदान
    • अनार की पैदावार और कमाई
    • अनार की बागवानी शुरू करने से पहले क्या करें
    • अनार की बागवानी की चुनौतियां
    • एक्सपर्ट देंगे अपनी सलाह

     

    जिससे आप अनार की सघन बागवानी (Pomegranate intensive Farming) करके आप अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

     

    तो आइए सबसे पहले अनार के लिए जलवायु(Climate) के बारे में जानते हैं। 

     

    अनार के लिए जलवायु

     

    अनार गर्म और शुष्क जलवायु का पौधा है। इसे शुष्क और अर्द्ध-शुष्क दोनों तरह की जलवायु में उगाया जा सकता है। 

     

    आपको बता दें, फलों के विकास और पकने के समय गर्म एवं शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। अनार के लिए 35°C से 40°C का तापमान सही रहता है क्योंकि लंबे समय तक उच्च तापमान रहने से फलों में मिठास बढ़ती है। 

     

    अनार के लिए मिट्टी

     

    अनार की खेती के लिए 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली क्षारीय मिट्टी उपयुक्त होती है। इसकी खेती के लिए बलुई-दोमट मिट्टी अच्छी होती है। रेतीली मिट्टी में भी अनार की अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। 

     

    अनार की बागवानी के लिए अच्छी बात है कि इसकी सिंचाई लवणीय पानी (Salt water) यानी सॉल्टी वाटर से भी की जा सकती है। 

     

    अनार के पौधे लगाने का समय

     

    अनार की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सबसे बेहतर होता है। यदि सिंचाई की पर्याप्त सुविधा हो तो आप फरवरी-मार्च में भी अनार का पौधा लगा सकते हैं।

     

    यदि आप कलम के द्वारा पौधारोपण (Plantation) करते हैं तो रोपाई के लगभग 2 या 3 साल बाद पेड़ फल देना शुरू कर देता है। 

     

    अनार की उन्नत किस्में (varieties)

     

    गणेश- इस किस्म के फल मध्यम आकार के, बीज कोमल और गुलाबी रंग के होते हैं। यह महाराष्ट्र की मशहूर और सबसे पुरानी किस्म है।

     

    भगवा-

    इस किस्म के फल बड़े आकार के भगवा रंग के चिकने और चमकदार होते हैं। इस किस्म से प्रति पौधा 30 से 38 किलोग्राम  उपज प्राप्त की जा सकती है।

     

    ज्योति-

    यह किस्म मध्यम से बड़े आकार के चिकनी सतह और पीलापन लिए हुए लाल रंग के होते हैं। इस किस्म से प्रति पौधा 10-12 किलोग्राम उत्पादन होता है।

     

    मृदुला-

    यह किस्म गहरे लाल रंग की होती है। इसके बीज मुलायम, रसदार और मीठे होते हैं। इस किस्म के फलों का औसत वजन 250-300 ग्राम होता है।

     

    कांधारी- इस किस्म के फल बड़े और अधिक रसीले और बीच कठोर होते हैं। 

    आपको बता दें, इसके अलावा भी कई उन्नत किस्में हैं। जैसे- अरक्ता रूबी, गुलेशाह, बेदाना, करकई इत्यादि। 

     

    अनार की सिंचाई

     

    जैसा कि हमने आपको  बताया, अनार शुष्क जलवायु का पौधा है। इसके लिए बहुत ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन इसके अच्छे उपज के लिए सिंचाई जरूरी है। 

     

    अनार की खेती में गर्मी में 6 से 7 दिन, सर्दी में 10 से 15 दिनों के अन्तराल पर 20 से 40 लीटर प्रति पौधा सिंचाई करनी चाहिए। बारिश के दिनों में भी आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई कर सकते हैं।  

     

    आपको बता दें, अनार की खेती के लिए बूंद-बूंद सिंचाई बेहतर होती है। सिंचाई के बाद गुड़ाई जरूर कर देनी चाहिए।

     

    अनार की फसल में लगने वाले रोग और इलाज

     

    अनार की फसल में लगने वाले रोगों में अनार की तितली, तना छेदक, माहू और सरकोस्पोरा फल धब्बा प्रमुख हैं। अनार के बाग में रोग ना लगें इसके लिए किसानों को खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसानों को चाहिए कि वे समय-समय पर अनार के पौधों की कटाई-छंटाई करते रहें। 

     

    किसानों को चाहिए कि जब भी किसी प्रकार रोग अनार की बाग में लगें, तुरंत कृषि वैज्ञानिकों या अधिकारियों से संपर्क करें। 

     

    अनार की खेती है फायदे का सौदा

     

    अनार की पैदावार और कमाई

     

    अनार की खेती से उपज किस्म और पौधे के रखरखाव पर निर्भर करती है। अनार की खेती में पौधे रोपण के 2-3 वर्ष पश्चात ये फल देना शुरू कर देता है। लेकिन व्यावसायिक रूप से उत्पादन रोपण के 4-5 वर्षों बाद ही लेना चाहिए। 200 से 250 प्रति एक पौधे से फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

     

    अनार की बागवानी में चुनौतियां

     

    अनार की खेती में सफलता के साथ-साथ किसानों को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। जैसे- 

    • हर साल पक्षी बड़ी मात्रा में अनार को चोंच से नोंच कर खराब कर देते हैं।
    • क्षेत्र में मंडी का अभाव है। जिसकी वजह से किसानों को सही भाव नहीं मिल पाता है। 
    • अनार की फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट रोग एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिसकी वजह से अनार में छेदक रोग होने की समस्या सबसे अधिक होती है। 

     

    संक्षेप में कहें तो अनार की खेती कमाई के साथ-साथ युवाओं के लिए रोज़गार का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। 

     

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    ✍️

    दीपक गुप्ता



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